कैलाश मानसरोवर के ये रहस्य जानकर नासा भी रह गया हैरान

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Kailash Parvat: क्यों नहीं चढ़ पाया आजतक कोई कैलाश पर्वत पर?

Kailash Parvat: धरती के केंद्र के ठीक ऊपर है स्वर्ग और इसके ठीक नीचे है नर्क। ये केंद्र हिन्दुओं का सबसे पवित्र स्थल माना जाता है जिसे कैलाश मानसरोवर कहते हैं। कैलाश मानसरोवर अपने अंदर कई रहस्य समेटे हुए है, इनमें से ज्यादातर रहस्यों के बारे में विज्ञान को भी कोई जानकारी नहीं है। ऐसे ही कुछ रहस्यों के बारे में आज आपको बताएंगे।

आपको ये तो मालूम ही होगा कि माउंट एवरेस्ट पर कई लोगों ने फतेह किया है, माउट एवरेस्ट की ऊंचाई की बात की तो वो है 8849 मीटर और कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) की ऊंचाई की बात की जाए तो वो है 6714 मीटर। हैरानी की बात तो ये है कि माउट एवरेस्ट की ऊंचाई कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) से करीबन 2200 मीटर ज्यादा है लेकिन फिर भी आजतक कोई भी कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) पर नहीं चढ़ पाया है।

धरती के केंद्र की बात की जाए तो एक ओर है दक्षिणी ध्रुव और दूसरी ओर है उत्तरी ध्रुव, इन दोनों ध्रुवों के बीच में है हिमालय और हिमालय का केंद्र है कैलाश पर्वत। वैज्ञानिकों द्वारा भी कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) को धरती का केंद्र माना जाता है। हिन्दू मान्यता के अनुसार इस केंद्र के ठीक ऊपर स्वर्ग है और इसके ठीक नीचे नर्क है।

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इसके साथ ही कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) जिस केंद्र पर स्थित है उसे एक्सिस मुंडी के नाम से भी जाना जाता है। एक्सिस मुंडी का मतलब है दुनिया की नाभि, इसे अकाशीय ध्रुव और भौगोलिक ध्रुव का केंद्र भी माना जाता है। ये एक ऐसा बिंदु होता है जहां पृथ्वी और आकाश के बीच में 10 दिशाओं का मिलन होता है।

वहीं रशिया के वैज्ञानिकों का कहना है कि एक्सिस मुंडी वो केंद्र है जहां कई अलौकिक शक्तियों का प्रवाह होता है और इंसान इन अलौकिक शक्तियों के साथ यहां संपर्क कर सकते हैं।

इसके साथ ही कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) पर दो झीलें भी मौजूद हैं। ये दोनों ही झीलें एक दूसरे से बिलकुल विपरीत हैं। पहली झील है मानसरोवर झील, ये झील विश्व की सबसे ऊंचाई पर स्थित शुद्ध पानी की झील है, इस झील के आकार की बात की जाए तो ये सूर्य के आकार की तरह दिखाई देती है।

वहीं यहीं पर स्थित दूसरी झील है खारे पानी की झील जिसे राक्षस झील के नाम से जाना जाता है। ये झील विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित खारे पानी की सबसे बड़ी झील है। राक्षस झील के आकार की बात की जाए तो ये चंद्रमा की तरह दिखाई देती है।

कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) पर ये दोनों झीलें कैसे बनी और कैसे दोनों झीलों का पानी एक दूसरे से अलग है इस पर अभी भी रहस्य ही बना हुआ है। कई वैज्ञानिकों द्वारा इन झीलों के बनने पर आज भी शोध ही किया जा रहा है लेकिन आज भी कैलाश पर्वत वैज्ञानिकों के लिए रहस्य ही बना हुआ है।

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जो भी व्यक्ति कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) या फिर मानसरोवर झील के पास जाता है उन्हें यहां से हर वक्त एक ध्वनि सुनाई देती है। आमतौर पर ये ध्वनी किसी हवाई जहाज के उड़ने की तरह सुनाई देती है, लेकिन अगर आप ध्यान से सुनेंगे तो आपको ऐसा लगेगा मानों कोई डमरू बजा रहा हो, कभी कभी तो इस जगह से ऊँ की ध्वनी भी सुनाई देती है। वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि ये ध्वनि बर्फ के पिघलने के कारण आती होगी।

कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) एक ऐसा रहस्यमयी पर्वत है जिस पर कोई भी व्यक्ति आजतक नहीं चढ़ पाया है, लेकिन रशिया के वैज्ञानिकों के मुताबिक 11वीं सदी में एक तिब्बती बौद्ध गुरु मिलारेपा ने कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) पर चढ़ाई की थी। आपको बता दें कि रशिया के इन वैज्ञानिकों की यह रिपोर्ट 2004 के जनवरी अंक की “यूएनस्पेशियल” मेग्जीन में छपी थी, जिसमें बताया गया था कि सिर्फ एक ही ऐसे व्यक्ति हैं जो आजतक कैलाश पर्वत पर चढ़ चुके हैं और वो हैं मिलारेपा, लेकिन मिलारेपा द्वारा कैलाश पर्वत के विश्य पर आजतक कोई भी खुलासा नहीं किया गया है।

आपको बता दें कि कैलाश पर्वत ही वो स्थान है जिसकी 4 दिशाओं से 4 नदियों का उद्गम होता है जिनका नाम है, सिन्धु, ब्रह्मपुत्र, करनाली और सतलज। इन्हीं नदियों से आगे चलकर गंगा, सरस्वती और चीन में बहने वाली कई नदियां निकलती हैं।

वहीं कैलाश पर्वत (Kailash Parvat) को लेकर ये भी कहा जाता है कि यहां पर यति मानव मौजूद है। आसपास के इलाकों में रहने वालें कुछ लोग इसे जंगली मानव कहते हैं, कुछ भूरा भालू कहते हैं तो कुछ इसे हिम मानव के नाम से जानते हैं। लोगों का कहना है कि ये हिम मानव अन्य लोगों को मारकर खाता है और अपना पेट भरता है।

हिम मानव को लेकर ये धारणा केवल हिमालयी क्षेत्रों में रह रहे लोगों की ही नहीं है बल्की दुनिया के करीबन 30 से ज्यादा वैज्ञानिकों की है। इन वैज्ञानिकों ने ये दावा किया है कि हिमालयी इलाकों में हिम मानव पाए जाते हैं।      

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