गैंडे कर रहे हैं इन दिनों खेती, क्या है इसके पीछे का कारण? Rhino used in farming

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देहरादून ब्यूरो। आक्रमक स्वभाव वाला गैंडा इन दिनों खेती करने में जुटा हुआ है। सुनकर थोड़ा अजीब लगा न। भला हमेशा अटैक मोड में रहने वाले गैंडे कैसे खेती कर रहे है। मगर एक देश में ऐसा हो रहा है, यहां बैल की जगह लोग खेती करने में गैंडे की मदद ले रहे हैं। अक्सर गैंडे अपने सिंगों को लेकर चर्चाओं में रहते हैं। दरअसल इनके सिंगों की मार्केट में इतनी ज्यादा कीमत है कि शिकारी इनके सिंगों के लिए इनका शिकार करते हैं। बाजार में इनकी कीमत सोने से भी कई ज्यादा है और इनके सिंगों की स्मगलिंग से अब इनकी संख्या में भी काफी कमी आ रही है।

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आक्रमक स्वभाव वाले गैंडे भला कैसे खेती करने में जुट गए हैं ये आपको बताते हैं। दरअसल एक ऐसा देश है जहां के लोग न ही गैंडे से डरते हैं और न ही उन्हें मारते हैं। बल्की उन्हें गैंडों से इतना लगाव है कि वो उन्हें पालते हैं, उनकी देखभाल करते है और उनसे खेती कराते हैं। यहां तक की ये लोग इन गैंडों को रेसक्यू तक करते हैं, क्योंकि धीरे धीरे दुनिया से गैंडों की संख्या कम होती जा रही है।

अब ये लोग जो गैंडों की देखभाल कर रहे हैं वो किस मकसद से कर रहे हैं ये जान लेते हैं। जिनको नही मालूम उनको बता दें कि पहले के जमाने में गैंडो को लोगों को इधर से उधर ले जाने के लिए इस्तेमाल किया जाता था, सामान ढुलाने में इस्तेमाल किया जाता था और कई शिकारी मालामाल होने के लिए गैंडों का शिकार किया करते थे और इनके सींगों को बाजार में बेच कर खूब पैसा कमाते थे। लेकिन आज के समय में कई जगह ऐसी भी है जहां गैंडों का इस्तमाल खेती के लिए किया जा रहा है। इन्हें गाय भैसों की तरह पाला जा रहा है और इनका इसी तरह से ध्यान भी रखा जा रहा है, वो भी बिना उन्हें चोट पहुंचाए। इन गैंडों को इस तरह से सिखाया जाता है कि ये किसी को भी चोट न पहुंचाए।

john hume

अब बात करते हैं उनके बारे में जो इन गैंडों से खेती करा रहे है और साथ ही इनका rरेसक्यू भी कर रहे हैं। इसके साथ ही आपको बता दें कि ये इनसान गैंडों के लगभग 7 टन कटे हुए सींग के मालिक भी हैं। इस शख्स का नाम है John Hume। South Africa  के रहने वाले John Hume ने गैंडों की विलुप्त हो रही प्रजाती को बचाने के लिए उन्हें पालने का विचार बनाया और जैसे पुराने जमाने में उनसे खेती कराई जाती थी वैसे ही उन्होंने भी किया मगर अलग तरीके से। पहले के लोग भी गैंडों से खेती कराया करते थे मगर वे बड़ी ही बेरहमी से उनसे से कार्य कराया करते थे। वे गैंडों के सींग और कानों के बीच से मोटी रस्सी बांधकर 4 से 5 लोग बड़ी ही बेरहमी से खीचते थे और कई बार गैंडों के सींग में इतना जोर पड़ता था कि वो टूट जाता था और काफी खून बहने के कारण गैंडें मर जाते थे। मगर  John Hume गैंडों से खेती जरूर करा रहे हैं मगर उनको नुकसान नही पहुंचा रहे, बल्की उनकी प्रजाती को बचाने के लिए उनसे खेती करा रहे हैं और उनका धयान रख रहे हैं। जिस तरह की मुहीम John Hume ने छेड़ी है वो सचमुच काबिले तारीफ है।