Pet Insurance यानी पालतू जानवरों का बीमा, उन परिवारों के लिए तेजी से जरूरी बनता जा रहा है जो अपने कुत्ते या बिल्ली को घर का सदस्य मानते हैं। जानवरों के इलाज, सर्जरी और अस्पताल का खर्च पिछले कुछ सालों में काफी बढ़ गया है, और एक बड़ी बीमारी या दुर्घटना में यह बिल हजारों से लाखों रुपये तक पहुंच सकता है।
भारत में यह बीमा अभी नया है, इसलिए ज्यादातर लोगों को इसकी सही जानकारी नहीं है। इस लेख में आसान भाषा में जानिए यह कैसे काम करता है, इसमें क्या मिलता है और लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखें।
Pet Insurance क्या है?
यह एक तरह का जनरल इंश्योरेंस है, जो आपके पालतू जानवर के बीमार होने, दुर्घटना में घायल होने या कुछ और तय हालात में होने वाले खर्च को एक सीमा तक कवर करता है। भारत में ज्यादातर पॉलिसियां कुत्तों के लिए हैं, जबकि कुछ कंपनियां बिल्लियों के लिए भी प्लान देती हैं।
देसी नस्ल, विदेशी नस्ल, क्रॉस ब्रीड और कई कंपनियों में गोद लिए गए जानवर भी इसके दायरे में आ सकते हैं। कुत्तों को आमतौर पर उनके आकार के हिसाब से छोटी, मध्यम, बड़ी और बहुत बड़ी नस्ल में बांटा जाता है।
इसमें क्या क्या कवर होता है?
Pet Insurance में आमतौर पर बीमारी या दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती, सर्जरी और इलाज का खर्च शामिल होता है। दुर्घटना से जुड़ा कवर अक्सर पॉलिसी शुरू होते ही मिल जाता है।
कई पॉलिसियों में पालतू जानवर की मौत पर तय रकम, चोरी या खो जाने पर मुआवजा और तीसरे पक्ष की देनदारी भी शामिल होती है। यानी अगर आपका कुत्ता किसी व्यक्ति को घायल कर दे या किसी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाए, तो कानूनी खर्च और मुआवजे में मदद मिल सकती है।
किन चीजों पर नहीं मिलता क्लेम?
Pet Insurance में पॉलिसी लेने से पहले से मौजूद बीमारियां, सौंदर्य से जुड़े इलाज, गर्भावस्था और प्रजनन से जुड़े खर्च आमतौर पर कवर नहीं होते। जानबूझकर पहुंचाई गई चोट या लापरवाही से हुए नुकसान पर भी क्लेम नहीं मिलता।
ज्यादातर कंपनियां यह शर्त रखती हैं कि जानवर को नियमित टीके लगे हों। अगर किसी ऐसी बीमारी का इलाज हो, जिससे टीका लगाकर बचा जा सकता था और टीका नहीं लगा था, तो क्लेम खारिज हो सकता है।
उम्र की सीमा और वेटिंग पीरियड
Pet Insurance के लिए ज्यादातर कंपनियां लगभग 2 से 3 महीने की उम्र से कवर देती हैं। नई पॉलिसी लेने की ऊपरी उम्र आमतौर पर 7 से 10 साल होती है, जबकि बहुत बड़ी नस्लों के लिए यह सीमा 4 से 5 साल तक भी हो सकती है।
बीमारी से जुड़े क्लेम के लिए आमतौर पर 15 से 30 दिन का वेटिंग पीरियड होता है। इसलिए पालतू जानवर के छोटे और स्वस्थ रहते ही पॉलिसी लेना सबसे समझदारी भरा फैसला है।
क्लेम कैसे मिलता है?
भारत में ज्यादातर Pet Insurance पॉलिसियां रीइंबर्समेंट के आधार पर काम करती हैं। यानी पहले आपको पशु चिकित्सक का बिल खुद चुकाना होता है और फिर कागज जमा करके बीमा कंपनी से पैसा वापस लेना होता है।
क्लेम के लिए पशु चिकित्सक की रिपोर्ट, इलाज के बिल, टीकाकरण का रिकॉर्ड और जानवर की पहचान के लिए फोटो या माइक्रोचिप की जानकारी मांगी जा सकती है। कुछ कंपनियां माइक्रोचिप लगे जानवरों को प्रीमियम में छूट भी देती हैं।
प्रीमियम कितना लगता है?
Pet Insurance का प्रीमियम जानवर की नस्ल, उम्र, आकार, शहर और चुने गए कवर पर निर्भर करता है। छोटी उम्र के जानवर का प्रीमियम कम होता है, जबकि बड़ी उम्र के कुत्ते के लिए यह काफी बढ़ जाता है। बिल्लियों का बीमा आमतौर पर कुत्तों से सस्ता पड़ता है।
लेने से पहले इन बातों का ध्यान रखें
Pet Insurance लेते समय पॉलिसी में हर खर्च की उप सीमा, जैसे सर्जरी या रोज के अस्पताल खर्च की सीमा, जरूर देखें। बाहर से बड़ा दिखने वाला कवर कई बार इन उप सीमाओं की वजह से कम पड़ जाता है।
टीकाकरण का पूरा रिकॉर्ड संभालकर रखें और पॉलिसी हर साल बिना रुकावट रिन्यू कराएं, क्योंकि ब्रेक होने पर बढ़ती उम्र में नई पॉलिसी मिलना मुश्किल हो सकता है। सही जानकारी के साथ लिया गया Pet Insurance आपके प्यारे साथी और आपकी जेब, दोनों की सुरक्षा करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या गली से गोद लिए कुत्ते का भी बीमा हो सकता है?
हां, कई कंपनियां देसी और गोद लिए गए कुत्तों के लिए भी Pet Insurance देती हैं, बशर्ते उनका टीकाकरण और स्वास्थ्य रिकॉर्ड उपलब्ध हो। - क्या इस बीमा पर टैक्स छूट मिलती है?
नहीं, Pet Insurance के प्रीमियम पर इनकम टैक्स की धारा 80डी जैसी कोई छूट नहीं मिलती, क्योंकि यह छूट सिर्फ इंसानों के हेल्थ इंश्योरेंस पर है। - क्या रूटीन जांच और टीकों का खर्च कवर होता है?
ज्यादातर बेसिक पॉलिसियों में रूटीन जांच और टीकों का खर्च शामिल नहीं होता। कुछ प्लान अतिरिक्त प्रीमियम पर ऐसा कवर देते हैं। - जनरल इंश्योरेंस से जुड़ी भरोसेमंद जानकारी कहां मिलेगी?
जनरल इंश्योरेंस कंपनियों और उनके उत्पादों से जुड़ी जानकारी जनरल इंश्योरेंस काउंसिल की आधिकारिक वेबसाइट पर मिल सकती है।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। पॉलिसी खरीदने से पहले उसकी सभी शर्तें ध्यान से पढ़ें।

