G7 SUMMIT: कनाडा के कनानास्किस में आयोजित 51वें G7 शिखर सम्मेलन में उस समय अप्रत्याशित मोड़ आ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने समिट बीच में ही छोड़कर वाशिंगटन लौटने का निर्णय लिया। यह फैसला उन्होंने मध्य पूर्व में तेजी से बिगड़ते हालात, विशेषकर इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को देखते हुए लिया। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि राष्ट्रपति ट्रम्प मध्य पूर्व की स्थिति और अन्य राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अमेरिका वापस लौटे हैं।

G7 SUMMIT के दौरान ट्रम्प ने ईरान को सख्त चेतावनी दी
G7 समिट के दौरान ट्रम्प ने ईरान को सख्त चेतावनी दी और कहा कि सभी को तुरंत तेहरान छोड़ देना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान को उनके द्वारा प्रस्तावित परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर देने चाहिए थे। उनका यह बयान ऐसे समय में आया जब इजरायल ने तेहरान स्थित कई सैन्य और परमाणु ठिकानों पर हवाई हमले किए, जिससे क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। हालांकि, ईरान का फोर्डो यूरेनियम संवर्धन केंद्र अब तक सुरक्षित बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि इसे नष्ट करने के लिए अमेरिका के पास मौजूद विशेष GBU-57 मासिव ऑर्डनेंस पेनेट्रेटर बम की जरूरत पड़ सकती है।

ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं
ट्रम्प ने इस बात का स्पष्ट संकेत नहीं दिया कि अमेरिका सैन्य रूप से इस संघर्ष में शामिल होगा या नहीं, लेकिन उनकी भाषा और रुख को कूटनीतिक दबाव के रूप में देखा जा रहा है। सम्मेलन के दौरान G7 देशों ने इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया और संयुक्त बयान में कहा कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने यह भी बताया कि ट्रम्प ने इजरायल और ईरान के बीच युद्धविराम के लिए प्रस्ताव रखा है, लेकिन इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई है।

ट्रम्प ने समिट में रूस को G7 में फिर से शामिल करने और चीन को आमंत्रित करने का सुझाव भी दिया। उन्होंने कहा कि 2014 में रूस को बाहर करने का फैसला वैश्विक अस्थिरता की एक बड़ी वजह रहा है। उनके इस बयान ने अन्य नेताओं के बीच नई बहस को जन्म दे दिया है। भारत इस समिट में एक विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसमें भाग लिया। हालांकि, ट्रम्प के जल्दी लौटने के कारण दोनों नेताओं की मुलाकात नहीं हो सकी। मोदी की भागीदारी को भारत-कनाडा संबंधों में सुधार और खालिस्तान मुद्दे पर पूर्व तनाव के बाद सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
नोट- सभी तस्वीरें इंटरनेट और G7 SUMMIT के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट से ली गई हैं।

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