Current Ratio एक आसान वित्तीय पैमाना है, जो बताता है कि कोई कंपनी या कारोबार अपने एक साल के अंदर चुकाए जाने वाले बिल और कर्ज आराम से चुका पाएगा या नहीं। कई बार बिजनेस में बिक्री और मुनाफा अच्छा दिखता है, फिर भी महीने के आखिर में सप्लायर और सैलरी का भुगतान करने के लिए पैसा कम पड़ जाता है। ऐसी स्थिति पहले से पहचानने में यही अनुपात मदद करता है।
इसे लिक्विडिटी रेशियो क्यों कहते हैं?
लिक्विडिटी का मतलब है कि किसी कारोबार के पास कितनी जल्दी नकद पैसा उपलब्ध हो सकता है। यह अनुपात कंपनी की इसी ताकत को मापता है, इसलिए इसे लिक्विडिटी रेशियो या वर्किंग कैपिटल रेशियो भी कहा जाता है। बैंक लोन देने से पहले, निवेशक शेयर खरीदने से पहले और सप्लायर उधार माल देने से पहले अक्सर इसे जरूर देखते हैं।
करंट एसेट्स और करंट लायबिलिटीज क्या हैं?
करंट एसेट्स वे चीजें हैं, जो एक साल के अंदर नकद में बदली जा सकती हैं। इनमें हाथ में नकद, बैंक बैलेंस, ग्राहकों से मिलने वाला बकाया पैसा, गोदाम में रखा स्टॉक और छोटी अवधि के निवेश शामिल होते हैं। करंट लायबिलिटीज वे देनदारियां हैं, जो एक साल के अंदर चुकानी होती हैं। इनमें सप्लायर का बकाया, छोटी अवधि का लोन, बकाया टैक्स, बिजली और किराए जैसे बकाया खर्च और लंबे लोन की इस साल की किस्तें आती हैं।
Current Ratio निकालने का फॉर्मूला
इसका फॉर्मूला बहुत सीधा है: करंट रेशियो = करंट एसेट्स ÷ करंट लायबिलिटीज मान लीजिए एक होलसेल दुकान के पास नकद, बैंक बैलेंस, स्टॉक और ग्राहकों का बकाया मिलाकर 10 लाख रुपये हैं। उसी दुकान को सप्लायर, बैंक और टैक्स के मिलाकर एक साल में 5 लाख रुपये चुकाने हैं। तो हिसाब होगा 10 लाख ÷ 5 लाख = 2। यानी दुकान के पास हर एक रुपये की देनदारी के बदले 2 रुपये की करंट संपत्ति है।
इससे बिजनेस की सेहत कैसे पता चलती है?
अगर यह अनुपात 1 से कम है, तो कारोबार के पास देनदारियां चुकाने लायक संपत्ति कम है। ऐसे में उसे भुगतान के लिए नया कर्ज लेना पड़ सकता है, जो खतरे का संकेत माना जाता है। आम तौर पर 1.5 से 2 के बीच का अनुपात संतुलित और सुरक्षित माना जाता है।
इसका मतलब है कि कारोबार अपने बिल समय पर चुका सकता है और उसके पास थोड़ा अतिरिक्त सहारा भी है। बहुत ज्यादा अनुपात भी हमेशा अच्छा नहीं होता। यह दिखा सकता है कि गोदाम में बहुत ज्यादा माल पड़ा है, ग्राहकों से पैसा वसूल नहीं हो रहा या नकद बिना इस्तेमाल के पड़ा है।
इसकी कमियां भी समझ लें
यह अनुपात स्टॉक को भी नकद जैसा मान लेता है, जबकि पुराना या धीरे बिकने वाला माल जल्दी पैसे में नहीं बदलता। इसी कमी को दूर करने के लिए क्विक रेशियो देखा जाता है, जिसमें स्टॉक को शामिल नहीं किया जाता। हर इंडस्ट्री का सही स्तर भी अलग होता है। किराना या FMCG जैसे रोज नकद बिक्री वाले कारोबार कम अनुपात पर भी आराम से चल जाते हैं, जबकि मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों को ज्यादा अनुपात की जरूरत होती है।

इसे सुधारने के आसान तरीके
ग्राहकों से बकाया पैसा समय पर वसूल करें और उधार की अवधि छोटी रखें। बेकार पड़ा पुराना स्टॉक छूट देकर निकाल दें, ताकि उसमें फंसा पैसा वापस आ सके। छोटी अवधि के महंगे कर्ज को लंबी अवधि के लोन में बदलने से भी हर साल की देनदारी घटती है। साथ ही गैरजरूरी खर्चों पर नियंत्रण रखकर नकद बचाएं।
बिजनेस फाइनेंस से जुड़ी और जानकारी
कंपनी के आंकड़ों को और बेहतर समझने के लिए ये लेख भी पढ़ें: EBITDA क्या होता है और नतीजों में इसका असली मतलब, PEG Ratio क्या है और सिर्फ P/E देखना क्यों अधूरा है और Invoice क्या है और बिजनेस के लिए क्यों जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. एक अच्छा Current Ratio कितना होना चाहिए?
ज्यादातर कारोबारों के लिए 1.5 से 2 के बीच का Current Ratio अच्छा माना जाता है, लेकिन सही स्तर इंडस्ट्री और कारोबार के तरीके पर भी निर्भर करता है।
2. Current Ratio और क्विक रेशियो में क्या फर्क है?
करंट रेशियो में स्टॉक को भी संपत्ति में गिना जाता है, जबकि क्विक रेशियो में स्टॉक को हटाकर सिर्फ जल्दी नकद बनने वाली संपत्तियां गिनी जाती हैं।
3. किसी कंपनी का Current Ratio आंकड़ा कहां से देखें?
कंपनी की बैलेंस शीट में करंट एसेट्स और करंट लायबिलिटीज अलग से लिखी होती हैं। लिस्टेड कंपनियों के लिए कई शेयर बाजार वेबसाइट्स यह अनुपात सीधे भी दिखाती हैं।
4. इस Current Ratio के बारे में ज्यादा विस्तार से कहां पढ़ें?
Current Ratio की विस्तृत जानकारी विकिपीडिया पर उपलब्ध है।
आगे और समाचार पढ़े:
Current Ratio से जुड़ी जानकारी के अलावा, ये अन्य बड़ी खबरें भी पढ़ें:
- BrahMos Aerospace Secures ₹661.50-Crore Navy Contract as India Boosts Maritime Strike Capability
- स्क्रीन से बाहर निकलकर आपके कमरे तक कैसे पहुंचती है डिजिटल दुनिया? जानिए Mixed Reality का कमाल
- USB OTG क्या है और यह आपके स्मार्टफोन को कैसे बना देता है मिनी कंप्यूटर?
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

