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यमन और सोमालिया के पास दो वाणिज्यिक जहाजों का अपहरण, 22 भारतीय नाविक सवार; सभी भारतीय सुरक्षित

पश्चिम एशिया और अफ्रीका के समुद्री मार्गों में बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के बीच दो अलग-अलग घटनाओं में यमन और सोमालिया के तट के पास दो वाणिज्यिक जहाजों का समुद्री लुटेरों ने अपहरण कर लिया। दोनों जहाजों पर कुल 22 भारतीय नागरिक सवार थे। राहत की बात यह है कि उपलब्ध ताजा जानकारी के अनुसार सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं। भारत सरकार ने दोनों घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों के साथ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और कुशलक्षेम का मुद्दा उठाया है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि दो विदेशी झंडे वाले जहाजों पर कुल 22 भारतीय नाविक मौजूद थे। इनमें 16 भारतीय एमटी सिबू (MT Sibu) पर और छह भारतीय एमवी लुतुफ (MV Lutuf) पर सवार थे। उन्होंने कहा कि सरकार संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है और भारतीय नाविकों की सुरक्षा तथा कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

गल्फ ऑफ एडन में MT Sibu का अपहरणयमन

पहली घटना 20 अगस्त को गल्फ ऑफ एडन में हुई। इरिट्रिया के झंडे वाला तेल उत्पाद टैंकर MT Sibu 1 यमन के तट से लगभग 30 नॉटिकल मील दूर समुद्री लुटेरों के कब्जे में चला गया। जहाज पर कुल 20 सदस्य सवार थे, जिनमें 16 भारतीय थे। अन्य चालक दल में एक सीरियाई, एक सूडानी और एक इराकी नागरिक शामिल थे, जबकि एक अन्य सदस्य की राष्ट्रीयता की पुष्टि उस समय नहीं हुई थी।

शिपिंग मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, जहाज पर छह हथियारबंद समुद्री लुटेरे मौजूद थे और उन्होंने पोत पर नियंत्रण कर लिया था। संबंधित Recruitment and Placement Service Licence एजेंसी को घटना की रिपोर्ट और आगे की जानकारी ऑनलाइन समुद्री दुर्घटना रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से देने का निर्देश दिया गया है।

समुद्री निगरानी से जुड़े उपलब्ध विवरणों के अनुसार, जहाज के पास एक अनधिकृत पोत पहुंचा था और इसके बाद जहाज का नियंत्रण खो गया। इस घटना ने गल्फ ऑफ एडन में समुद्री सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर दी है।

सोमालिया के पास MV Lutuf पर कब्जा

दूसरी घटना 17 अगस्त को सोमालिया के पंटलैंड तट के पास हुई। कैमरून के झंडे वाला मालवाहक जहाज MV Lutuf समुद्री लुटेरों के कब्जे में चला गया। इस जहाज पर कुल 10 चालक दल के सदस्य थे, जिनमें छह भारतीय नागरिक शामिल थे।

अधिकारियों के अनुसार, जहाज पर आठ हथियारबंद समुद्री लुटेरों ने दो छोटी नौकाओं के जरिए हमला किया। उनके पास AK-47 जैसी राइफलें थीं। हमले के समय चालक दल ने जहाज के सुरक्षित हिस्से यानी ‘सिटाडेल’ में शरण लेने की कोशिश की, लेकिन लुटेरे वहां तक पहुंच गए और बाद में चालक दल को जहाज के ब्रिज पर ले गए

अब तक इस घटना में किसी चालक दल के सदस्य के घायल होने की सूचना नहीं है। रिपोर्टों के मुताबिक जहाज को सोमालिया के नुगाल तट की दिशा में ले जाया गया।

जहाज पर क्या था सामान?

MV Lutuf को लेकर एक और पहलू सामने आया है। रिपोर्टों के अनुसार जहाज पर तुर्की के हथियार, संचार उपकरण और सैटेलाइट उपकरण मौजूद थे। यह सामान मोगादिशु में तुर्की के सैन्य प्रशिक्षण केंद्र तक पहुंचाया जाना था। चालक दल में छह भारतीयों के अलावा तुर्की और जॉर्जिया के नागरिक तथा दो सर्बियाई सुरक्षा कर्मी भी शामिल थे।

जहाज के अपहरण के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि सोमालिया के तट पर सक्रिय समुद्री लुटेरों के कुछ समूह पहले भी वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बना चुके हैं।

भारत ने उठाया नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा

भारतीय विदेश मंत्रालय ने दोनों घटनाओं पर नजर बनाए रखी है। नैरोबी स्थित भारतीय उच्चायोग ने भी बताया कि उसने MT Sibu और MV Lutuf पर सवार भारतीय नाविकों का मामला सोमालिया के संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया है। उच्चायोग के अनुसार, दोनों जहाजों पर मौजूद सभी भारतीय नाविकों के सुरक्षित होने की जानकारी मिली है।

