इस छोटे से पत्थर को नहीं उठा सकता कोई पहलवान भी

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Kamar Ali Darvesh Dargah: जिस पत्थर को नहीं उठा सकता एक पहलवान उसे 11 लोग मिलकर कैसे उठा लेते हैं कानी उंगली से?  

Kamar Ali Darvesh Dargah: 90 किलो का वो पत्थर जिसे कई पहलवान तक नहीं उठा पाते लेकिन 11 लोग मिलकर इस पत्थर को अपनी अपनी कानी उंगली से उठा लेते हैं। आखिर कैसे इतने भारी पत्थर (Kamar Ali Darvesh Dargah) को कानी उंगली से उठाया जा सकता है।

दरअसल ये पत्थर मुंबई से करीबन 16 किलोमीटर दूर पूणे- बेंगलुरु हाइवे पर स्थित एक गांव में मौजूद है जिसका नाम है शिवपुरी गांव। इसी गांव में कमर अली शाह दरवेश (Kamar Ali Darvesh Dargah) की दरगाह मौजूद है जहां ये रहस्यमयी और चमत्कारी पत्थर मौजूद है।

इस पत्थर (Kamar Ali Darvesh Dargah) का वजन करीबन 90 किलो से भी ज्यादा है और इसे कोई भी पहलवान आजतक अकेला नहीं उठा पाया है और न ही इसे पहलवानों का कोई झुंड उठा पाया है, लेकिन अगर इस पत्थर को 11 लोग मिलकर कानी उंगली और पवित्र मन से उठाएं तो इसे उठाया जा सकता है।

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ऐसी मान्यता है कि जब ये 11 लोग इस पत्थर (Kamar Ali Darvesh Dargah) को उठाते हुए सूफी संत कमर अली शाह (Kamar Ali Darvesh Dargah) का नाम लेते हैं तभी इस पत्थर को उठाया जा सकता है और अगर इन 11 लोगों में से एक भी इंसान पत्थर को उठाते हुए सूफी संत कमर अली का नाम नहीं लेता है तो पत्थर का पूरा भार उस एक व्यक्ति पर आ जाता है। इस चमत्कारी पत्थर (Kamar Ali Darvesh Dargah) को उठाते समय लोग ज्यादातर यही कोशिश करते हैं कि वो बिना रुके सूफी संत कमर अली (Kamar Ali Darvesh Dargah) का नाम लेते रहें।

अब आते हैं इस पर कि आखिर क्यों इसे कोई भी हट्टा कट्टा इंसान अकेला नहीं उठा पाता है। दरअसल इसके पीछे एक कहानी है। जिस जगह पर आज ये दरगाह मौजूद है वहां एक समय पहले व्यायामशाला हुआ करती थी। इस जगह पर आकर सभी पहलवान कसरत किया करते थे और कमर अली के माता पिता भी चाहते थे कि अन्य पुरुषों की तरह ही उनका बेटा भी पहलवानी करे।

अब कमर अली को पहलवानी में कोई दिलचस्पी न थी जिसके कारण अन्य पहलवान उनका बहुत मजाक उड़ाते थे। एक बार सभी पहलवान आसपास रखे भारी पत्थरों को उठाकर वरजिश कर रहे थे और इसी दौरान वह सभी पहलवान, संत का मजाक भी बना रहे थे। ऐसे में संत ने उन सभी पहलवानों से कहा कि जिन पत्थरों को उठाकर तुम सभी के पसीने छूट रहे हैं उन्हें केलव एक उंगली से उठाया जा सकता है।

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संत द्वारा ये कहे जाने के बाद सभी पहलवान उनकी मजाक बनाने लगे, लेकिन जब उन्होंने संत द्वारा बताए गए तरीके से पत्थर उठाने की कोशिश की तो वाकई में वो पत्थर उठ गया।   

असल में संत दरवेश इन सभी पहलवानों को एक सीख देना चाहते थे। वह यह बताना चाहते थे कि शारीरिक ताकत से कई ज्यादा प्रभावशाली होती है आध्यात्मिक शक्ति। इसी कराण आज भी जब 11 लोग मिलकर संत कमर अली दरवेश (Kamar Ali Darvesh Dargah) का नाम लेकर इस पत्थर को उठाते हैं तो ये भारी भरकम पत्थर बड़ी ही आसानी से उठ जाता है। हालांकी इस दरगाह में महिलाओं का प्रवेश निषेद है, यहां केवल पुरुष ही जा सकते हैं।   

आपको बता दें कि कमर अली दरवेश (Kamar Ali Darvesh Dargah) एक सूफी संत थे जिनकी मृत्यु 18 साल की उम्र में ही हो गई थी, इसके बाद उनके पार्थिव शरीर को इसी जगह पर दफना दिया गया था जहां पर आज ये पत्थर (Kamar Ali Darvesh Dargah) मौजूद है। सूफी संत कमर अली शाह दरवेश (Kamar Ali Darvesh Dargah) की इस दरगाह में देश विदेश से कई लोग आते हैं, ऐसी मान्यता है कि जो कोई भी इस दरगाह (Kamar Ali Darvesh Dargah) पर आकर सच्चे दिल से मन्नत मांगता है वह कभी भी यहां से खाली हाथ नहीं लौटता है।

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