दिन में दो बार गायब हो जाता है भगवान शिव का ये रहस्यमयी मंदिर

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stambheshwar mahadev temple
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Stambheshwar Mahadev Temple: समुद्र की गोद में क्यों समा जाता है ये मंदिर?

Stambheshwar Mahadev Temple: भारत का वो मंदिर जहां भगवान शिव अपने भक्तों को दिन में दो बार दर्शन देने आते हैं और इसके बाद ये मंदिर अपने आप गायब हो जाता है। ये एक ऐसा रहस्यमयी मंदिर है जहां लोग भगवान शिव के दर्शन करने आते हैं लेकिन इसका भी एक समय है।

दरअसल भगवान शिव का ये मंदिर (Stambheshwar Mahadev Temple) अरब सागर में मौजूद है और ये मंदिर दिन में दो बार समुद्र में समा जाता है और फिर अपने आप ही समुद्र से बाहर भी दिखाई देने लगता है। ये मंदिर (Stambheshwar Mahadev Temple) अरब सागर में कैसे बसा इसकी भी एक बहुत ही अनोखी कहानी है।

शिवपुराण में इस बात का जिक्र है, जब एक ताड़कासुर नाम के असुर ने भगवान भोले की घोर तपस्या कर उन्हें प्रसन्न किया था जिसके बाद प्रसन्न होकर भगवान शिव ने ताड़कासुर को मनचाहा वरदान मांगने को कहा। ऐसे में ताड़कासुर ने भगवान शिव से वरदान मांगा कि उसका वध केवल शिव पुत्र ही कर सके और वो भी केवल 6 दिन की आयु वाला पुत्र। भगवान शिव ने ताड़कासुर को वरदान दिया जिसके बाद ताड़कासुर ने चारों ओर लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया और पूरे ब्रह्माण में तबाही मचाने लगा।

ऐसे में सभी ऋषि मुनि और देवगण ताड़कासुर के इस अत्याचार से परेशान होकर भगवान शिव के पास मदद के लिए पहुंचे। देवताओं ने भगवान शिव से आग्रह किया कि वह ताड़कासुर का वध कर ब्रह्माण की रक्षा करें। जिसके बाद भगवान शिव की कृपा से श्वेत पर्वत कुंड से कार्तिकेय का जन्म हुआ और जब कार्तिकेय 6 दिन के हुए तो उन्होंने यहीं पर ताड़कासुर का वध कर दिया।

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कार्तिकेय को इस बात की जानकारी नहीं थी कि ताड़कासुर भगवान शिव के भक्त थे, ये पता लगने पर कार्तिकेय को इस बात का बहुत दुख हुआ। ऐसे में भगवान विष्णु ने कार्तिकेय को प्रायश्चित करने का सुझाव दिया और कहा कि जहां तुमने ताड़कासुर का वध किया है वहीं पर एक शिवलिंग स्थापित (Stambheshwar Mahadev Temple) कर दो। भगवान विष्णु के कहे अनुसार कार्तिकेय ने उस जगह पर शिवलिंग (Stambheshwar Mahadev Temple) स्थापित कर दिया जिसके बाद इस मंदिर का नाम पड़ा स्तंभेश्वर मंदिर (Stambheshwar Mahadev Temple).

वैसे तो भारत में ऐसे कई मंदिर (Stambheshwar Mahadev Temple) हैं जो समुद्र में स्थित हैं लेकिन स्तंभेश्वर मंदिर (Stambheshwar Mahadev Temple) एक ऐसा मंदिर है जो समुद्र में तो स्थित है ही लेकिन ये दिन में दो बार समुद्र में पूरी तरह से जलमग्न हो जाता है। दरअसल समुद्र का स्तर दिन में दो बार इतना बढ़ जाता है कि मंदिर (Stambheshwar Mahadev Temple) पूरी तरह से समुद्र में समा जाता है।

लोगों का ये भी मानना है कि समुद्र खुद शिवलिंग (Stambheshwar Mahadev Temple) का दिन में दो बार जल अभिषेक करता है जो एक बार सुबह होता है और एक बार शाम को। अगर आप इस सुंदर और अद्भुत मंदिर (Stambheshwar Mahadev Temple) के करिश्मे को देखना चाहते हैं तो इसके लिए आपको सुबह से शाम तक इसी मंदिर के पास रुकना पड़ेगा।

स्तम्भेश्वर महादेव (Stambheshwar Mahadev Temple) का मंदिर गुजरात में स्थित है। ये गुजरात की राजधानी गांधीनगर से करीबन 175 किलोमीटर दूर जंबूसर के कवि कंबोई गांव में स्थित है। ये 150 साल पुराना मंदिर (Stambheshwar Mahadev Temple) अरब सागर और खंभात की खाड़ियों से घिरा हुआ है जिसके करिश्मे को देखने के लिए दूर दूर से यहां लोग आते हैं। 

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