PAURI GULDAR: उत्तराखंड के पौड़ी जिले से एक दिलचस्प लेकिन चिंताजनक मामला सामने आया है। यहां शिकार की तलाश में आबादी के करीब पहुंचा एक गुलदार मुर्गीबाड़े के भीतर ही फंस गया। बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलने के कारण वह करीब दो घंटे तक वहीं कैद रहा।
इस दौरान उसने बाड़े में मौजूद कई मुर्गियों को अपना शिकार बना लिया। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और करीब एक घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान के बाद गुलदार को ट्रेंकुलाइज यानी बेहोश करके सुरक्षित बाहर निकाल लिया।
PAURI GULDAR: पौड़ी ब्लॉक के मासों तल्ला क्षेत्र की घटना
जानकारी के अनुसार यह घटना (PAURI GULDAR) मंगलवार सुबह पौड़ी ब्लॉक के मासों तल्ला क्षेत्र में हुई। रोज की तरह बाड़े में करीब 50 मुर्गियां दाना चुग रही थीं। इसी दौरान जंगल की ओर से एक गुलदार शिकार की तलाश में वहां पहुंच गया। मुर्गियों को देखते ही वह बाड़े के भीतर घुस गया और उन पर हमला कर दिया।
अचानक हुए हमले से मुर्गियों में भगदड़ मच गई और वे जोर-जोर से आवाज करते हुए इधर-उधर भागने लगीं। मुर्गियों का पीछा करते हुए गुलदार बाड़े के अंदर तो पहुंच गया, लेकिन बाद में वह बाहर निकलने का रास्ता नहीं ढूंढ पाया और वहीं फंसकर रह गया।

सुबह पता चला गुलदार फंस गया है
सुबह करीब छह बजे जब मुर्गियों की तेज आवाजें और असामान्य हलचल सुनाई दी तो आसपास के लोगों को कुछ गड़बड़ (PAURI GULDAR) होने का अंदेशा हुआ। जब ग्रामीण मौके पर पहुंचे तो उन्होंने मुर्गीबाड़े के भीतर गुलदार को देखा। यह खबर कुछ ही देर में पूरे इलाके में फैल गई और बड़ी संख्या में लोग वहां जमा हो गए।
सुबह छह बजे से लेकर करीब आठ बजे तक गुलदार बाड़े के अंदर बाहर निकलने की कोशिश करता रहा। वह लगातार उछल-कूद करता रहा, जबकि ग्रामीण सुरक्षित दूरी बनाकर पूरे घटनाक्रम को देखते रहे। इससे इलाके में दहशत और उत्सुकता दोनों का माहौल बना रहा।
वन विभाग ने किया सुरक्षित रेस्क्यू
ग्रामीणों की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम जरूरी उपकरणों के साथ मौके पर पहुंच गई। सबसे पहले टीम ने सुरक्षा के मद्देनजर (PAURI GULDAR) वहां जमा भीड़ को दूर किया ताकि गुलदार और ज्यादा तनावग्रस्त न हो। इसके बाद वन्यजीव विशेषज्ञों ने उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ने की योजना बनाई।
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करीब एक घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान में पूरी सावधानी बरती गई ताकि न तो गुलदार (PAURI GULDAR) को कोई नुकसान पहुंचे और न ही आसपास मौजूद लोगों की सुरक्षा पर कोई खतरा आए। आखिरकार विशेषज्ञों ने ट्रेंकुलाइजर गन से सटीक निशाना लगाकर गुलदार को बेहोश कर दिया और फिर जाल की मदद से उसे सुरक्षित कब्जे में ले लिया।

उत्तराखंड के Human-Wildlife Conflict एक गंभीर समस्या
उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Wildlife Conflict) एक गंभीर समस्या बन चुका है। वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2000 से दिसंबर 2025 तक 900 से अधिक मौतें दर्ज की गईं, जिनमें तेंदुओं ने 548, हाथियों ने 230, बाघों ने 106 और भालुओं ने 70 मौतें कीं। इसके अलावा घायलों की संख्या भी हजारों में है। साल 2025 में ही 30 से 40 लोगों की मौत तेंदुआ, बाघ और भालू के हमलों से हुई, जबकि सैकड़ों घायल हुए।(PAURI GULDAR)
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