RAJAJI TIGER RESERVE BABY ELEPHANT: उत्तराखंड के राजाजी टाइगर रिजर्व का हाथी बाड़ा इन दिनों एक नन्हे मेहमान की अठखेलियों से गुलजार है। करीब दो सप्ताह पहले अपने झुंड से बिछड़कर असहाय अवस्था में मिला हाथी का एक नवजात बच्चा अब पार्क प्रशासन और वन महकमे की आंख का तारा बन गया है। वनकर्मी और डॉक्टर इस नन्हे गजराज की दिन-रात सेवा में जुटे हैं, जिससे उसकी सेहत में तेजी से सुधार हो रहा है। शुरुआती दिनों में बेहद कमजोर नजर आने वाला यह शावक अब पूरे बाड़े परिसर में दौड़ता-भागता और वनकर्मियों के साथ घुलमिलता दिखाई दे रहा है।

RAJAJI TIGER RESERVE BABY ELEPHANT: गश्त के दौरान खारा रेंज में मिला था नवजात
इस नन्हे हाथी के रेस्क्यू की कहानी 18 जनवरी से शुरू होती है। राजाजी टाइगर रिजर्व के अंतर्गत आने वाली श्यामपुर फॉरेस्ट रेंज के खारा इलाके में वनकर्मी रोजाना की तरह गश्त कर रहे थे। इसी दौरान उन्हें जंगल के बीचों-बीच एक नवजात हाथी असहाय और लाचार हालत में पड़ा हुआ मिला। विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और डॉक्टरों की टीम मौके पर पहुंची। नवजात की नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत रेस्क्यू किया गया। हालांकि, वन विभाग ने काफी देर तक आसपास के इलाकों में मादा हाथी और उसके झुंड की तलाश की, लेकिन शावक के परिवार का कहीं कोई सुराग नहीं मिल सका।
चीला रेंज का हाथी बाड़ा बना नन्हा ठिकाना
झुंड का पता न चलने पर पार्क प्रशासन ने शावक की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसे राजाजी टाइगर रिजर्व की चीला रेंज स्थित हाथी बाड़े में स्थानांतरित कर दिया। यहां उसे एक सुरक्षित वातावरण प्रदान किया गया है, जहां डॉक्टर नियमित रूप से उसकी जांच कर रहे हैं। नन्हे गजराज को वर्तमान में बोतल के जरिए दूध पिलाया जा रहा है और साथ ही उसे आवश्यक दवाइयां व पोषक तत्व भी दिए जा रहे हैं। वन विभाग के कर्मचारियों के लिए यह शावक एक सदस्य की तरह हो गया है। (RAJAJI TIGER RESERVE BABY ELEPHANT)

RAJAJI TIGER RESERVE BABY ELEPHANT: सेहत में सुधार और नैसर्गिक वातावरण की उम्मीद
अधिकारियों के अनुसार, नन्हे हाथी की सेहत में अब काफी सुधार है और उसका वजन भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है, जो उसके पूरी तरह स्वस्थ होने का शुभ संकेत है। हाथी बाड़े में उसकी देखभाल के लिए अनुभवी महावतों और वनकर्मियों की विशेष ड्यूटी लगाई गई है। हालांकि, इंसानी देखभाल के बीच भी पार्क प्रशासन का लक्ष्य इसे वापस इसके परिवार से मिलाना है। पार्क प्रशासन की ओर से अब फिर से उसके पुराने झुंड को खोजने की कवायद शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का मानना है कि हाथी के लिए सबसे सुरक्षित और सही स्थान उसका अपना झुंड और नैसर्गिक वातावरण ही होता है।

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