HomeBusinessकंपनी शुरू करने के बाद न करें ये गलती, जानिए क्यों जरूरी...

कंपनी शुरू करने के बाद न करें ये गलती, जानिए क्यों जरूरी है Shareholders Agreement

Shareholders Agreement शब्द अक्सर तब सुनने को मिलता है जब कोई नई कंपनी शुरू होती है या कई लोग मिलकर बिजनेस में पैसा लगाते हैं। बहुत से लोगों को यह समझ नहीं आता कि यह असल में करता क्या है और क्यों जरूरी है। सच यह है कि बिना सही Shareholders Agreement के, partners के बीच बाद में बड़े विवाद खड़े हो सकते हैं।

Shareholders Agreement क्या है?

ये एक legal document है जो कंपनी के shareholders के बीच rights, duties और जिम्मेदारियां तय करता है। यह agreement बताता है कि decision-making कैसे होगी, profit कैसे बंटेगा और अगर कोई shareholder कंपनी छोड़ना चाहे तो प्रक्रिया क्या होगी।

क्यों जरूरी है?

जब भी दो या ज्यादा लोग मिलकर business शुरू करते हैं, शुरुआत में सब कुछ अच्छा लगता है। लेकिन समय के साथ मतभेद आना आम बात है। ये Agreement इन मतभेदों को सुलझाने का रास्ता पहले से तय कर देता है, जिससे कंपनी का काम बीच में रुकता नहीं है। यही वजह है कि नई companies को incorporation के तुरंत बाद ही Shareholders Agreement बना लेना चाहिए, ना कि विवाद होने के बाद।

क्या-क्या शामिल होता है?

एक अच्छे Shareholders Agreement में shareholding pattern, voting rights और board representation जैसी बातें साफ लिखी होती हैं। इसमें share transfer की शर्तें, नए investor को जोड़ने का तरीका और exit clause भी शामिल होते हैं। कई agreements में non-compete और confidentiality की शर्तें भी जोड़ी जाती हैं। ऐसे में ये Agreement सिर्फ कागज नहीं बल्कि पूरे बिजनेस की नींव जैसा काम करता है।

इसमें और Articles of Association में फर्क

बहुत से लोग इसे को Articles of Association समझ बैठते हैं, जबकि दोनों अलग हैं। Articles of Association कंपनी का public document होता है, जबकि ये Agreement आमतौर पर private रहता है और सिर्फ shareholders के बीच लागू होता है।

Startups के लिए महत्व

भारत में जब भी कोई startup incorporation की प्रक्रिया पूरी करता है, उसके फौरन बाद एक मजबूत Shareholders Agreement बनाना समझदारी माना जाता है। चाहे आपने LLP या Pvt Ltd में से कोई भी structure चुना हो, ये Agreement founders और investors दोनों के हितों की रक्षा करता है।

Shareholders Agreement
Shareholders Agreement

अगर कंपनी के पास Shareholders Agreement नहीं है, तो disputes को सुलझाने के लिए सीधे court या arbitration का सहारा लेना पड़ सकता है, जिसमें समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। इसलिए हर corporation चाहे छोटी हो या बड़ी, उसे शुरुआत में ही Shareholders Agreement तैयार कर लेना चाहिए।

FAQ

Q1. Shareholders Agreement किसे बनाना चाहिए?
जिस भी कंपनी में एक से ज्यादा shareholders हों, उन्हें Shareholders Agreement जरूर बनाना चाहिए, चाहे कंपनी छोटी हो या बड़ी।

Q2. क्या Shareholders Agreement कानूनी रूप से जरूरी है?
भारत में यह कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है, लेकिन disputes से बचने के लिए इसे बनाना अत्यंत जरूरी माना जाता है।

Q3. Shareholders Agreement में exit clause क्यों जरूरी है?
अगर कोई shareholder कंपनी छोड़ना चाहे तो exit clause यह तय करता है कि share की कीमत कैसे तय होगी और प्रक्रिया क्या रहेगी।

Q4. Shareholders Agreement कैसे तैयार किया जाता है?
इसे आमतौर पर एक कॉर्पोरेट वकील की मदद से तैयार किया जाता है, जो सभी shareholders की जरूरतों को ध्यान में रखकर शर्तें तय करता है। इस विषय पर विस्तृत जानकारी Investopedia पर भी देखी जा सकती है।

Q5. क्या Shareholders Agreement बाद में बदला जा सकता है?
हां, सभी shareholders की सहमति से Shareholders Agreement में बदलाव किया जा सकता है।

आगे और समाचार पढ़ें:

ये अन्य बड़ी खबरें भी पढ़ें:

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

WhatsApp Group
Join Now
RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular