UTTARAKHAND WEATHER UPDATE: उत्तराखंड में बीते कुछ दिनों से मौसम का मिला-जुला रूप देखने को मिल रहा है। राज्य के अधिकांश हिस्सों में दिन के समय तेज धूप के कारण तापमान बढ़ रहा है, जबकि सुबह और शाम के वक्त हल्की ठंड भी महसूस की जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक आज बुधवार को भी राज्य के ज्यादातर हिस्सों में मौसम शुष्क बना रहेगा, लेकिन कल यानि गुरुवार से एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के चलते पहाड़ी इलाकों में फिर बदलाव देखने को मिल सकता है।
UTTARAKHAND WEATHER UPDATE: अगले कुछ दिनों में तापमान में हो सकता है इजाफा
UTTARAKHAND WEATHER UPDATE के अनुसार आने वाले चार से पांच दिनों में अधिकतम तापमान में धीरे-धीरे 2 से 4 डिग्री सेल्सियस तक की बढ़ोतरी हो सकती है। देहरादून में आसमान साफ रहने की संभावना है, जहां अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री और न्यूनतम लगभग 18 डिग्री सेल्सियस रह सकता है।
मंगलवार को विभिन्न शहरों में दर्ज तापमान पर नजर डालें तो देहरादून में अधिकतम 33.6 और न्यूनतम 17.4 डिग्री सेल्सियस रहा। पंतनगर में अधिकतम 36.0 और न्यूनतम 11.8, मुक्तेश्वर में अधिकतम 24.3 और न्यूनतम 8.5, जबकि टिहरी में अधिकतम 23.4 और न्यूनतम 10.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
केदारनाथ में बर्फबारी
मंगलवार को रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों में हल्की बारिश हुई, वहीं केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम में बर्फबारी दर्ज की गई। केदारनाथ में अप्रैल महीने के भीतर यह पांचवीं बार बर्फ गिरने की घटना है। फिलहाल मैदान और पहाड़ दोनों ही क्षेत्रों में तापमान सामान्य के आसपास बना हुआ है।
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16 से 18 अप्रैल के बीच बारिश और बर्फबारी के आसार
UTTARAKHAND WEATHER UPDATE के अनुसार 16 अप्रैल को उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में कुछ स्थानों पर हल्की बारिश और गरज के साथ बूंदाबांदी की संभावना जताई गई है। 3800 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी भी हो सकती है। 17 और 18 अप्रैल को भी इन इलाकों में मौसम का यही रुख बने रहने के आसार हैं हल्की बारिश के साथ ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हिमपात जारी रह सकता है।

जानिए वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के बारे में और बढ़ाइए जानकारी
बीते कुछ सालों में उत्तराखंड में वेस्टर्न डिस्टर्बन्स (Western Disturbance) के चक्रों में आए बदलाव ने काफी बारिश (UTTARAKHAND WEATHER UPDATE) की है। ये एक तरह का मौसमी सिस्टम होता है जो सर्दियों के दौरान भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तरी हिस्सों को प्रभावित करता है। यह प्रणाली वायुमंडल की ऊपरी परतों में बनती है और भूमध्य सागर, अन्ध महासागर तथा कुछ हद तक कैस्पियन सागर से नमी लेकर आगे बढ़ती है।
जब यह उत्तर भारत, पाकिस्तान और नेपाल के क्षेत्रों तक पहुंचती है, तो अचानक बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का कारण बनती है। उत्तर भारत में रबी की फसलों, खासकर गेहूं के लिए यह मौसमीय गतिविधि बेहद फायदेमंद मानी जाती है, क्योंकि इससे फसल को जरूरी नमी मिलती है। यह समझना जरूरी है कि पश्चिमी विक्षोभ का मानसून से कोई संबंध नहीं है।

जहां एक ओर मानसून गर्मियों के मौसम में आता है और उसकी नमी हिन्द महासागर से आती है, वहीं इसका प्रभाव वायुमंडल की निचली परतों में होता है। मानसूनी वर्षा मुख्य रूप से खरीफ फसलों, जैसे धान, के लिए महत्वपूर्ण होती है, जबकि पश्चिमी विक्षोभ सर्दियों में सक्रिय होकर रबी फसलों को लाभ पहुंचाता है।
भारत में वेस्टर्न डिस्टर्बन्स के स्वरूप में हाल के सालों में कई बदलाव देखने को मिले हैं। जलवायु परिवर्तन के असर से अब ये सिस्टम केवल सर्दियों तक सीमित नहीं रह गए, बल्कि साल के अन्य महीनों में भी सक्रिय दिखाई देने लगे हैं। पहले जहां पश्चिमी विक्षोभ मुख्य रूप से दिसंबर से फरवरी के बीच सक्रिय रहते थे, वहीं अब ये प्री-मानसून अवधि यानी मार्च से मई के दौरान भी अधिक प्रभावी हो गए हैं।
आईआईटी रुड़की की 2026 की रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2026 में इनके प्रभाव से उत्तर भारत के कई हिस्सों में तापमान 10 से 15 डिग्री सेल्सियस तक गिर गया और तेज ओलावृष्टि भी दर्ज की गई।
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