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129 वैगन और 3 इंजन वाली ‘अवध महाशक्ति’ ने रचा इतिहास, पूर्वोत्तर रेलवे की सबसे लंबी मालगाड़ी का सफल संचालन

भारतीय रेलवे के माल परिवहन क्षेत्र में पूर्वोत्तर रेलवे (NER) ने एक बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। लखनऊ मंडल ने अपनी अब तक की सबसे लंबी मालगाड़ी ‘अवध महाशक्ति’ का सफल संचालन किया। इस विशेष मालगाड़ी में 129 वैगन और तीन लोकोमोटिव लगाए गए थे। करीब दो किलोमीटर लंबी इस ट्रेन ने उत्तर प्रदेश में गोंडा से सीतापुर तक लगभग 160 किलोमीटर की दूरी तय की। रेलवे के अनुसार, इस प्रयोग का उद्देश्य एक ही फेरे में अधिक माल परिवहन करना और ट्रैक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल करना है।

पूर्वोत्तर रेलवे के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि ‘अवध महाशक्ति’ का संचालन इस जोन में पहली बार किया गया। ट्रेन को तीन अलग-अलग मालगाड़ियों के रेक को जोड़कर तैयार किया गया था। इससे अलग-अलग तीन ट्रेनों को एक ही परिचालन में चलाने की जरूरत कम हुई और रेलवे के महत्वपूर्ण ट्रैक पर दो अतिरिक्त परिचालन स्लॉट बचाए जा सके।

20 अगस्त को गोंडा से रवाना हुई ट्रेन

‘अवध महाशक्ति’ को 20 अगस्त 2026 को गोंडा यार्ड में तैयार किया गया। इसके बाद ट्रेन दोपहर करीब 1:50 बजे गोंडा से रवाना हुई और शाम करीब 5:40 बजे सीतापुर पहुंची। लगभग 160 किलोमीटर की यात्रा इस मालगाड़ी ने करीब 3 घंटे 50 मिनट में पूरी की। इसकी औसत गति लगभग 42 किलोमीटर प्रति घंटा रही।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इतनी लंबी मालगाड़ी को एक साथ संचालित करना परिचालन की दृष्टि से चुनौतीपूर्ण होता है। इसके लिए लोकोमोटिव, वैगन, सिग्नलिंग, ट्रैक क्षमता और नियंत्रण कक्ष के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत होती है।

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि यह लंबी मालगाड़ी तीन BCN रेक को जोड़कर बनाई गई थी। इसमें कुल 129 खाली BCN वैगन और तीन इंजन शामिल थे।

तीन ट्रेनों को जोड़कर बनी ‘अवध महाशक्ति’अवध

‘अवध महाशक्ति’ की सबसे खास बात इसका गठन है। सामान्य तौर पर अलग-अलग माल रेक अलग-अलग ट्रेनों के रूप में चलते हैं। इस प्रयोग में तीन रेक को एक साथ जोड़ दिया गया और उन्हें तीन इंजनों की मदद से एक लंबी ट्रेन के रूप में संचालित किया गया।

इस व्यवस्था का सीधा लाभ रेलवे की परिचालन क्षमता पर पड़ता है। तीन अलग-अलग ट्रेनों को एक ही मार्ग से अलग-अलग समय पर भेजने के बजाय उन्हें एक साथ चलाया गया। इससे ट्रैक पर दो अतिरिक्त ट्रेन-पैसेज की जरूरत कम हुई। रेलवे के अनुसार, यह विशेष रूप से BCN खाली वैगनों को उत्तर भारत के लोडिंग क्षेत्रों तक पहुंचाने में उपयोगी है।

BCN वैगन सामान्यतः थोक माल ढुलाई के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इनका इस्तेमाल खाद्यान्न सहित विभिन्न प्रकार के माल के परिवहन में किया जा सकता है। ऐसे वैगनों की उपलब्धता माल ढुलाई व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण होती है।

अवध महाशक्ति -करीब दो किलोमीटर लंबी ट्रेन

129 वैगनों और तीन इंजनों के कारण ‘अवध महाशक्ति’ की लंबाई करीब दो किलोमीटर तक पहुंच गई। इतनी लंबी ट्रेन सामान्य मालगाड़ियों की तुलना में कई गुना बड़ी होती है।

इतनी लंबी ट्रेन को चलाने के लिए रेलवे को कई परिचालन पहलुओं पर विशेष ध्यान देना पड़ता है। ट्रेन की लंबाई के कारण सिग्नलिंग, क्रॉसिंग, स्टेशन यार्ड और लूप लाइन की क्षमता का भी ध्यान रखना पड़ता है।

इस तरह के लंबे-हॉल ऑपरेशन में ट्रेन के आगे और पीछे मौजूद लोकोमोटिवों का समन्वय भी महत्वपूर्ण होता है। तीन इंजनों की व्यवस्था भारी और लंबी ट्रेन को खींचने में मदद करती है।

दिल्ली-गुवाहाटी रेल संपर्क के लिए अहम मार्ग

गोंडा-बुर्हवाल-सीतापुर रेलखंड High-Density Network-4 (HDN-4) का हिस्सा है। यह महत्वपूर्ण रेल नेटवर्क दिल्ली को गुवाहाटी से जोड़ता है और देश के उत्तरी तथा पूर्वोत्तर हिस्सों के बीच माल एवं यात्री रेल संपर्क में अहम भूमिका निभाता है।

