देश की राजनीति में मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन INDIA ने शनिवार को दिल्ली में उनके खिलाफ प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्य चुनाव आयुक्त पर निशाना साधते हुए चर्चित फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ का संदर्भ दिया। उनके इस व्यंग्य ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया।
यह कार्यक्रम कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास 10, राजाजी मार्ग पर आयोजित किया गया। विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
शिवसेना (UBT) नेता का ‘राम तेरी गंगा मैली’ तंज
BJP और चुनाव आयोग पर साधा निशाना
कार्यक्रम के दौरान शिवसेना (UBT) नेता ने ‘राम तेरी गंगा मैली’ फिल्म के नाम का इस्तेमाल करते हुए भाजपा और मुख्य चुनाव आयुक्त पर राजनीतिक कटाक्ष किया। इस टिप्पणी के जरिए विपक्ष ने चुनावी व्यवस्था की कथित गिरती विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की कोशिश की।
दरअसल, विपक्ष का आरोप है कि चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संवैधानिक संस्था के रूप में काम करना चाहिए, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उसकी भूमिका पर संदेह पैदा हो रहा है। शिवसेना (UBT) नेता का यह व्यंग्य इसी राजनीतिक असंतोष को व्यक्त करता है।
मल्लिकार्जुन खड़गे ने लगाए छह गंभीर आरोप
मुख्य चुनाव आयुक्त पर ‘वोट चोरी’ में मदद का आरोप
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कार्यक्रम के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ छह आरोपों की सूची पेश की। उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया के जरिए मतदाता सूची को प्रभावित किया जा रहा है।
खड़गे का दावा था कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल भाजपा के विरोध में मतदान करने वाले मतदाताओं के नाम हटाने के उद्देश्य से किया जा रहा है। उन्होंने चुनावी सूची के केंद्रीकरण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए।
खड़गे ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव पेश करते हुए उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। उन्होंने पद से जुड़े कानूनी संरक्षण और संस्थागत जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया।
मीरा कुमार ने की कार्यक्रम की शुरुआत
लोकतंत्र की आत्मा पर चोट बताया
पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस कार्यक्रम की कार्यवाही की शुरुआत की। उन्होंने पूरे घटनाक्रम को भारतीय लोकतंत्र की आत्मा पर चोट पहुंचाने वाला बताया।
उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद जरूरी है। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था पर जनता का भरोसा कायम रहना चाहिए।
इस कार्यक्रम में INDIA गठबंधन के विभिन्न घटक दलों के नेताओं और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया। इसका उद्देश्य चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष की चिंताओं को सार्वजनिक मंच पर रखना था।
शशि थरूर ने CEC की निष्पक्षता पर उठाए सवाल
निष्पक्ष अंपायर की भूमिका पर टिप्पणी
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि CEC ने स्वयं को एक निष्पक्ष अंपायर के रूप में अयोग्य साबित कर दिया है।
थरूर की टिप्पणी का मुख्य संदेश यह था कि चुनाव आयोग को सभी राजनीतिक दलों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए। लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनाव की निष्पक्षता के साथ-साथ उसकी निष्पक्षता पर जनता का विश्वास भी महत्वपूर्ण है।
BJP ने विपक्ष के कार्यक्रम पर किया पलटवार
राहुल गांधी और कांग्रेस को बनाया निशाना
विपक्ष के कार्यक्रम के बाद भाजपा ने भी तीखी प्रतिक्रिया दी। भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए इसे राहुल गांधी की राजनीतिक भावनाओं को संतुष्ट करने के लिए आयोजित ‘मॉक पार्लियामेंट’ करार दिया।
भाजपा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस चुनावी हार के बाद संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रही है। पार्टी की ओर से पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के प्रधानमंत्री बनने को लेकर भी ‘वोट चोरी’ का आरोप लगाया गया।
इस तरह चुनाव आयोग को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कांग्रेस और भाजपा के बीच व्यापक राजनीतिक टकराव का रूप ले चुका है।
SIR विवाद के बीच एक नवंबर को दिल्ली चलो रैली
चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन तेज करने की तैयारी
INDIA गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी राजनीतिक मुहिम को आगे बढ़ाने की भी तैयारी की है। विपक्ष की ओर से एक नवंबर को दिल्ली के रामलीला मैदान में ‘दिल्ली चलो’ रैली आयोजित करने की योजना है। इसमें मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई जाएगी।
विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और प्रत्येक नागरिक के मतदान के अधिकार की रक्षा करना चुनाव आयोग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
आगे और समाचार पढ़े:
- पंजाब विधानसभा चुनाव: AAP की पहली लिस्ट जारी, 40 उम्मीदवारों के नाम शामिल; धूरी से चुनाव लड़ेंगे CM भगवंत मान
- जम्मू-कश्मीर: कैबिनेट विस्तार के बाद उमर सरकार में सियासी भूचाल, 21 विधायक नाराज; 4 मंत्रियों को हटाने की उठी मांग
निष्कर्ष:
चुनाव आयोग की निष्पक्षता बनी राजनीतिक बहस का केंद्र
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ INDIA गठबंधन का प्रतीकात्मक जन महाभियोग कार्यक्रम भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। शिवसेना (UBT) नेता का ‘राम तेरी गंगा मैली’ वाला तंज, खड़गे के छह आरोप और शशि थरूर की टिप्पणी ने इस विवाद को नई धार दे दी है।
हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि विपक्ष का यह जन महाभियोग वास्तविक संवैधानिक महाभियोग नहीं है। मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की एक निर्धारित संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया है।
अब देखने वाली बात होगी कि चुनाव आयोग इन राजनीतिक आरोपों पर किस प्रकार प्रतिक्रिया देता है और SIR को लेकर जारी विवाद आगे क्या रूप लेता है। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता, मतदाता सूची की पारदर्शिता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता आने वाले दिनों में देश की राजनीति के प्रमुख मुद्दे बने रहेंगे।

