Price Band किसी IPO में शेयर की वह कीमत सीमा होती है, जिसके अंदर निवेशक बोली लगाते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में यह सीमा ₹1,065 से ₹1,119 रखी गई थी, लेकिन कई नए निवेशक इसके साथ Lot Size और Cut-off Price जैसे शब्दों को लेकर उलझन में रहते हैं। आवेदन फॉर्म भरते समय ये तीनों शब्द सबसे ज्यादा काम आते हैं।
Price Band क्या होता है?
Price Band का मतलब और नियम ज्यादातर IPO बुक बिल्डिंग तरीके से आते हैं। इसमें कंपनी एक तय कीमत की जगह कीमत का एक दायरा देती है, जिसे Price Band कहा जाता है। इस दायरे की सबसे कम कीमत को फ्लोर प्राइस और सबसे ऊंची कीमत को कैप प्राइस कहते हैं।
जियो के मामले में फ्लोर प्राइस ₹1,065 और कैप प्राइस ₹1,119 था। सेबी के नियमों के मुताबिक कैप प्राइस, फ्लोर प्राइस से 20 प्रतिशत से ज्यादा नहीं हो सकता। निवेशकों की मांग के आधार पर आखिर में इसी दायरे के अंदर अंतिम इश्यू प्राइस तय होता है।
लॉट साइज क्या है?
IPO में आप अपनी मर्जी से कितने भी शेयर नहीं खरीद सकते। कंपनी शेयरों का एक तय समूह बनाती है, जिसे लॉट कहते हैं, और आवेदन हमेशा पूरे लॉट में ही होता है। जियो के IPO में एक लॉट 12 शेयरों का था।
यानी ऊपरी कीमत पर एक लॉट के लिए कम से कम ₹13,428 लगाने थे, और दो लॉट लेने पर 24 शेयरों के लिए ₹26,856। रिटेल निवेशक ज्यादा से ज्यादा ₹2 लाख तक का आवेदन कर सकते हैं। जियो में यह सीमा 14 लॉट यानी 168 शेयरों पर पूरी होती थी, जिनकी कीमत ₹1,87,992 बनती थी।
अगर कोई 15 लॉट लेना चाहता, तो रकम ₹2,01,420 हो जाती, जो ₹2 लाख की सीमा से ज्यादा है। इसलिए रिटेल श्रेणी में 14 लॉट से ज्यादा आवेदन नहीं हो सकता था। इससे ऊपर की रकम वाला आवेदन बड़े निवेशकों की श्रेणी में चला जाता है।
कट ऑफ प्राइस क्या होता है?
कट ऑफ प्राइस वह अंतिम कीमत है, जो बोली खत्म होने के बाद मांग देखकर तय की जाती है। आवेदन करते समय रिटेल निवेशक “Cut-off” विकल्प चुन सकते हैं, यानी जो भी अंतिम कीमत तय होगी, वे उसी पर शेयर लेने को तैयार हैं। इस विकल्प में बैंक खाते में Price Band की ऊपरी कीमत के हिसाब से रकम ब्लॉक होती है।
अगर अंतिम कीमत इससे कम तय होती है, तो बची हुई रकम अपने आप छूट जाती है। यह सुविधा सिर्फ ₹2 लाख तक आवेदन करने वाले रिटेल निवेशकों को मिलती है। बड़े निवेशकों (NII) और संस्थागत निवेशकों (QIB) को एक तय कीमत पर ही बोली लगानी होती है।

आवेदन करते समय क्या ध्यान रखें?
Price Band के निचले स्तर पर बोली लगाने से अगर अंतिम कीमत ऊपर तय हुई, तो आपका आवेदन अलॉटमेंट की दौड़ से बाहर हो सकता है। इसलिए ज्यादातर रिटेल निवेशक कट ऑफ विकल्प ही चुनते हैं।
आवेदन से पहले अपने बजट के हिसाब से लॉट की संख्या तय करें और ध्यान रखें कि ओवरसब्सक्रिप्शन होने पर ज्यादा लॉट लगाने से भी आमतौर पर एक ही लॉट मिलता है। साथ में कंपनी का कारोबार और वैल्यूएशन जरूर समझें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. Price Band कौन तय करता है?
कंपनी अपने मर्चेंट बैंकरों के साथ मिलकर इसे तय करती है और IPO खुलने से पहले इसकी घोषणा करती है।
2. क्या एक से कम लॉट के लिए आवेदन कर सकते हैं?
नहीं, कम से कम एक लॉट के लिए आवेदन करना जरूरी है। आवेदन हमेशा लॉट के गुणक में ही होता है।
3. क्या अंतिम इश्यू प्राइस Price Band से बाहर हो सकता है?
नहीं, अंतिम कीमत हमेशा इसी दायरे के अंदर तय होती है। ज्यादातर लोकप्रिय IPO में यह ऊपरी कीमत पर ही तय होती है।
4. कट ऑफ विकल्प चुनने पर कितनी रकम ब्लॉक होती है?
Price Band की ऊपरी कीमत को कुल शेयरों से गुणा करके जितनी रकम बनती है, उतनी ब्लॉक होती है।
5. IPO की आधिकारिक जानकारी कहां मिलेगी?
किसी भी IPO का प्राइस बैंड, लॉट साइज और जरूरी दस्तावेज BSE की वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है, निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय लें।
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