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उत्तराखंड में अगस्त के बाद घूमने का प्लान? भीड़ से दूर ये 5 जगहें रहेंगी खास, मानसून में बदल जाएगा पहाड़ों का रंग

उत्तराखंड का नाम आते ही पर्यटकों के मन में नैनीताल, मसूरी, ऋषिकेश और औली जैसी लोकप्रिय जगहों की तस्वीर उभरती है। लेकिन छुट्टियों और लंबे वीकेंड के दौरान इन प्रमुख पर्यटन स्थलों पर भारी भीड़ जुट जाती है। ऐसे में अगर आप अगस्त के बाद उत्तराखंड की यात्रा की योजना बना रहे हैं और भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच कुछ शांत समय बिताना चाहते हैं, तो राज्य की कई कम चर्चित जगहें बेहतर विकल्प साबित हो सकती हैं।

मानसून के दौरान उत्तराखंड के पहाड़ों का स्वरूप भी काफी बदल जाता है। बारिश के बाद जंगलों की हरियाली, पहाड़ी ढलानों पर उभरते झरने, बादलों से ढकी चोटियां और धुंध से घिरी घाटियां पर्यटकों को अलग तरह का अनुभव देती हैं। हालांकि, बरसात में पहाड़ी यात्रा करते समय मौसम और सड़क की स्थिति को ध्यान में रखना जरूरी है।

1. मुक्तेश्वर: शांति और हिमालयी नजारों का संगमउत्तराखंड

नैनीताल जिले में स्थित मुक्तेश्वर उन यात्रियों के लिए अच्छा विकल्प है जो लोकप्रिय पर्यटन केंद्रों की भीड़ से दूर रहना चाहते हैं। समुद्र तल से लगभग 2,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह इलाका घने जंगलों, पहाड़ी रास्तों और हिमालय के खूबसूरत दृश्यों के लिए जाना जाता है।

मानसून के बाद यहां हरियाली और अधिक आकर्षक हो जाती है। सुबह के समय बादल पहाड़ों के आसपास मंडराते दिखाई देते हैं और साफ मौसम में दूर तक हिमालय की चोटियां नजर आ सकती हैं।

मुक्तेश्वर में शांत वातावरण के साथ-साथ मंदिर, प्रकृति की सैर और पहाड़ी गांवों का अनुभव भी लिया जा सकता है। अगर आपका उद्देश्य सिर्फ पर्यटन स्थलों की सूची पूरी करना नहीं, बल्कि कुछ दिन प्रकृति के बीच बिताना है, तो यह जगह उपयोगी विकल्प हो सकती है।

2. पिथौरागढ़: पहाड़ों के बीच एक शांत ठिकाना

उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित पिथौरागढ़ प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपनी भौगोलिक और सांस्कृतिक विशेषताओं के लिए भी जाना जाता है। आमतौर पर नैनीताल या मसूरी की तुलना में यहां पर्यटकों की भीड़ कम देखने को मिलती है।

मानसून के बाद पिथौरागढ़ और आसपास के पहाड़ी क्षेत्र हरियाली से भर जाते हैं। घाटियों पर छाए बादल और पहाड़ों के बीच से गुजरती सड़कें यात्रा को यादगार बना सकती हैं।

यहां पहुंचने वाले पर्यटक स्थानीय संस्कृति, पहाड़ी भोजन और आसपास के प्राकृतिक स्थलों का अनुभव कर सकते हैं। लंबे वीकेंड में कुछ अलग देखने की इच्छा रखने वाले यात्रियों के लिए पिथौरागढ़ एक अच्छा विकल्प हो सकता है।

हालांकि, बरसात के मौसम में यहां जाने से पहले सड़क की स्थिति और मौसम का पूर्वानुमान जरूर देखना चाहिए।

3. चौकोरी: बादलों और हिमालय के बीच ठहरने का मौका

कुमाऊं क्षेत्र का चौकोरी भी उन जगहों में शामिल है जहां प्रकृति का शांत रूप देखने को मिलता है। यह इलाका हिमालयी दृश्यों और चाय के बागानों के लिए जाना जाता है।

अगस्त के बाद यहां मौसम में धीरे-धीरे बदलाव आने लगता है। बारिश के बाद आसपास की पहाड़ियां हरी हो जाती हैं और बादलों के बीच से हिमालय की चोटियों का दृश्य बेहद आकर्षक दिखाई देता है।

चौकोरी का सबसे बड़ा आकर्षण इसकी शांति है। यहां घूमने वाले यात्रियों को बड़े पर्यटन शहरों जैसी भीड़ और लगातार ट्रैफिक का सामना अपेक्षाकृत कम करना पड़ता है। ऐसे लोग जो मोबाइल और शहर की भागदौड़ से कुछ समय दूर रहना चाहते हैं, उनके लिए चौकोरी बेहतर ठिकाना हो सकता है।

