केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने वरिष्ठ IAS अधिकारी प्रशांत सीताराम को नया CBSE चेयरमैन नियुक्त किया है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब CBSE का On-Screen Marking System (OSM) लगातार विवादों और सवालों के घेरे में है। हाल ही में OSM सिस्टम को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों द्वारा कई शिकायतें सामने आई थीं, जिसके बाद सरकार ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
CBSE OSM विवाद क्या है और क्यों बढ़ी चिंता?

CBSE OSM विवाद उस समय चर्चा का विषय बन गया जब कई छात्रों ने दावा किया कि उन्हें उपलब्ध कराई गई स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं उनकी वास्तविक लिखावट से मेल नहीं खा रही थीं। कुछ छात्रों ने उत्तर पुस्तिकाओं में पृष्ठों की कमी, अस्पष्ट स्कैनिंग और मूल्यांकन संबंधी त्रुटियों की भी शिकायत की। इन आरोपों ने CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए।
On-Screen Marking System को पारंपरिक मूल्यांकन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और तेज बनाने के उद्देश्य से लागू किया गया था। हालांकि इसके शुरुआती चरण में तकनीकी चुनौतियों और प्रक्रियागत खामियों के आरोपों ने इस परियोजना को विवादों के केंद्र में ला दिया।
प्रशांत सीताराम कौन हैं? नए CBSE चेयरमैन का प्रोफाइल
प्रशांत सीताराम, जिन्हें आधिकारिक रूप से लोकहांडे प्रशांत सीताराम के नाम से जाना जाता है, 2001 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी हैं। नियुक्ति से पहले वे गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के पद पर कार्यरत थे। उनके पास मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक डिग्री और इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में पोस्टग्रेजुएट डिप्लोमा है।
प्रशासनिक अनुभव और नीति निर्माण में उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए सरकार ने उन्हें देश के सबसे बड़े स्कूल शिक्षा बोर्ड की जिम्मेदारी सौंपी है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि उनकी नियुक्ति CBSE में विश्वास बहाली और संस्थागत सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है।
CBSE नेतृत्व में बदलाव क्यों जरूरी माना गया?
OSM विवाद के बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल प्रभाव से तत्कालीन CBSE चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया। इसके साथ ही OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया और कार्यान्वयन की जांच के लिए एक सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया।
सरकार के इस फैसले को CBSE में जवाबदेही सुनिश्चित करने और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। नए चेयरमैन के रूप में प्रशांत सीताराम के सामने सबसे बड़ी चुनौती OSM सिस्टम से जुड़े विवादों का समाधान निकालना होगी।
On-Screen Marking System पर उठे सवाल
CBSE OSM सिस्टम को उत्तर पुस्तिकाओं की डिजिटल स्कैनिंग और ऑनलाइन मूल्यांकन के लिए विकसित किया गया था। बोर्ड का दावा था कि इससे मूल्यांकन प्रक्रिया अधिक सटीक, पारदर्शी और तेज होगी। लेकिन परिणाम घोषित होने के बाद कई छात्रों ने कम अंक मिलने, उत्तर पुस्तिकाओं के स्कैन में त्रुटियां और तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायत की।
कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपलोड की गई उत्तर पुस्तिकाओं में विसंगतियां थीं, जिससे छात्रों के बीच असंतोष बढ़ा। इन शिकायतों ने सोशल मीडिया और छात्र संगठनों के बीच व्यापक बहस को जन्म दिया।
जांच समिति क्या करेगी?
सरकार द्वारा गठित जांच समिति OSM सेवाओं की खरीद प्रक्रिया, तकनीकी कार्यान्वयन और प्रशासनिक निर्णयों की समीक्षा करेगी। समिति का नेतृत्व एस. राधा चौहान कर रही हैं, जिन्हें आवश्यक होने पर अन्य विभागों के अधिकारियों की सहायता लेने का अधिकार भी दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद CBSE की डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली में बड़े सुधार देखने को मिल सकते हैं। इससे भविष्य में छात्रों और अभिभावकों का भरोसा मजबूत करने में मदद मिलेगी।
नए CBSE चेयरमैन के सामने प्रमुख चुनौतियां
प्रशांत सीताराम के सामने कई महत्वपूर्ण चुनौतियां हैं। सबसे पहले उन्हें OSM विवाद से जुड़े मुद्दों को सुलझाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी हो। इसके अलावा छात्रों की शिकायतों के समाधान के लिए प्रभावी तंत्र विकसित करना भी आवश्यक होगा।
डिजिटल शिक्षा और परीक्षा प्रबंधन के बढ़ते महत्व को देखते हुए CBSE को तकनीकी रूप से अधिक मजबूत और सुरक्षित बनाना भी उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा। साइबर सुरक्षा, डेटा प्रबंधन और ऑनलाइन मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता बढ़ाना आने वाले समय में अहम विषय होंगे।
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शिक्षा क्षेत्र पर क्या पड़ेगा असर?
CBSE देशभर के लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा हुआ है। ऐसे में नए CBSE चेयरमैन की नियुक्ति केवल प्रशासनिक बदलाव नहीं बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार का अवसर भी है। यदि OSM विवाद का निष्पक्ष समाधान निकलता है और डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को मजबूत बनाया जाता है, तो इससे छात्रों का विश्वास बढ़ेगा और शिक्षा प्रणाली अधिक पारदर्शी बन सकेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीकी नवाचारों को अपनाने के साथ-साथ उनकी गुणवत्ता और निगरानी पर भी विशेष ध्यान देना आवश्यक है। यही संतुलन CBSE के भविष्य को तय करेगा।
निष्कर्ष: प्रशांत सीताराम की नियुक्ति से बढ़ीं सुधारों की उम्मीदें
प्रशांत सीताराम का नए CBSE चेयरमैन के रूप में नियुक्त होना ऐसे समय में हुआ है जब बोर्ड OSM विवाद के कारण गंभीर जांच और आलोचना का सामना कर रहा है। केंद्र सरकार द्वारा नेतृत्व परिवर्तन और जांच समिति के गठन से यह संकेत मिलता है कि शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि नए नेतृत्व में CBSE OSM विवाद का समाधान कैसे करता है और छात्रों का विश्वास दोबारा जीतने के लिए कौन-कौन से कदम उठाए जाते हैं।

