Senior Citizen Tax Benefits यानी बुजुर्गों को इनकम टैक्स में मिलने वाली खास छूट, रिटायरमेंट के बाद टैक्स का बोझ काफी कम कर सकती हैं। इसके बावजूद बहुत से पेंशनभोगी और बुजुर्ग जानकारी की कमी के कारण इनका पूरा फायदा नहीं उठा पाते।
इस लेख में आसान भाषा में जानिए कि 60 साल से ऊपर के लोगों को टैक्स में क्या क्या राहत मिलती है और टैक्स भरते समय किन बातों का ध्यान रखें।
कौन माना जाता है सीनियर सिटीजन?
इनकम टैक्स के नियमों में 60 से 79 साल तक के भारतीय निवासी को सीनियर सिटीजन और 80 साल या उससे ज्यादा उम्र वाले को सुपर सीनियर सिटीजन माना जाता है। उम्र की गिनती वित्त वर्ष के दौरान की जाती है।
ध्यान रहे कि Senior Citizen Tax Benefits सिर्फ भारत के निवासी बुजुर्गों को मिलते हैं। विदेश में रहने वाले एनआरआई बुजुर्ग इनका लाभ नहीं ले सकते।
नया इनकम टैक्स कानून, फायदे वही
1 अप्रैल 2026 से इनकम टैक्स एक्ट 2025 लागू हो गया है और इसमें धाराओं के नंबर बदल गए हैं। अच्छी बात यह है कि Senior Citizen Tax Benefits की सीमाएं और फायदे पहले जैसे ही रखे गए हैं। इस लेख में आसानी के लिए पुराने और जाने पहचाने धारा नंबर लिखे गए हैं।
Senior Citizen Tax Benefits: मिलने वाली मुख्य छूट
ज्यादा टैक्स फ्री आय की सीमा
पुरानी टैक्स व्यवस्था में आम लोगों के लिए 2.5 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री है, जबकि सीनियर सिटीजन के लिए यह सीमा 3 लाख और सुपर सीनियर सिटीजन के लिए 5 लाख रुपये है।
नई टैक्स व्यवस्था में उम्र के हिसाब से अलग सीमा नहीं है, लेकिन यहां 12 लाख रुपये तक की टैक्सेबल आय पर रिबेट के कारण टैक्स शून्य हो जाता है। पेंशन पर 75,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन जोड़ें, तो पेंशनभोगियों के लिए यह सीमा करीब 12.75 लाख रुपये हो जाती है।
ब्याज पर 50,000 रुपये तक छूट
बैंक, डाकघर और कोऑपरेटिव बैंक के बचत खाते, एफडी और आरडी से मिलने वाले 50,000 रुपये तक के ब्याज पर धारा 80टीटीबी के तहत छूट मिलती है। यह फायदा सिर्फ पुरानी टैक्स व्यवस्था में है।
हेल्थ इंश्योरेंस और इलाज पर छूट
Senior Citizen Tax Benefits में धारा 80डी के तहत बुजुर्ग अपने हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर 50,000 रुपये तक की छूट ले सकते हैं। अगर बीमा नहीं है, तो इलाज के खर्च पर भी इसी सीमा में छूट मिल सकती है।
कुछ गंभीर बीमारियों के इलाज पर धारा 80डीडीबी के तहत सीनियर सिटीजन को 1 लाख रुपये तक की अतिरिक्त छूट मिलती है। ये दोनों छूट भी पुरानी व्यवस्था में ही मिलती हैं।
टीडीएस और एडवांस टैक्स में राहत
Senior Citizen Tax Benefits में टीडीएस की राहत भी शामिल है। बुजुर्गों के लिए एक बैंक से साल में 1 लाख रुपये तक के ब्याज पर टीडीएस नहीं कटता।
अगर कुल आय पर टैक्स बनता ही नहीं है, तो बैंक में फॉर्म 15एच जमा करके टीडीएस कटने से पूरी तरह बचा जा सकता है। यह फॉर्म हर वित्त वर्ष की शुरुआत में जमा करना बेहतर रहता है।
जिन बुजुर्गों की कोई कारोबारी या प्रोफेशनल आय नहीं है, उन्हें एडवांस टैक्स भरने की जरूरत नहीं होती। वे पूरा टैक्स रिटर्न भरते समय एक साथ चुका सकते हैं।
75 साल से ऊपर वालों को रिटर्न से छूट
75 साल या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों को कुछ शर्तों पर इनकम टैक्स रिटर्न भरने से छूट मिलती है। शर्त यह है कि उनकी आय सिर्फ पेंशन और उसी बैंक के ब्याज से हो, जहां पेंशन आती है।
ऐसे में बैंक को एक घोषणा पत्र देना होता है और बैंक खुद सारी छूट जोड़कर टैक्स काटता है। यह सुविधा Senior Citizen Tax Benefits में सबसे ज्यादा राहत देने वाली मानी जाती है।
कौन सी टैक्स व्यवस्था चुनें?
जिन बुजुर्गों की आय ज्यादातर पेंशन से है और कुल आय 12.75 लाख रुपये के आसपास या उससे कम है, उनके लिए नई व्यवस्था अक्सर आसान और फायदेमंद रहती है।
जिनकी ब्याज आय ज्यादा है और हेल्थ इंश्योरेंस या इलाज पर बड़ा खर्च होता है, उन्हें दोनों व्यवस्थाओं में टैक्स की गणना करके ही फैसला करना चाहिए। सही जानकारी के साथ Senior Citizen Tax Benefits का पूरा फायदा उठाकर हर साल अच्छी बचत की जा सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या नई टैक्स व्यवस्था में बुजुर्गों को ब्याज पर छूट मिलती है?
नहीं, Senior Citizen Tax Benefits में शामिल ब्याज पर 50,000 रुपये की छूट सिर्फ पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है। - फॉर्म 15एच कौन जमा कर सकता है?
Senior Citizen Tax Benefits के नियमों के अनुसार 60 साल से ऊपर का कोई भी भारतीय निवासी, जिसकी कुल आय पर टैक्स शून्य बनता हो, बैंक या डाकघर में फॉर्म 15एच जमा कर सकता है। - क्या माता पिता के हेल्थ इंश्योरेंस पर बच्चों को छूट मिलती है?
हां, पुरानी व्यवस्था में सीनियर सिटीजन माता पिता का प्रीमियम भरने पर बच्चे 50,000 रुपये तक की अतिरिक्त छूट ले सकते हैं। - आधिकारिक जानकारी कहां मिलेगी?
बुजुर्गों के टैक्स नियमों की आधिकारिक जानकारी इनकम टैक्स विभाग की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। टैक्स से जुड़ा फैसला लेने से पहले किसी टैक्स विशेषज्ञ या चार्टर्ड अकाउंटेंट से सलाह जरूर लें।

