MAMTA KULKARNI: किन्नर अखाड़े में ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाए जाने के बाद एक नया विवाद थमता नजर नहीं आ रहा है। सोशल मीडिया में एक नया दावा किया जा रहा है कि किन्नर अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर के पद से हटा दिया और आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी को भी अखाड़े से निष्कासित कर दिया। यह कदम उठाते हुए अजय दास ने आरोप लगाया कि ममता को बिना उचित प्रक्रिया के महामंडलेश्वर की पदवी दी गई थी, जबकि लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने यह पदवी उन्हें दी थी, जो खुद विवादों में घिरे हुए हैं।

MAMTA KULKARNI: क्या हुआ अब तक?
इस विवाद के कारण किन्नर अखाड़ा और किन्नर समाज में तनाव बढ़ गया है। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद ने भी लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी का समर्थन किया है, जबकि अजय दास के कदम को गलत ठहराया है। इस विवाद के बाद लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने इन आरोपों को नकारते हुए कहा कि अजय दास को अखाड़े से पहले ही निष्कासित किया जा चुका था और वह अब किसी भी तरह से अखाड़े के मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकते। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह किन्नर अखाड़े के संस्थापक नहीं थे, और अजय दास के आरोप पूरी तरह से व्यक्तिगत स्वार्थ पर आधारित हैं।

चार महामंडलेश्वर और चार श्रीमहंतों की घोषणा
बृहस्पतिवार को किन्नर अखाड़ा ने चार महामंडलेश्वर और चार श्रीमहंतों की घोषणा की। विधिवत धार्मिक अनुष्ठानों के साथ इनकी नियुक्ति संपन्न हुई। आचार्य महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी की अगुवाई में सभी धार्मिक क्रियाएं संपन्न कराई गईं। इस अवसर पर किन्नर अखाड़ा और जूना अखाड़ा के कई प्रमुख संत मौजूद रहे। किन्नर अखाड़ा द्वारा जिन संतों को महामंडलेश्वर की पदवी दी गई, उनमें शंकरानंद गिरि (महाराष्ट्र), स्वरूपा भारती (राजस्थान), यशोधानंद गिरि, नारायणी नंद गिरि (पुणे) और सतीनंद गिरि शामिल हैं। वहीं, भैरवी नंद गिरि (दिल्ली), सरस्वती नंद गिरि, दिव्यानी नंद गिरि (दिल्ली) और हरिहर नंद गिरि को श्रीमहंत के पद पर नियुक्त किया गया।

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