IPO Process को समझने का इससे अच्छा मौका नहीं हो सकता, क्योंकि आज 28 अक्टूबर 2026 को जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर ₹1,119 के इश्यू प्राइस के मुकाबले करीब 21 प्रतिशत ऊपर ₹1,358 पर लिस्ट हुए। इस बड़ी लिस्टिंग के बाद लाखों नए लोग जानना चाहते हैं कि आखिर IPO होता क्या है और इसमें पैसा कैसे लगाया जाता है।
जियो IPO से समझें पूरी कहानी
जियो प्लेटफॉर्म्स का IPO 21 अक्टूबर को खुला और 23 अक्टूबर 2026 को बंद हुआ। कंपनी ने ₹1,065 से ₹1,119 का प्राइस बैंड रखा था और करीब ₹30,000 करोड़ से ज्यादा जुटाए। इसमें एक लॉट 12 शेयरों का था, यानी आम निवेशक को कम से कम ₹13,428 लगाने थे।
तीन दिनों में यह इश्यू कुल 21 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ। 26 अक्टूबर को शेयरों का अलॉटमेंट हुआ, 27 अक्टूबर को शेयर डीमैट खाते में आए और 28 अक्टूबर को NSE और BSE पर लिस्टिंग हुई। यही वह पूरा सफर है जो हर IPO में होता है।
IPO क्या होता है?
IPO का पूरा नाम इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग है। जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयर आम लोगों को बेचती है, तो उसे IPO कहते हैं। इससे पहले कंपनी के मालिक कुछ प्रमोटर और बड़े निवेशक ही होते हैं।
इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग के बाद आम लोग भी शेयर खरीदकर कंपनी में छोटे हिस्सेदार बन जाते हैं। कंपनियां आमतौर पर कारोबार बढ़ाने, कर्ज चुकाने या नई योजनाओं के लिए पैसा जुटाने के मकसद से IPO लाती हैं। जियो का पूरा इश्यू फ्रेश इश्यू था, यानी पूरा पैसा सीधे कंपनी के पास गया।
इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग से जुड़े जरूरी शब्द
- प्राइस बैंड- वह दायरा है, जिसके अंदर आप शेयर के लिए बोली लगाते हैं। ज्यादातर छोटे निवेशक ऊपरी कीमत यानी कट ऑफ प्राइस पर बोली लगाते हैं।
- लॉट साइज- शेयरों की वह न्यूनतम संख्या है, जिसके लिए आवेदन करना होता है। आप एक लॉट या उसके गुणक में ही बोली लगा सकते हैं।
- सब्सक्रिप्शन बताता है कि जितने शेयर बेचे जा रहे हैं, उनके मुकाबले कितने गुना आवेदन आए। ज्यादा मांग होने पर हर किसी को शेयर नहीं मिलते और लॉटरी से अलॉटमेंट होता है।
पहली बार निवेश से पहले जरूरी तैयारी
इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग Process शुरू करने के लिए सबसे पहले आपके पास डीमैट और ट्रेडिंग खाता होना चाहिए। यह खाता किसी भी सेबी रजिस्टर्ड ब्रोकर के ऐप से कुछ ही मिनटों में खुल जाता है। इसके लिए पैन कार्ड, आधार कार्ड और बैंक खाता जरूरी है। साथ ही आपके पास एक UPI आईडी होनी चाहिए, क्योंकि आवेदन का पैसा इसी के जरिए ब्लॉक होता है।
आवेदन का आसान तरीका
इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग Process का पहला कदम है अपने ब्रोकर ऐप में IPO सेक्शन खोलना। यहां जिस कंपनी में निवेश करना है, उसे चुनें। इसके बाद लॉट की संख्या और बोली की कीमत भरें। अब अपनी UPI आईडी डालकर आवेदन सबमिट करें।
कुछ देर में UPI ऐप पर एक मैंडेट आएगा, जिसे मंजूर करते ही रकम आपके बैंक खाते में ब्लॉक हो जाती है। यह पैसा कटता नहीं है, सिर्फ रुका रहता है। इस सुविधा को ASBA कहा जाता है।

अलॉटमेंट से लिस्टिंग तक
इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग बंद होने के कुछ दिन बाद अलॉटमेंट तय होता है। इसे रजिस्ट्रार की वेबसाइट या NSE और BSE पर पैन नंबर डालकर देखा जा सकता है। अगर शेयर मिल गए, तो रकम कट जाती है और शेयर डीमैट खाते में आ जाते हैं। शेयर नहीं मिले, तो ब्लॉक किया गया पैसा वापस खुल जाता है।
IPO Process का आखिरी चरण लिस्टिंग है, जब शेयर एक्सचेंज पर खरीदे और बेचे जाने लगते हैं। हर IPO जियो की तरह फायदे में लिस्ट नहीं होता, कई बार शेयर इश्यू प्राइस से नीचे भी खुलते हैं। इसलिए निवेश से पहले कंपनी का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (RHP), कारोबार, मुनाफा और कर्ज जरूर देखें। सिर्फ ग्रे मार्केट या सोशल मीडिया की चर्चा के भरोसे पैसा न लगाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. IPO में कम से कम कितना पैसा लगता है?
यह कंपनी के लॉट साइज और कीमत पर निर्भर करता है। जियो के IPO में एक लॉट के लिए ₹13,428 लगने थे।
2. क्या बिना डीमैट खाते के IPO में आवेदन हो सकता है?
नहीं, IPO Process में शेयर डीमैट खाते में ही आते हैं, इसलिए यह खाता होना जरूरी है।
3. IPO Process में कितने दिन लगते हैं?
आमतौर पर इश्यू तीन दिन खुला रहता है और बंद होने के लगभग तीन कामकाजी दिनों में शेयर लिस्ट हो जाते हैं।
4. अलॉटमेंट न मिलने पर पैसे का क्या होता है?
IPO Process में शेयर न मिलने पर बैंक खाते में ब्लॉक की गई पूरी रकम अपने आप वापस खुल जाती है।
5. आने वाले IPO की आधिकारिक जानकारी कहां मिलेगी?
आने वाले और मौजूदा IPO की आधिकारिक जानकारी NSE की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है, निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय लें।
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