पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के कार्यालय से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। हाईकोर्ट ने 5 अक्टूबर को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से सामने रखी गई जानकारी के आधार पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को मामला दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया था। राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ मंगलवार तड़के करीब 1:42 बजे विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल की।
मामला मुख्यमंत्री के ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी (OSD) राजबीर सिंह घुमन और उनसे कथित तौर पर जुड़े कुछ लोगों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों से संबंधित है। ED ने आरोप लगाया था कि एक कथित बिचौलिये के जरिए सरकारी अधिकारियों के तबादलों और पोस्टिंग, टेंडर, नीतिगत फैसलों और अन्य सरकारी कामकाज को प्रभावित करने की कोशिश की गई।
सुप्रीम कोर्ट में बुधवार या गुरुवार को सुनवाई संभव
पंजाब सरकार की याचिका पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में तत्काल सुनवाई की मांग की गई। वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष मामले को तुरंत सूचीबद्ध करने का अनुरोध किया।
राज्य सरकार की ओर से दलील दी गई कि हाईकोर्ट के आदेश पर तत्काल रोक लगाना जरूरी है। सरकार ने तर्क दिया कि CBI जांच का निर्देश राज्य के अधिकारियों के खिलाफ ऐसे समय दिया गया है, जब राज्य में विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। सरकार ने इसे संघीय ढांचे से जुड़े सवाल के रूप में भी पेश किया। सुप्रीम कोर्ट ने उसी दिन सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि मामले को बुधवार या गुरुवार को सूचीबद्ध करने की कोशिश की जाएगी।
हाईकोर्ट ने CBI को क्यों सौंपी जांच?
यह मामला वकील निखिल सराफ की ओर से दायर जनहित याचिका से सामने आया। याचिका में ED द्वारा पंजाब के DGP को भेजी गई जानकारी का हवाला देते हुए आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की गई थी।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि ED की ओर से उपलब्ध कराई गई सामग्री में प्रथम दृष्टया गंभीर आरोपों के संकेत मिलते हैं। अदालत के अनुसार, सामग्री में सरकारी अधिकारियों के तबादलों के बदले कथित नकद लेनदेन, अनुकूल नीतिगत फैसलों और टेंडर से जुड़े कथित लेनदेन जैसे आरोप शामिल थे। अदालत ने हालांकि स्पष्ट किया कि आरोपों की मेरिट का अंतिम फैसला जांच और ट्रायल के दौरान ही किया जाएगा।
हाईकोर्ट ने CBI को FIR दर्ज कर जांच आगे बढ़ाने और दो महीने के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया था। पंजाब पुलिस और राज्य सरकार को जांच एजेंसी को आवश्यक सहयोग देने के लिए भी कहा गया।
ED ने OSD राजबीर घुमन को लेकर क्या आरोप लगाए?
ED की ओर से भेजी गई जानकारी के मुताबिक, राजबीर सिंह घुमन के साथ कथित तौर पर जुड़े नितिन गोहल और बिर देविंदर का नाम सामने आया था। एजेंसी का आरोप था कि नितिन गोहल सरकारी कामकाज में लाभ हासिल करने के इच्छुक लोगों और घुमन के बीच कथित बिचौलिये के तौर पर काम करता था।
आरोपों में सरकारी अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग प्रभावित करने, गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक पहुंच, हथियार लाइसेंस से जुड़े मामलों में मदद और सरकारी मंजूरियों को प्रभावित करने जैसी बातें शामिल हैं। हालांकि, ये सभी आरोप जांच के दायरे में हैं और अभी अदालत द्वारा दोष सिद्ध नहीं किए गए हैं।
पंजाब सरकार ने CBI जांच पर क्या आपत्ति जताई?
राज्य सरकार का मुख्य तर्क है कि पंजाब ने CBI को सामान्य सहमति वापस ले रखी है और ऐसे में राज्य के क्षेत्र में जांच के लिए विशेष परिस्थितियों की आवश्यकता होती है। सरकार का कहना है कि हाईकोर्ट ने राज्य की प्रारंभिक आपत्तियों और पंजाब पुलिस की प्रारंभिक जांच को पर्याप्त महत्व नहीं दिया।
पंजाब सरकार के मुताबिक, ED की सूचना मिलने के बाद पंजाब पुलिस के ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन ने प्रारंभिक जांच शुरू की थी और अलग-अलग विभागों से जानकारी जुटाई जा रही थी। सरकार ने दावा किया कि ED से संबंधित दस्तावेज और रिकॉर्ड उपलब्ध कराने को लेकर भी पत्राचार हुआ था।
CBI ने दर्ज की FIR, कई जगहों पर तलाशी
सुप्रीम कोर्ट में चुनौती के बीच मामले में जांच का घटनाक्रम तेजी से आगे बढ़ा। CBI ने राजबीर सिंह घुमन और अन्य लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की तथा चंडीगढ़ स्थित मुख्यमंत्री के कैंप ऑफिस समेत करीब आठ ठिकानों पर तलाशी ली। जांच के दौरान इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और दस्तावेजों समेत विभिन्न सामग्रियां जब्त किए जाने की जानकारी सामने आई है।
इस घटनाक्रम ने पंजाब सरकार और केंद्रीय जांच एजेंसियों के बीच टकराव को और बढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कार्रवाई को राजनीतिक निशाना बनाए जाने से जोड़ा है, जबकि जांच एजेंसियां अदालत के निर्देशों और सामने आई सामग्री के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही हैं।
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अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नजर
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। शीर्ष अदालत यह तय करेगी कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के CBI जांच के आदेश पर रोक लगाई जाए या जांच को आगे बढ़ने दिया जाए।
फिलहाल मामले में आरोपों की जांच जारी है और किसी भी आरोपी के खिलाफ अंतिम दोषसिद्धि नहीं हुई है। सुप्रीम कोर्ट की आगामी सुनवाई यह तय करने में महत्वपूर्ण होगी कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच किस एजेंसी और किस दायरे में आगे बढ़ेगी।

