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क्या है लोन मोरेटोरियम और EMI पर रोक का पूरा सच? आवेदन करने से पहले जानें ये बातें

Loan Moratorium वह सुविधा है जिसमें बैंक एक तय समय के लिए आपको EMI भरने से छूट देता है, लेकिन इस दौरान आपका लोन माफ नहीं होता। ज्यादातर लोग इसे राहत समझकर ले लेते हैं और बाद में पता चलता है कि कुल ब्याज काफी बढ़ गया है। नौकरी छूटने, बीमारी, प्राकृतिक आपदा या पढ़ाई के दौरान यह सुविधा सच में मददगार होती है।

मोरेटोरियम का सीधा मतलब क्या है?

Loan Moratorium का अर्थ है भुगतान पर अस्थायी रोक। इस अवधि में किस्त न भरने पर बैंक आपको डिफॉल्टर नहीं मानता और कोई पेनल्टी भी नहीं लगाता। लेकिन यह सिर्फ भुगतान को आगे खिसकाना है, माफी नहीं। जो किस्तें आपने नहीं भरीं, वे बाद में किसी न किसी रूप में चुकानी ही पड़ती हैं।

Loan Moratorium के दौरान ब्याज पर क्या असर पड़ता है?

सबसे अहम बात यह है कि मोरेटोरियम के दौरान भी बकाया रकम पर ब्याज लगता रहता है। आमतौर पर यह ब्याज आपके मूलधन में जोड़ दिया जाता है, जिससे आगे उस बढ़ी हुई रकम पर भी ब्याज लगने लगता है। मान लीजिए आपका 20 लाख रुपये का होम लोन 9 प्रतिशत ब्याज दर पर चल रहा है।

6 महीने की मोहलत लेने पर करीब 90,000 रुपये का ब्याज बनता है, और अगर यह हर महीने मूलधन में जुड़ता जाए तो रकम लगभग 91,700 रुपये तक पहुंच जाती है। यह रकम आपके लोन में जुड़ जाती है। इसके बाद या तो आपकी EMI बढ़ती है या लोन की अवधि लंबी हो जाती है, और दोनों ही स्थितियों में कुल ब्याज ज्यादा चुकाना पड़ता है।

EMI बढ़ेगी या अवधि, यह कैसे तय होता है?

मोहलत खत्म होने के बाद बैंक आमतौर पर दो विकल्प देता है। पहला, EMI वही रहे और लोन की अवधि बढ़ा दी जाए, दूसरा, अवधि वही रहे और EMI बढ़ा दी जाए। अवधि बढ़ाने से हर महीने का बोझ तो नहीं बढ़ता, लेकिन लंबे समय में कुल ब्याज ज्यादा जाता है। अगर आपकी आय वापस पटरी पर आ गई है, तो EMI बढ़वाना या थोड़ा प्रीपेमेंट करना फायदेमंद रहता है।

एजुकेशन लोन में मोरेटोरियम कैसे काम करता है?

एजुकेशन लोन में यह सुविधा पहले से तय होती है। आमतौर पर कोर्स की अवधि और उसके बाद एक साल तक, या नौकरी मिलने के कुछ महीने बाद तक, EMI शुरू नहीं होती। इस दौरान भी साधारण ब्याज जुड़ता रहता है। अगर हो सके तो पढ़ाई के दौरान ही थोड़ा थोड़ा ब्याज भरते रहें, इससे बाद की EMI काफी हल्की हो जाती है।

कोविड के समय दिया गया Loan Moratorium

2020 में कोविड लॉकडाउन के दौरान RBI ने बैंकों को मार्च से अगस्त तक कुल 6 महीने की मोहलत देने की अनुमति दी थी। तब ब्याज पर ब्याज का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था। कोर्ट के फैसले के बाद उस अवधि के लिए कर्जदारों से ब्याज पर ब्याज, यानी चक्रवृद्धि ब्याज, नहीं वसूला गया। हालांकि सामान्य ब्याज माफ नहीं हुआ था।

Loan Moratorium
Loan Moratorium

सिबिल स्कोर पर असर और जरूरी सावधानियां

बैंक की मंजूरी से लिया गया मोरेटोरियम डिफॉल्ट नहीं माना जाता, इसलिए इससे सीधे सिबिल स्कोर नहीं गिरना चाहिए। फिर भी कुछ महीनों बाद अपनी क्रेडिट रिपोर्ट जरूर जांचें। मोहलत हमेशा लिखित में लें और बैंक से पूछ लें कि ब्याज कैसे जोड़ा जाएगा। अगर आप EMI भर सकते हैं, तो सिर्फ सुविधा के लिए मोरेटोरियम लेने से बचें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. क्या Loan Moratorium में ब्याज माफ होता है?

नहीं, इस दौरान ब्याज लगता रहता है और बाद में आपको उसे चुकाना पड़ता है।

2. क्या Loan Moratorium लेने से सिबिल स्कोर खराब होता है?

बैंक की मंजूरी से ली गई मोहलत को डिफॉल्ट नहीं माना जाता, इसलिए सामान्य रूप से स्कोर पर असर नहीं पड़ता।

3. एजुकेशन लोन में Loan Moratorium कितने समय का होता है?

आमतौर पर कोर्स की अवधि और उसके बाद लगभग एक साल तक, हालांकि हर बैंक की शर्तें अलग हो सकती हैं।

4. क्या हर व्यक्ति Loan Moratorium ले सकता है?

यह बैंक की नीति और RBI के निर्देशों पर निर्भर करता है। आधिकारिक दिशानिर्देश RBI की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं।

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उपरोक्त Loan Moratorium की जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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