Deepfake Ads आजकल सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं, जिनमें किसी मशहूर अभिनेता, क्रिकेटर या बिजनेस लीडर का चेहरा और आवाज AI से बनाकर नकली प्रोडक्ट या स्कीम बेची जाती है।
आपने भी शायद इंस्टाग्राम, फेसबुक या यूट्यूब पर ऐसा वीडियो देखा होगा जिसमें कोई बड़ी हस्ती किसी ट्रेडिंग ऐप, दवा या “पक्की कमाई” वाली योजना की तारीफ कर रही हो। सवाल यह है कि असली और नकली में फर्क कैसे करें?
AI से बने फर्जी विज्ञापन आखिर होते क्या हैं?
ये ऐसे वीडियो, फोटो या ऑडियो होते हैं जिन्हें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स की मदद से तैयार किया जाता है। ठग किसी सेलिब्रिटी के पुराने इंटरव्यू या भाषण की क्लिप उठाते हैं, फिर उसके होंठों की हरकत और आवाज बदलकर उसमें नया संदेश डाल देते हैं।
ठग किन चीजों का लालच देते हैं?
ज्यादातर फर्जी सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट निवेश, क्रिप्टो, ऑनलाइन ट्रेडिंग, वजन घटाने की दवा, डायबिटीज के “चमत्कारी” इलाज और बेहद सस्ते गैजेट्स से जुड़े होते हैं। इन विज्ञापनों का असली मकसद आपको किसी नकली वेबसाइट या व्हाट्सएप ग्रुप तक ले जाना होता है, जहां से पैसे या निजी जानकारी ऐंठी जाती है। कई बार Deepfake Ads में किसी न्यूज चैनल का नकली लोगो और एंकर भी दिखाया जाता है, ताकि पूरी बात एक सच्ची खबर जैसी लगे।
Deepfake Ads पहचानने के आसान संकेत
सबसे पहले चेहरे पर ध्यान दें। AI वीडियो में अक्सर पलकें कम झपकती हैं, दांत धुंधले दिखते हैं और चेहरे के किनारे बालों या गर्दन से ठीक से मेल नहीं खाते। आवाज और होंठों की हरकत में हल्का सा फर्क भी बड़ा संकेत है।
कई बार आवाज मशीनी लगती है या बोलने का लहजा उस हस्ती से बिल्कुल अलग होता है। अगर विज्ञापन में “सिर्फ आज”, “सीमित सीटें” या “सरकार भी हैरान” जैसे दबाव बनाने वाले शब्द हैं, तो तुरंत सावधान हो जाएं।
Deepfake Ads की सच्चाई खुद कैसे जांचें?
उस सेलिब्रिटी के वेरिफाइड सोशल मीडिया अकाउंट और आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर देखें कि क्या उन्होंने सच में ऐसा कोई प्रचार किया है। वीडियो का स्क्रीनशॉट लेकर गूगल लेंस से रिवर्स इमेज सर्च करें। इससे अक्सर असली क्लिप मिल जाती है और साफ हो जाता है कि आवाज बदली गई है। विज्ञापन पर क्लिक करने से पहले लिंक का डोमेन ध्यान से पढ़ें।
नकली साइटों के नाम में अक्सर अजीब स्पेलिंग या फालतू अक्षर जुड़े होते हैं। किसी भरोसेमंद फैक्ट चेक वेबसाइट या न्यूज पोर्टल पर उस दावे को सर्च करना भी अच्छा तरीका है क्योंकि Deepfake Ads के बड़े मामलों पर अक्सर पहले से रिपोर्ट छप चुकी होती है।
नए IT नियम 2026 से क्या बदला?
केंद्र सरकार ने 10 फरवरी 2026 को IT नियमों में संशोधन अधिसूचित किया, जो 20 फरवरी 2026 से लागू हो चुका है। इन नियमों के तहत AI से बने या बदले गए कंटेंट पर साफ लेबल लगाना जरूरी है। सरकारी या कानूनी आदेश मिलने पर प्लेटफॉर्म को गैरकानूनी डीपफेक कंटेंट तीन घंटे के भीतर हटाना होता है।

ठगी हो जाए तो तुरंत क्या करें?
अगर आपने किसी फर्जी विज्ञापन के चक्कर में पैसे भेज दिए हैं, तो बिना देर किए साइबर क्राइम हेल्पलाइन 1930 पर कॉल करें और अपने बैंक को भी तुरंत सूचना दें। जिस प्लेटफॉर्म पर Deepfake Ads दिखा, वहां विज्ञापन के कोने में दिए तीन बिंदुओं वाले मेन्यू से उसकी शिकायत करें, ताकि दूसरे लोग इस जाल में न फंसें।
डीपफेक को और गहराई से समझने के लिए हमारी ये रिपोर्ट भी पढ़ें: डीपफेक डिटेक्शन तकनीक कैसे काम करती है, AI से नकली आवाज वाले फ्रॉड से बचाव और असली और नकली वेबसाइट की पहचान।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Deepfake Ads क्या होते हैं?
ये AI से बने ऐसे विज्ञापन हैं जिनमें किसी जानी मानी हस्ती का चेहरा या आवाज नकली तरीके से इस्तेमाल करके किसी प्रोडक्ट या स्कीम का प्रचार किया जाता है।
2. क्या मोबाइल पर देखकर ही नकली वीडियो पहचाना जा सकता है?
काफी हद तक हां। वीडियो को धीमी स्पीड पर चलाएं और पलकें, होंठ, दांत और आवाज पर ध्यान दें। फिर सेलिब्रिटी के आधिकारिक अकाउंट से दावे की पुष्टि करें।
3. Deepfake Ads पर गलती से क्लिक कर दिया तो क्या खतरा है?
सिर्फ क्लिक करने से आमतौर पर बड़ा नुकसान नहीं होता। असली खतरा तब है जब आप वहां फॉर्म भरते हैं, OTP बताते हैं या कोई अनजान ऐप डाउनलोड करते हैं। ऐसा हुआ हो तो पासवर्ड तुरंत बदलें।
4. Deepfake Ads की शिकायत ऑनलाइन कहां करें?
आप राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर सकते हैं या सीधे 1930 हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

