SWADESH DARSHAN 2.0: भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने देश में पर्यटन के बुनियादी ढांचे को आधुनिक और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ योजना के अंतर्गत मंत्रालय ने कुल 2208.31 करोड़ रुपये की लागत वाली 53 महत्वपूर्ण परियोजनाओं को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दे दी है। इस निवेश का मुख्य उद्देश्य देश के विभिन्न हिस्सों में ऐसे पर्यटन स्थलों का विकास करना है जो न केवल अंतरराष्ट्रीय स्तर के हों, बल्कि पर्यावरण और स्थानीय समुदायों के प्रति जिम्मेदार भी हों।

SWADESH DARSHAN 2.0: सतत और जिम्मेदार पर्यटन पर विशेष ध्यान
पर्यटन मंत्रालय ने साल 2022 में अपनी पिछली योजना में संशोधन करते हुए इसे ‘स्वदेश दर्शन 2.0’ के रूप में नई पहचान दी थी। इस योजना की मूल भावना पर्यटन के नकारात्मक प्रभावों को कम करना और इसके सामाजिक-आर्थिक लाभों को बढ़ाना है। स्वीकृत परियोजनाओं में स्थिरता, सुरक्षा और स्वच्छता जैसे पहलुओं को प्राथमिकता दी गई है। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, पर्यटन स्थलों का विकास करते समय स्थानीय समुदायों और संबंधित हितधारकों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया जा रहा है ताकि विकास का लाभ जमीनी स्तर तक पहुंचे।

इन परियोजनाओं के कार्यान्वयन में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और पर्यावरण के अनुकूल निर्माण सामग्री पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे को सभी के लिए सुलभ बनाने और पर्यटकों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने के उपाय भी इन परियोजनाओं का अहम हिस्सा हैं। मंत्रालय का मानना है कि जिम्मेदार पर्यटन पद्धतियां ही प्राकृतिक और सांस्कृतिक संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए पर्यटन क्षेत्र को और अधिक लचीला और समावेशी बना सकती हैं।

‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास’ और अन्य पहल
स्वदेश दर्शन 2.0 के अंतर्गत मंत्रालय ने एक नई पहल ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास’ की शुरुआत की है। इस विशेष पहल का उद्देश्य पर्यटन मूल्य श्रृंखला के हर पहलू को बेहतर बनाना है ताकि पर्यटकों को मिलने वाला अनुभव विश्व स्तरीय हो। इस विशिष्ट श्रेणी के तहत मंत्रालय ने अब तक लगभग 698 करोड़ रुपये की 38 परियोजनाओं को मंजूरी दी है। यह पहल गंतव्यों को समग्र रूप से विकसित करने और उन्हें पूरी तरह से टिकाऊ बनाने की दिशा में केंद्रित है।

इसके साथ ही, पर्यटन मंत्रालय ने ‘सतत पर्यटन के लिए राष्ट्रीय रणनीति’ भी जारी की है। इसका उद्देश्य भारतीय पर्यटन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को कम करना और संसाधन-कुशल पर्यटन को बढ़ावा देना है। इसमें गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों को प्रमुख भागीदार के रूप में शामिल किया गया है। मंत्रालय समय-समय पर इन परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा करता है और राज्य सरकारों को इनके सुदृढ़ संचालन और प्रबंधन के लिए प्रोत्साहित करता है।

मिशन लाइफ और ‘ट्रैवल फॉर लाइफ’ कार्यक्रम
पर्यावरण संरक्षण के वैश्विक अभियान ‘मिशन लाइफ’ के तहत पर्यटन मंत्रालय ने ‘ट्रैवल फॉर लाइफ (TFL)’ नामक एक विशेष कार्यक्रम की परिकल्पना की है। इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य पर्यटकों और पर्यटन से जुड़े व्यवसायों को प्रकृति के अनुकूल व्यवहार अपनाने के लिए प्रेरित करना है। इसके माध्यम से सतत पर्यटन के प्रति जागरूकता पैदा की जा रही है ताकि पर्यटन क्षेत्र न केवल आर्थिक रूप से मजबूत हो, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए पर्यावरण और विरासत को भी सुरक्षित रख सके।

राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग से चलाई जा रही इन योजनाओं में वित्तीय सहायता प्रदान करने के साथ-साथ मंत्रालय यह सुनिश्चित कर रहा है कि विकास की गति और गुणवत्ता निर्धारित मानकों के अनुरूप हो। इन सभी पहलों का सामूहिक लक्ष्य भारत को दुनिया के सबसे पसंदीदा और जिम्मेदार पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

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