/ Jan 21, 2026
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UTTARAKHAND UCC: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के लागू होने का एक वर्ष पूरा हो गया है। इस एक साल के सफर में यूसीसी ने न केवल कानूनी ढांचे में बदलाव किया है, बल्कि तकनीकी उत्कृष्टता का एक नया मॉडल भी पेश किया है। राज्य सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यूसीसी की वेबसाइट और सेवाएं अंग्रेजी के अलावा भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल सभी 22 भाषाओं में उपलब्ध कराई गई हैं। इसके साथ ही, आवेदकों की सुविधा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को भी इस प्रणाली का हिस्सा बनाया गया है।

उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी को आम जनमानस तक पहुंचाने के लिए भाषाई बाधाओं को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने यूसीसी की वेबसाइट को इस तरह डिजाइन किया है कि देश के किसी भी हिस्से का नागरिक अपनी मातृभाषा में जानकारी प्राप्त कर सके। पोर्टल पर अंग्रेजी के साथ-साथ 22 अन्य भारतीय भाषाओं का विकल्प दिया गया है। इन भाषाओं में असमिया, बंगाली, गुजराती, हिंदी, कन्नड़, कश्मीरी, कोंकणी, मलयालम, मराठी, नेपाली, उड़िया, पंजाबी, संस्कृत, तमिल, तेलुगु, उर्दू, सिंधी, बोडो, डोगरी, मैथिली, संथाली और मणिपुरी शामिल हैं।

तकनीकी क्रांति के इस दौर में उत्तराखंड सरकार ने यूसीसी प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का भी सहारा लिया है। आवेदक अब एआई की सहायता से यूसीसी की जटिल प्रक्रियाओं को आसानी से समझ सकते हैं। वेबसाइट पर उपलब्ध एआई टूल्स की मदद से पंजीकरण करवाना बेहद आसान हो गया है। यह तकनीक उन लोगों के लिए विशेष रूप से मददगार साबित हो रही है जो कानूनी शब्दावली या तकनीकी प्रक्रियाओं से बहुत अधिक परिचित नहीं हैं। एआई के इंटीग्रेशन से यह सुनिश्चित किया गया है कि किसी भी व्यक्ति को फॉर्म भरने या नियम समझने में किसी बाहरी व्यक्ति की मदद न लेनी पड़े।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने समान नागरिक संहिता के बारे में कहा किहमारी सरकार पहले ही दिन से सरलीकरण से समाधान तक के मूलमंत्र लेकर चल रही है। समान नागरिक संहिता के क्रियान्वयन में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि जनसामान्य को पंजीकरण में किसी तरह की मुश्किल न आए। यूसीसी तकनीकी उत्कृटता का एक सफल उदाहरण बनकर उभरी है। यही कारण है कि बीते एक साल में यूसीसी प्रक्रिया को लेकर एक भी शिकायत नहीं आई है।

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