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उत्तर प्रदेश MLC चुनाव में भाजपा की रणनीति: मूल कैडर से आगे ‘जिताऊ’ चेहरों पर जोर, बाहरी चेहरों पर भरोसा

उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी(भाजपा )ने अपने उम्मीदवारों की तस्वीर साफ कर दी है। पार्टी की ओर से घोषित नामों में संगठन के पारंपरिक कैडर के साथ शिक्षक संगठनों से जुड़े और अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि वाले चेहरे भी शामिल हैं। उम्मीदवारों के चयन में चुनावी अनुभव, स्थानीय पकड़ और जीत की क्षमता को महत्व दिए जाने की चर्चा है। यह चुनाव ऐसे समय हो रहा है जब प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां भी तेज हो रही हैं।

छह सीटों पर भाजपा ने घोषित किए उम्मीदवारभाजपा

भाजपा ने शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की छह सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित किए हैं। पार्टी ने वाराणसी स्नातक सीट से केदार नाथ सिंह, मेरठ स्नातक से दिनेश गोयल, इलाहाबाद-झांसी स्नातक से अशोक कुमार राठौर, वाराणसी शिक्षक सीट से डॉ. प्रमोद मिश्रा, आगरा शिक्षक सीट से इंजीनियर हरि किशोर तिवारी और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक सीट से ध्रुव त्रिपाठी को मैदान में उतारा है।

इन नामों में कुछ ऐसे चेहरे हैं जिनकी पहचान पार्टी के पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे से अलग शिक्षक संगठनों या अपने क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय सामाजिक-राजनीतिक गतिविधियों से जुड़ी रही है। इसी वजह से उम्मीदवारों की सूची को भाजपा की चुनावी रणनीति में बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उम्मीदवार चयन का अंतिम उद्देश्य पार्टी नेतृत्व ही स्पष्ट कर सकता है।

पुराने चेहरों को भी मिला टिकट

भाजपा ने पूरी तरह नए या बाहरी चेहरों पर निर्भरता नहीं दिखाई है। पार्टी ने पहले घोषित उम्मीदवारों में मौजूदा एमएलसी और पुराने चेहरों को भी दोबारा मौका दिया था। इनमें लखनऊ स्नातक सीट से अवनीश कुमार सिंह, आगरा स्नातक से डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह, बरेली-मुरादाबाद शिक्षक सीट से डॉ. हरि सिंह ढिल्लों, लखनऊ शिक्षक सीट से उमेश द्विवेदी और मेरठ शिक्षक सीट से श्रीचंद शर्मा शामिल हैं।

इस तरह भाजपा की सूची में संगठन के अनुभवी नेताओं और संबंधित निर्वाचन क्षेत्रों में पहले से सक्रिय चेहरों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश दिखाई देती है। टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पार्टी ने छह में से तीन मौजूदा एमएलसी को भी दोबारा उम्मीदवार बनाया है।

भाजपा का शिक्षक और स्नातक मतदाताओं पर विशेष फोकस

विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग होता है। यहां मतदाताओं का सामाजिक और पेशेवर आधार विशेष प्रकार का होता है। शिक्षक, उच्च शिक्षा से जुड़े लोग और स्नातक मतदाता इन निर्वाचन क्षेत्रों में निर्णायक भूमिका निभाते हैं।

इसी वजह से उम्मीदवारों का व्यक्तिगत नेटवर्क, संबंधित संगठनों में प्रभाव और लंबे समय से क्षेत्र में सक्रियता चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण हो सकती है। हाल की रिपोर्टों में भी भाजपा द्वारा ऐसे उम्मीदवारों को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आई है जिनका अपने निर्वाचन क्षेत्र में चुनावी आधार या संगठनात्मक अनुभव है।

भाजपा का 2027 विधानसभा चुनाव से पहले अहम परीक्षा

एमएलसी चुनाव का महत्व केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के परिणाम राजनीतिक दलों के लिए संगठनात्मक तैयारी, सामाजिक समीकरण और स्थानीय स्तर पर समर्थन का आकलन करने का एक अवसर भी होंगे। इंडियन एक्सप्रेस ने इन चुनावों को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों के लिए एक महत्वपूर्ण परीक्षण बताया है।

भाजपा के लिए यह चुनाव खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पार्टी एक ओर अपने पारंपरिक समर्थन आधार को बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग सामाजिक और पेशेवर समूहों तक अपनी पहुंच बढ़ाने पर भी जोर दे रही है।

सपा ने भी उतारे अपने उम्मीदवार

भाजपा के मुकाबले समाजवादी पार्टी ने भी शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की है। रिपोर्टों के अनुसार, सपा ने अपने उम्मीदवार चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व और अपने पीडीए राजनीतिक फॉर्मूले को केंद्र में रखा है। इस तरह दोनों दलों की उम्मीदवार सूचियों में अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक प्राथमिकताएं दिखाई दे रही हैं।

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23 अक्टूबर को मतदान, 27 अक्टूबर को नतीजे

उत्तर प्रदेश में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की 11 विधान परिषद सीटों के लिए मतदान 23 अक्टूबर 2026 को होना है, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल दिसंबर में समाप्त हो रहा है और उससे पहले चुनाव प्रक्रिया पूरी की जानी है।

इन चुनावों में भाजपा द्वारा पुराने संगठनात्मक चेहरों के साथ शिक्षक संगठनों और क्षेत्रीय स्तर पर प्रभाव रखने वाले उम्मीदवारों को जगह देना पार्टी की चुनावी रणनीति का अहम हिस्सा है। अब उम्मीदवारों की स्थानीय पकड़, मतदाता संपर्क और संगठन की चुनावी तैयारी यह तय करेगी कि अलग-अलग निर्वाचन क्षेत्रों में मुकाबला किस दिशा में जाता है।

 

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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