Advance Tax का मतलब है अपनी सालाना कमाई पर बनने वाला इनकम टैक्स साल खत्म होने का इंतजार किए बिना, उसी वित्त वर्ष में किस्तों में पहले ही जमा कर देना। बहुत से लोग सोचते हैं कि टैक्स सिर्फ रिटर्न भरते समय चुकाया जाता है। फ्रीलांसर, दुकानदार, किराया कमाने वाले और शेयर बाजार से मुनाफा कमाने वाले लोग अक्सर इसी गलतफहमी में ब्याज भर बैठते हैं।
Advance Tax का आसान मतलब
इसे आम भाषा में “पहले से चुकाया गया टैक्स” या “पे एज यू अर्न” कहा जाता है। यानी जैसे जैसे कमाई होती है, वैसे वैसे टैक्स भी सरकार तक पहुंचता रहता है। नौकरीपेशा लोगों की सैलरी से कंपनी हर महीने टीडीएस काटती है, इसलिए उन्हें आमतौर पर अलग से कुछ नहीं करना पड़ता।
लेकिन जिनकी कमाई पर पूरा टीडीएस नहीं कटता, उन्हें यह जिम्मेदारी खुद निभानी होती है। एक अप्रैल 2026 से नया आयकर अधिनियम 2025 लागू हो चुका है, लेकिन अग्रिम कर के बुनियादी नियम लगभग पहले जैसे ही रखे गए हैं।
Advance Tax किसे देना पड़ता है?
अगर टीडीएस घटाने के बाद पूरे साल में आपकी कुल टैक्स देनदारी 10,000 रुपये या उससे ज्यादा बनती है, तो आपको यह टैक्स भरना होगा। इसमें बिजनेस करने वाले, डॉक्टर और वकील जैसे पेशेवर, फ्रीलांसर, यूट्यूबर और कंटेंट क्रिएटर शामिल हैं।
मकान किराया, एफडी का ब्याज, शेयर और म्यूचुअल फंड से मुनाफा या लॉटरी जैसी अतिरिक्त कमाई वाले नौकरीपेशा लोगों पर भी यह लागू हो सकता है। 60 साल या उससे ज्यादा उम्र के ऐसे निवासी वरिष्ठ नागरिक, जिनकी कोई बिजनेस या प्रोफेशन की कमाई नहीं है, उन्हें यह टैक्स भरने से छूट मिली हुई है।
वित्त वर्ष 2026-27 की किस्तें और तारीखें
सामान्य करदाताओं को Advance Tax चार किस्तों में भरना होता है। 15 जून 2026 तक कुल अनुमानित टैक्स का कम से कम 15 प्रतिशत जमा करना था। 15 सितंबर 2026 तक कुल मिलाकर 45 प्रतिशत जमा होना चाहिए था। अब अगली तारीख 15 दिसंबर 2026 है, जब तक कुल 75 प्रतिशत टैक्स जमा हो जाना चाहिए।
आखिरी किस्त 15 मार्च 2027 तक भरनी है, जिसमें पूरा 100 प्रतिशत टैक्स जमा करना होता है। प्रिजम्पटिव टैक्स स्कीम चुनने वाले छोटे कारोबारी और पेशेवर पूरा टैक्स 15 मार्च तक एक ही किस्त में भर सकते हैं।
Advance Tax की रकम कैसे तय करें
सबसे पहले पूरे साल की अनुमानित कमाई जोड़ें, जिसमें सैलरी, बिजनेस, किराया, ब्याज और निवेश का मुनाफा शामिल हो। इसके बाद आप जिस टैक्स व्यवस्था में हैं, उसके स्लैब के हिसाब से कुल टैक्स निकालें और उसमें से पहले से कटा टीडीएस घटा दें।
बची हुई रकम ही वह Advance Tax है जो किस्तों में भरना है। उदाहरण के लिए, अगर टीडीएस घटाने के बाद आपका कुल टैक्स 80,000 रुपये बनता है, तो दिसंबर तक कुल 60,000 रुपये और मार्च तक पूरे 80,000 रुपये जमा होने चाहिए।

भुगतान का तरीका और चूक का नुकसान
यह टैक्स आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर “ई-पे टैक्स” विकल्प से नेट बैंकिंग, यूपीआई या डेबिट कार्ड के जरिए ऑनलाइन भरा जा सकता है। भुगतान के बाद चालान की रसीद संभालकर रखें। किस्त समय पर न भरने या कम भरने पर बकाया रकम पर हर महीने लगभग 1 प्रतिशत की दर से ब्याज लगता है। साल के बीच अचानक बड़ी कमाई होने पर अगली किस्त में उस हिसाब से टैक्स जोड़ देना चाहिए।
टैक्स से जुड़ी और जरूरी जानकारी के लिए हमारी फॉर्म 26एएस में टीडीएस न दिखने की समस्या, बुजुर्गों को मिलने वाली टैक्स छूट और बचत खाते की सीमा से जुड़े नियम वाली रिपोर्ट भी पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या नौकरीपेशा लोगों को Advance Tax भरना पड़ता है?
अगर सिर्फ सैलरी की कमाई है और उस पर पूरा टीडीएस कट रहा है, तो आमतौर पर नहीं। लेकिन किराया, ब्याज या निवेश के मुनाफे से अतिरिक्त टैक्स 10,000 रुपये से ज्यादा बने, तो Advance Tax भरना होगा।
2. अगर एक किस्त छूट जाए तो क्या करें?
जितनी जल्दी हो सके बकाया रकम जमा कर दें, ताकि ब्याज कम से कम लगे। अगली किस्त में पूरी जरूरी रकम जरूर पूरी करें।
3. क्या 31 मार्च तक भरा गया टैक्स भी Advance Tax माना जाता है?
हां, 31 मार्च तक जमा किया गया टैक्स उसी वित्त वर्ष का अग्रिम कर माना जाता है, हालांकि देरी पर ब्याज लग सकता है।
4. Advance Tax ऑनलाइन कहां से भरें?
आयकर विभाग के आधिकारिक ई-फाइलिंग पोर्टल पर लॉगिन करके ई-पे टैक्स विकल्प से आसानी से भुगतान किया जा सकता है।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। टैक्स से जुड़े किसी भी फैसले से पहले किसी टैक्स विशेषज्ञ या सीए से सलाह जरूर लें।