सरकार के सामने अब सबसे महत्वपूर्ण चुनौती भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और उनकी जल्द से जल्द सुरक्षित रिहाई के लिए आवश्यक कूटनीतिक एवं समुद्री सुरक्षा प्रयास करना है।

हालांकि, भारतीय नाविकों के सुरक्षित होने की जानकारी राहत देने वाली है, लेकिन दोनों जहाजों की स्थिति और उनके नियंत्रण से जुड़े घटनाक्रम पर लगातार नजर रखना जरूरी है।

समुद्री सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

दोनों घटनाएं ऐसे समय हुई हैं जब रेड सी, गल्फ ऑफ एडन और पश्चिमी हिंद महासागर में वाणिज्यिक जहाजों के सामने सुरक्षा जोखिम बढ़े हुए हैं। यमन के आसपास संघर्ष से जुड़े हमलों और सोमालिया के तट पर समुद्री डकैती के खतरे ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

गल्फ ऑफ एडन दुनिया के महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। यह लाल सागर और आगे स्वेज नहर के रास्ते यूरोप तथा एशिया के बीच व्यापारिक आवाजाही के लिए महत्वपूर्ण संपर्क प्रदान करता है। इस क्षेत्र में किसी जहाज के अपहरण या हमले से केवल चालक दल की सुरक्षा ही प्रभावित नहीं होती, बल्कि अंतरराष्ट्रीय माल ढुलाई और बीमा लागत पर भी असर पड़ सकता है।

भारतीय नाविकों के लिए खतरा क्यों महत्वपूर्ण है?

भारत दुनिया के सबसे बड़े समुद्री मानव संसाधन प्रदाताओं में शामिल है। बड़ी संख्या में भारतीय नाविक विदेशी झंडे वाले वाणिज्यिक जहाजों पर काम करते हैं। ऐसे में दुनिया के किसी भी संवेदनशील समुद्री मार्ग में सुरक्षा संकट का सीधा असर भारतीय नागरिकों पर पड़ सकता है।

2026 BIMCO-ICS Seafarer Workforce Report के अनुसार भारत करीब 3.12 लाख नाविकों की आपूर्ति करता है और फिलीपींस के बाद दुनिया के सबसे बड़े समुद्री श्रम स्रोतों में शामिल है।

यही कारण है कि यमन, सोमालिया, गल्फ ऑफ एडन और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में होने वाली हर घटना भारत के लिए महत्वपूर्ण बन जाती है।

ईरान युद्ध और क्षेत्रीय तनाव की पृष्ठभूमि

इन घटनाओं ने पश्चिम एशिया में जारी व्यापक तनाव के बीच समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। क्षेत्र में सैन्य संघर्ष और राजनीतिक तनाव के कारण पहले से ही कई प्रमुख समुद्री मार्गों पर जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

भारतीय नाविकों से जुड़े संगठनों ने भी क्षेत्रीय संघर्षों के बीच समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर चिंता व्यक्त की है। हालांकि, सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो और दावों को लेकर यह स्पष्ट नहीं है कि वे हालिया घटनाओं से संबंधित हैं या किसी अलग घटना के हैं। इसलिए ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

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आगे की चुनौती क्या है?

फिलहाल भारत के लिए सबसे अहम प्राथमिकता दोनों जहाजों पर मौजूद भारतीय नागरिकों की सुरक्षा बनाए रखना है। इसके लिए विदेश मंत्रालय, शिपिंग मंत्रालय, भारतीय मिशन और संबंधित समुद्री सुरक्षा एजेंसियों के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा।

समुद्री लुटेरों के कब्जे वाले जहाजों के मामलों में जल्दबाजी में कोई कार्रवाई करना जोखिमपूर्ण हो सकता है। इसलिए संबंधित देशों के साथ कूटनीतिक बातचीत, समुद्री निगरानी और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय के जरिए आगे की रणनीति तय की जा सकती है।

निष्कर्ष

यमन और सोमालिया के पास दो अलग-अलग घटनाओं में वाणिज्यिक जहाजों के अपहरण ने भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है। MT Sibu 1 पर 16 और MV Lutuf पर छह भारतीय नागरिक सवार थे, यानी कुल 22 भारतीय नाविक इन घटनाओं से प्रभावित हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार सभी भारतीय सुरक्षित हैं।

भारत ने दोनों मामलों को संबंधित अधिकारियों के सामने उठाया है और नाविकों की सुरक्षा एवं कुशलक्षेम को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया है। दूसरी ओर, लगातार दो अपहरण की घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि गल्फ ऑफ एडन और सोमालिया के आसपास समुद्री सुरक्षा का खतरा फिर गंभीर हो रहा है।

अब अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा एजेंसियों और संबंधित सरकारों के सामने चुनौती केवल इन जहाजों और उनके चालक दल को सुरक्षित निकालने की नहीं, बल्कि ऐसे समुद्री लुटेरों के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई करने की भी है। भारतीय नाविकों की बड़ी वैश्विक मौजूदगी को देखते हुए यह मुद्दा भारत के लिए भी आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण बना रहेगा।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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