UTTARAKHAND FOOD SAFETY: क्रिसमस और नए साल के जश्न के दौरान उत्तराखंड के खाद्य संरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने यह सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है कि आपकी थाली में पहुंचने वाला खाना पूरी तरह सुरक्षित और शुद्ध हो। त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों की बढ़ती मांग को देखते हुए विभाग ने पूरे राज्य में एक विशेष अभियान शुरू किया है। इस अभियान का मुख्य मकसद मिलावटखोरों पर नकेल कसना और लोगों को घटिया गुणवत्ता वाले खाने से बचाना है। अस्वच्छ परिस्थितियों में खाना बनाने और बेचने वालों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम-2006 के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
UTTARAKHAND FOOD SAFETY: होटलों, पब और स्ट्रीट फूड पर रहेगी पैनी नजर
इस विशेष अभियान के दायरे में केवल बड़ी दुकानें ही नहीं, बल्कि हर वो जगह शामिल है जहां खाने-पीने का सामान मिलता है। विभाग की टीमें होटलों, रेस्टोरेंट, क्लब, कैफे और बेकरियों में जाकर नियमित और औचक निरीक्षण करेंगी। चूंकि क्रिसमस और नए साल पर केक, मिठाई और दूध से बने उत्पादों की खपत बहुत बढ़ जाती है, इसलिए डेयरियों और मिष्ठान भंडारों पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। इसके अलावा, फूड कोर्ट और स्ट्रीट फूड जोन में भी जाकर जांच की जाएगी कि वहां साफ-सफाई के मानकों का पालन हो रहा है या नहीं।

UTTARAKHAND FOOD SAFETY: सिर्फ चालान नहीं, जागरूकता फैलाना भी है मकसद
खाद्य संरक्षा विभाग का उद्देश्य केवल छापेमारी करना या जुर्माना वसूलना नहीं है, बल्कि एक जिम्मेदार खाद्य संस्कृति को बढ़ावा देना भी है। विभाग यह सुनिश्चित करना चाहता है कि खाद्य कारोबार से जुड़े सभी लोग अपनी जिम्मेदारी समझें। अधिकारियों का प्रयास रहेगा कि वे दंडात्मक कार्रवाई से आगे बढ़कर होटल और रेस्टोरेंट संचालकों को खाद्य सुरक्षा के प्रति जागरूक करें और उनकी जवाबदेही तय करें। सरकार चाहती है कि पर्यटक और स्थानीय नागरिक बिना किसी डर के त्योहारों का आनंद ले सकें और उन्हें जो भी खाद्य सामग्री मिले, वह गुणवत्ता की कसौटी पर खरी उतरे।

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