ADHD यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक समस्या है, जिसमें पीड़ित व्यक्ति का मानसिक विकास सामान्य रूप से नहीं हो पाता। यह समस्या बच्चों और वयस्कों दोनों में देखी जा सकती है। आइए जानते हैं कि इस समस्या से कैसे बचा जा सकता है। ध्यानाभाव एवं अतिसक्रियता विकार (ADHD) एक दीर्घकालिक मानसिक विकार है जो लाखों बच्चों को प्रभावित करता है और कई बार यह समस्या वयस्क अवस्था तक बनी रहती है।

ADHD के प्रभाव गंभीर हो सकते हैं
एडीएचडी एक चिकित्सीय स्थिति है, जिसमें प्रभावित व्यक्ति के मस्तिष्क का विकास और उसकी गतिविधियाँ सामान्य लोगों की तुलना में भिन्न होती हैं। सरल शब्दों में कहें तो मस्तिष्क का विकास सही तरीके से नहीं हो पाता। ADHD से जूझ रहे लोगों में ध्यान केंद्रित करने, स्थिर बैठने, आत्म-नियंत्रण रखने और सामान्य व्यवहार करने की क्षमता में कमी होती है। इसके अलावा, ऐसे बच्चों को दूसरों से दोस्ती करने और घुलने-मिलने में भी कठिनाई होती है।

ADHD होने के ज्ञात कारण
एडीएचडी के कई कारण हो सकते हैं, जैसे दिमागी चोट, जन्म के बाद मस्तिष्क का सही विकास न होना, बच्चे का समय से पहले जन्म लेना, जन्म के समय कम वजन होना, मिरगी के दौरे आना, परिवार में पहले से किसी को ADHD होना, गर्भावस्था के दौरान मस्तिष्क का सही विकास न होना, गर्भावस्था के दौरान शराब या तंबाकू का सेवन करना, या फिर पर्यावरणीय जोखिमों के संपर्क में आना। यदि आप इन कारणों को अपने जीवन में देख रहे हैं, तो तुरंत किसी मानसिक रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

एडीएचडी के लक्षण ये हैं
एडीएचडी के लक्षणों में व्यक्ति का हमेशा कल्पना और ख्यालों में खोया रहना, चीजों को भूल जाना, अधिक या बहुत कम बोलना, लापरवाही से गलतियाँ करना, अनावश्यक जोखिम उठाना, और दूसरों से घुलने-मिलने में कठिनाई का सामना करना शामिल है। अगर आपके बच्चे में भी ऐसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो समय पर इलाज के लिए किसी अच्छे मानसिक रोग विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

एडीएचडी का इलाज
एडीएचडी के इलाज में दवाइयाँ दी जाती हैं, जो मस्तिष्क को ध्यान केंद्रित करने और आत्म-नियंत्रण का उपयोग करने की क्षमता को सुधारने में मदद करती हैं। इसके अलावा, व्यवहार चिकित्सा का उपयोग किया जाता है, जिससे बच्चों को सामाजिक, भावनात्मक और नियोजन कौशल विकसित करने में मदद मिलती है। माता-पिता को बच्चों के प्रति अपना व्यवहार बदलने के लिए कोचिंग दी जाती है, ताकि वे ADHD से पीड़ित बच्चों के साथ सही व्यवहार कर सकें। शिक्षकों का भी ADHD वाले बच्चों पर विशेष ध्यान देना आवश्यक होता है, ताकि वे समाज में सही ढंग से घुल-मिल सकें।

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