4. खिर्सू: देवदार के जंगलों के बीच सुकून

गढ़वाल क्षेत्र में स्थित खिर्सू अपनी हरियाली और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यह जगह उन पर्यटकों के लिए खास हो सकती है जो पहाड़ों में एकांत और प्राकृतिक वातावरण की तलाश में रहते हैं।

मानसून के बाद खिर्सू के आसपास के जंगल और पहाड़ी ढलान बेहद हरे दिखाई देते हैं। देवदार के पेड़ों के बीच से गुजरती सड़कें और बादलों से घिरे पहाड़ यहां की खूबसूरती बढ़ा देते हैं।

खिर्सू में किसी बड़े पर्यटन शहर की तरह बहुत ज्यादा व्यावसायिक गतिविधियां नहीं हैं। यही इसकी खासियत है। यहां कुछ समय ठहरकर प्रकृति को करीब से महसूस किया जा सकता है।

5. कनाताल: मसूरी की भीड़ से दूर पहाड़ी अनुभव

टिहरी गढ़वाल क्षेत्र का कनाताल भी उन यात्रियों के बीच लोकप्रिय हो रहा है जो मसूरी जैसे व्यस्त पर्यटन स्थलों के बजाय शांत पहाड़ी वातावरण पसंद करते हैं।

घने जंगल, पहाड़ी रास्ते और दूर तक दिखाई देने वाली घाटियां कनाताल को खास बनाती हैं। मानसून के बाद यहां हरियाली और धुंध का मेल बेहद सुंदर दिखाई देता है।

कनाताल में प्रकृति के साथ समय बिताने के अलावा स्थानीय गांवों और पहाड़ी जीवन को करीब से देखने का अवसर भी मिलता है। लंबे वीकेंड पर यहां छोटी अवधि की यात्रा भी बनाई जा सकती है।

मानसून में यात्रा करते समय इन बातों का रखें ध्यान

उत्तराखंड में मानसून के दौरान यात्रा करना खूबसूरत अनुभव हो सकता है, लेकिन इसके साथ जोखिम भी जुड़े होते हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक बारिश के कारण भूस्खलन, सड़क अवरोध और अचानक जलस्तर बढ़ने जैसी परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।

इसलिए यात्रा से पहले मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की एडवाइजरी देखना जरूरी है। जिस मार्ग से यात्रा करनी है, उसकी ताजा स्थिति की जानकारी भी लेनी चाहिए।

बारिश के दौरान नदी, नाले और झरनों के बहुत करीब जाने से बचना चाहिए। पहाड़ों में मौसम तेजी से बदल सकता है, इसलिए पर्याप्त गर्म कपड़े, रेनकोट, जरूरी दवाएं और चार्जिंग की व्यवस्था साथ रखना उपयोगी रहेगा।

वाहन से यात्रा करने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। रात में पहाड़ी सड़कों पर यात्रा करने से बचना और खराब मौसम में अनावश्यक जोखिम न लेना बेहतर है।

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लंबे वीकेंड पर क्यों चुनें कम भीड़ वाली जगहें?

उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्र छुट्टियों के दौरान अक्सर पर्यटकों से भर जाते हैं। होटल के किराये बढ़ सकते हैं, ट्रैफिक बढ़ जाता है और कई लोकप्रिय स्थानों पर प्राकृतिक शांति का अनुभव मुश्किल हो जाता है।

इसके मुकाबले कम चर्चित स्थानों पर यात्रा का अनुभव ज्यादा शांत हो सकता है। स्थानीय बाजार, गांव, जंगल और पहाड़ी रास्ते यहां की यात्रा को अधिक प्राकृतिक बनाते हैं।

हालांकि, कम भीड़ का अर्थ यह नहीं है कि हर जगह पूरी तरह खाली मिलेगी। अगस्त के बाद मौसम में सुधार के साथ इन क्षेत्रों में भी पर्यटकों की संख्या बढ़ सकती है। इसलिए लंबे वीकेंड की यात्रा के लिए होटल और परिवहन की बुकिंग पहले करना बेहतर रहेगा।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में घूमने के लिए हमेशा नैनीताल, मसूरी या ऋषिकेश जैसे लोकप्रिय स्थलों पर जाना जरूरी नहीं है। अगर आपका मकसद भीड़ से दूर रहकर पहाड़ों की प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेना है, तो मुक्तेश्वर, पिथौरागढ़, चौकोरी, खिर्सू और कनाताल जैसे विकल्प आपकी यात्रा को अलग अनुभव दे सकते हैं।

अगस्त के बाद पहाड़ों में हरियाली, बादल और साफ होती चोटियों का आकर्षण बढ़ जाता है। लेकिन मानसून के दौरान यात्रा करते समय उत्साह के साथ सावधानी भी जरूरी है। मौसम की ताजा जानकारी, सड़क की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की सलाह को ध्यान में रखकर बनाई गई यात्रा ही सुरक्षित और यादगार साबित होगी।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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