ISRAEL IRAN: मध्य पूर्व में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं, जहां इजराइल और ईरान के बीच तनाव अब खुला युद्ध बनता दिख रहा है। शुक्रवार तड़के इजराइल ने ‘ऑपरेशन राइजिंग लायन’ के तहत ईरान के सैन्य और परमाणु ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमला किया। इजराइल के रक्षा मंत्री इसराइल काट्ज ने इस अभियान की पुष्टि करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य ईरान की परमाणु हथियार बनाने की क्षमता को नष्ट करना और क्षेत्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।

हवाई हमलों में ISRAEL IRAN को भारी नुकसान
इजराइली वायु सेना ने इस ऑपरेशन में करीब 200 लड़ाकू विमानों का उपयोग किया, जिसमें अत्याधुनिक F-35 और F-15 जैसे विमान शामिल थे। यह हमले ईरान की राजधानी तेहरान, नतांज और अन्य महत्वपूर्ण सैन्य अड्डों पर किए गए। नतांज, जो ईरान के यूरेनियम संवर्धन केंद्र के रूप में जाना जाता है, को गंभीर नुकसान पहुंचा है। ईरानी अधिकारियों ने बताया कि वहां कई इमारतें और उपकरण पूरी तरह तबाह हो चुके हैं। तेहरान में भी जोरदार विस्फोट हुए, जिससे पूरा शहर धुएं और मलबे से भर गया।

ईरान का पलटवार और युद्ध का संकेत
इन हमलों में ईरान के सशस्त्र बलों के प्रमुख मेजर जनरल मोहम्मद बाघेरी सहित कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी मारे गए हैं। ईरानी मीडिया ने यह भी पुष्टि की है कि इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के प्रमुख हुसैन सलामी की भी इस हमले में मौत हो गई है। हमले के तुरंत बाद ईरान ने इजराइल पर लगभग 100 ड्रोनों से जवाबी हमला किया। इजराइली सेना ने दावा किया है कि उसने अधिकतर ड्रोनों को इंटरसेप्ट कर लिया। इस बीच, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामनेई ने कड़ी चेतावनी देते हुए देशभर में आपातकाल की घोषणा कर दी है और भूमिगत मिसाइल प्रणाली को भी सक्रिय कर दिया गया है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रभाव
इस हमले के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता की लहर फैल गई है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने पुष्टि की है कि इस्फहान में स्थित परमाणु संयंत्र सुरक्षित है। अमेरिका ने इजराइल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करते हुए मध्य पूर्व में अपनी सैन्य उपस्थिति और मजबूत कर दी है। जॉर्डन ने एहतियातन अपने हवाई क्षेत्र को सभी उड़ानों के लिए बंद कर दिया है, जिससे क्षेत्रीय हवाई यातायात प्रभावित हुआ है।

भारत सरकार ने इस संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की है और दोनों पक्षों से संयम बरतने की अपील की है। पूर्व भारतीय राजदूत रंजन मथाई ने कहा कि अगर यह संघर्ष हॉर्मुज जलडमरूमध्य तक पहुंचा तो भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति में गंभीर बाधा आ सकती है। भारत के पास फिलहाल 12 से 18 दिनों का तेल भंडार मौजूद है, लेकिन यदि यह संकट लंबा खिंचा तो देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दोनों को खतरा हो सकता है। इस स्थिति से घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

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