ऐसे व्यस्त रेलखंड पर लंबी मालगाड़ी चलाने का प्रयोग इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि यहां ट्रैक क्षमता का अधिकतम इस्तेमाल करना जरूरी है। यदि एक ही परिचालन में ज्यादा माल पहुंचाया जा सके तो रेलवे को कम फेरे में अधिक माल ढोने में मदद मिल सकती है।

इससे भविष्य में माल ढुलाई के लिए रेलवे की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता भी बढ़ सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां सड़क परिवहन की तुलना में रेल के जरिए बड़ी मात्रा में माल भेजना अधिक प्रभावी है।

समय और ईंधन की बचत की उम्मीद

‘अवध महाशक्ति’ का सबसे बड़ा फायदा यह है कि तीन अलग-अलग रेक को एक ही ट्रेन में जोड़ने से समय, ईंधन और ट्रैक क्षमता का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है।

एक ही फेरे में तीन रेक के बराबर माल ढुलाई होने से अलग-अलग परिचालन की आवश्यकता घटती है। इससे रेलवे के परिचालन संसाधनों का अधिक कुशल उपयोग संभव होता है।

हालांकि, किसी एक संचालन से दीर्घकालिक आर्थिक लाभ का अंतिम आकलन करना जल्दबाजी होगा। लेकिन रेलवे के लिए यह प्रयोग भारी-भरकम माल ढुलाई और लंबे-हॉल ट्रेनों के संचालन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम जरूर है।

भारतीय रेलवे में लंबे मालगाड़ियों का बढ़ता चलन

भारतीय रेलवे पिछले कुछ वर्षों में लंबी मालगाड़ियों के संचालन पर जोर देता रहा है। इसका उद्देश्य एक ही ट्रेन में अधिक माल ले जाकर परिचालन लागत और ट्रैक उपयोग को बेहतर बनाना है।

इससे पहले भारतीय रेलवे ने ‘रुद्रास्त्र’ नाम से देश की सबसे लंबी मालगाड़ियों में से एक का संचालन किया था। ईस्ट सेंट्रल रेलवे के पंडित दीन दयाल उपाध्याय मंडल द्वारा संचालित उस ट्रेन में छह खाली BOXN रेक को जोड़ा गया था। उसमें 354 वैगन और सात इंजन थे और इसकी लंबाई करीब 4.5 किलोमीटर बताई गई थी।

इस तुलना से स्पष्ट है कि ‘अवध महाशक्ति’ राष्ट्रीय स्तर पर सबसे लंबी मालगाड़ी नहीं है, लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे के इतिहास में यह सबसे लंबी मालगाड़ी है। इसका महत्व इसी क्षेत्रीय रिकॉर्ड और परिचालन प्रयोग के कारण है।

माल ढुलाई बढ़ाने की रणनीति

भारतीय रेलवे के लिए माल ढुलाई आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। कोयला, खाद्यान्न, सीमेंट, उर्वरक, पेट्रोलियम उत्पाद और अन्य थोक वस्तुओं को बड़ी मात्रा में एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने में रेलवे की भूमिका महत्वपूर्ण है।

लंबी मालगाड़ियों का संचालन इसी रणनीति का हिस्सा है। यदि रेलवे कम ट्रेनों में ज्यादा माल ले जाने में सफल होता है तो इससे उपलब्ध रेल नेटवर्क का अधिक प्रभावी इस्तेमाल किया जा सकता है।

‘अवध महाशक्ति’ जैसे प्रयोग भविष्य में और अधिक लंबे रेक संचालित करने के लिए अनुभव भी प्रदान कर सकते हैं।

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भविष्य में ऐसे और संचालन की संभावना

पूर्वोत्तर रेलवे का यह प्रयोग सफल रहने के बाद लंबे-हॉल मालगाड़ियों के संचालन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। हालांकि, इसके लिए अलग-अलग रेलखंडों की क्षमता, स्टेशन यार्ड, सिग्नलिंग व्यवस्था और परिचालन परिस्थितियों का मूल्यांकन जरूरी होगा।

हर रेलखंड पर इतनी लंबी ट्रेन चलाना संभव नहीं होता। इसलिए जहां पर्याप्त ट्रैक क्षमता और उपयुक्त परिचालन व्यवस्था उपलब्ध हो, वहीं ऐसे लंबे रेक को नियमित या आवश्यकता के अनुसार संचालित किया जा सकता है।

निष्कर्ष

पूर्वोत्तर रेलवे की ‘अवध महाशक्ति’ ने 129 वैगन और तीन इंजनों के साथ करीब दो किलोमीटर लंबी मालगाड़ी के रूप में एक नया क्षेत्रीय रिकॉर्ड बनाया है। 20 अगस्त को गोंडा से रवाना होकर इस ट्रेन ने लगभग 160 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए सीतापुर तक सफलतापूर्वक सफर पूरा किया।

तीन अलग-अलग माल रेक को एक ट्रेन में जोड़कर चलाने से रेलवे ने एक ही फेरे में अधिक माल परिवहन की क्षमता हासिल की और दो अतिरिक्त ट्रेन-पैसेज बचाए। इससे ट्रैक, समय और ईंधन के बेहतर इस्तेमाल की संभावना बनी है।

हालांकि ‘अवध महाशक्ति’ देश की सबसे लंबी मालगाड़ी नहीं है, लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे के लिए यह एक महत्वपूर्ण परिचालन उपलब्धि है। आने वाले समय में ऐसे लंबे-हॉल संचालन भारतीय रेलवे की माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने और उपलब्ध रेल नेटवर्क का अधिक कुशल इस्तेमाल करने की रणनीति में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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