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IPO Allotment का गणित, निवेशकों के लिए लॉटरी सिस्टम कैसे काम करता है? पूरी जानकारी पढ़ें

IPO Allotment को लेकर इस समय लाखों निवेशकों के मन में एक ही सवाल है: शेयर मिलेंगे या नहीं? जियो प्लेटफॉर्म्स के IPO में भी 26 अक्टूबर को अलॉटमेंट तय हुआ, लेकिन भारी मांग की वजह से हर आवेदक को शेयर नहीं मिल पाए। अगर आपने भी किसी IPO में पैसा लगाया है और जानना चाहते हैं कि शेयर किस आधार पर बांटे जाते हैं और स्टेटस कैसे देखें, तो यह लेख आपके लिए है।

IPO Allotment का मतलब क्या है?

IPO बंद होने के बाद कंपनी और उसका रजिस्ट्रार तय करते हैं कि किस निवेशक को कितने शेयर मिलेंगे। इसी प्रक्रिया को अलॉटमेंट कहा जाता है। अगर किसी IPO में बेचे जा रहे शेयरों से कम आवेदन आते हैं, तो लगभग सभी को शेयर मिल जाते हैं। लेकिन जब मांग कई गुना ज्यादा हो, तो शेयर एक तय नियम के तहत बांटे जाते हैं।

शेयर किस आधार पर बांटे जाते हैं?

IPO के शेयर अलग अलग हिस्सों में बंटे होते हैं, जैसे संस्थागत निवेशक (QIB), बड़े निवेशक (NII) और आम यानी रिटेल निवेशक। हर हिस्से के लिए अलॉटमेंट का तरीका अलग है। रिटेल निवेशकों के IPO Allotment के लिए सेबी का नियम है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को कम से कम एक लॉट मिले। इसलिए ओवरसब्सक्रिप्शन होने पर कंप्यूटर से लॉटरी निकाली जाती है।

इस लॉटरी में यह मायने नहीं रखता कि आपने एक लॉट के लिए आवेदन किया या कई लॉट के लिए। जिसका नाम लॉटरी में आता है, उसे आमतौर पर एक लॉट ही मिलता है। बड़े संस्थागत निवेशकों को आमतौर पर उनकी बोली के अनुपात में शेयर दिए जाते हैं। NII हिस्से में भी अब छोटे आवेदकों के लिए लॉटरी जैसा सिस्टम लागू है।

जियो IPO से समझें अलॉटमेंट का गणित

जियो के IPO में रिटेल हिस्सा करीब 2.76 गुना सब्सक्राइब हुआ था। यानी रिटेल हिस्से में उपलब्ध शेयरों से लगभग तीन गुना ज्यादा शेयरों की मांग आई, इसलिए लॉटरी में हर आवेदक का नाम नहीं आ सका। वहीं संस्थागत निवेशकों का हिस्सा 67 गुना से ज्यादा भरा था। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरधारकों के लिए अलग कोटा था, जो करीब 7.6 गुना सब्सक्राइब हुआ।

स्टेटस चेक करने का तरीका

IPO Allotment स्टेटस ऐसे देखें सबसे आसान तरीका रजिस्ट्रार की वेबसाइट है। जियो IPO की रजिस्ट्रार केफिन टेक्नोलॉजीज (KFin Technologies) थी। वेबसाइट पर कंपनी का नाम चुनें और पैन नंबर, एप्लिकेशन नंबर या डीमैट खाते की जानकारी डालकर स्टेटस देखें। दूसरा तरीका BSE की वेबसाइट है।

यहां “Status of Issue Application” वाले पेज पर इश्यू टाइप में इक्विटी चुनें, कंपनी का नाम चुनें और पैन नंबर डालकर सर्च करें। NSE की वेबसाइट पर भी IPO बिड वेरिफिकेशन पेज से IPO Allotment स्टेटस देखा जा सकता है। इसके लिए पैन नंबर और एप्लिकेशन नंबर की जरूरत होती है। इसके अलावा कई ब्रोकर ऐप भी IPO सेक्शन में ही अलॉटमेंट की जानकारी दिखा देते हैं।

IPO Allotment
IPO Allotment

शेयर मिले या नहीं, आगे क्या होगा?

अगर शेयर मिल गए, तो बैंक में ब्लॉक हुई रकम कट जाती है और लिस्टिंग से पहले शेयर डीमैट खाते में आ जाते हैं। जियो के मामले में यह काम 27 अक्टूबर को हुआ। अगर शेयर नहीं मिले, तो घबराने की जरूरत नहीं है।

IPO Allotment न होने पर ब्लॉक की गई पूरी रकम अपने आप बैंक खाते में वापस खुल जाती है। अलॉटमेंट की संभावना थोड़ी बढ़ाने के लिए कट ऑफ प्राइस पर बोली लगाएं और UPI मैंडेट समय पर मंजूर करें। एक ही पैन से दो आवेदन करने पर दोनों रद्द हो सकते हैं, इसलिए यह गलती न करें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. IPO Allotment कितने दिन में होता है?

आमतौर पर IPO बंद होने के अगले कामकाजी दिन अलॉटमेंट तय हो जाता है और करीब तीसरे कामकाजी दिन शेयर लिस्ट होते हैं।

2. क्या ज्यादा लॉट के लिए आवेदन करने से शेयर मिलने की संभावना बढ़ती है?

रिटेल हिस्से में नहीं, क्योंकि ओवरसब्सक्रिप्शन होने पर लॉटरी से आमतौर पर एक लॉट ही दिया जाता है।

3. IPO Allotment स्टेटस देखने के लिए क्या चाहिए?

पैन नंबर, एप्लिकेशन नंबर या डीमैट खाते की जानकारी में से कोई एक काफी होता है।

4. शेयर न मिलने पर पैसा कब वापस आता है?

IPO Allotment के अगले कामकाजी दिन तक ब्लॉक की गई रकम आमतौर पर अपने आप खुल जाती है।

5. BSE पर स्टेटस कहां देखें?

BSE पर अलॉटमेंट स्टेटस उसके आधिकारिक पेज पर पैन नंबर डालकर देखा जा सकता है।

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है, निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय लें।

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