नई दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में रविवार, 1 नवंबर 2026 को विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ के नारे के साथ विशाल महारैली का आयोजन किया। इस रैली में कांग्रेस समेत विपक्षी गठबंधन के कई प्रमुख नेताओं ने हिस्सा लिया। कांग्रेस ने दावा किया कि रैली में 10 लाख से अधिक लोग शामिल हुए। पार्टी नेताओं ने इसे लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए जनता की एकजुट आवाज बताया।
रैली का मुख्य मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का विरोध करना था। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूचियों में बदलाव और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के माध्यम से मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित किया जा रहा है।
राहुल गांधी का बड़ा बयान—‘ज्ञानेश कुमार जाएंगे जेल’
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रैली को संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से हटाया जाएगा और उन्हें जेल जाना पड़ेगा।
राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को भी चेतावनी देते हुए कहा कि कानून से कोई नहीं बच सकता। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के जरिए लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर किया जा रहा है।
राहुल ने कहा कि यह केवल किसी राजनीतिक दल की लड़ाई नहीं है, बल्कि देश के किसानों, युवाओं, मजदूरों और आम नागरिकों के अधिकारों की लड़ाई है। उन्होंने दावा किया कि विपक्ष संविधान और लोकतंत्र की रक्षा के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेगा।
‘वोट चोरी’ को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना
राहुल गांधी ने अपने भाषण में कई राज्यों के चुनावों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश, हरियाणा, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र और कर्नाटक सहित विभिन्न चुनावों में वोटों की हेराफेरी हुई है।
उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) और मतदाता सूची में नाम जोड़ने तथा हटाने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए। राहुल गांधी ने दावा किया कि 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए।
हालांकि, ये विपक्ष के राजनीतिक आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि तथा चुनाव आयोग की आधिकारिक प्रतिक्रिया को अलग-अलग देखना जरूरी है।
खड़गे ने कहा—लोकतंत्र बचाने के लिए मोदी सरकार को हटाना होगा
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने भी महारैली को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार और भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए किया जा रहा है।
खड़गे ने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए विपक्षी दलों को एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता सुनिश्चित करना जरूरी है।
अखिलेश यादव और ममता बनर्जी ने भी भरी हुंकार
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने रामलीला मैदान की रैली को लोकतंत्र की लड़ाई का महत्वपूर्ण पड़ाव बताया। उन्होंने इसे ‘लोकतंत्र की हल्दीघाटी’ बताते हुए कहा कि देश में राजनीतिक बदलाव की शुरुआत उत्तर प्रदेश से होगी।
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में भी मतदाता सूची से बड़ी संख्या में लोगों के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने कहा कि जनता अपने मताधिकार की रक्षा के लिए आगे आएगी।
वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी SIR प्रक्रिया को लेकर चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में बदलाव के कारण आम लोगों के मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है। उन्होंने विपक्षी दलों से एकजुट होकर इस मुद्दे पर संघर्ष करने की अपील की।
नेताओं ने निकाला मार्च, तीन घंटे में पहुंचे रामलीला मैदान
महारैली से पहले INDIA गठबंधन के कई वरिष्ठ नेताओं ने दिल्ली में मार्च निकाला। इस मार्च में सोनिया गांधी, राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, प्रियंका गांधी वाड्रा, अखिलेश यादव, ममता बनर्जी, तेजस्वी यादव, फारूक अब्दुल्ला और अन्य विपक्षी नेता शामिल हुए।
नेताओं ने खुले वाहनों में सवार होकर मिंटो रोड से रामलीला मैदान तक मार्च किया। रास्ते में बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे। रिपोर्टों के अनुसार, नेताओं को रैली स्थल तक पहुंचने में करीब तीन घंटे लगे।
भाजपा ने भी उठाए सवाल, खाली कुर्सियों का किया दावा
कांग्रेस द्वारा रैली में 10 लाख से अधिक लोगों के शामिल होने के दावे पर भाजपा ने सवाल उठाए। भाजपा सांसद संबित पात्रा ने दावा किया कि रामलीला मैदान में बड़ी संख्या में कुर्सियां खाली थीं।
उन्होंने कहा कि करीब 28 हजार कुर्सियों में से 5 से 7 हजार कुर्सियां खाली थीं। भाजपा ने कांग्रेस के भीड़ संबंधी दावे को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी रैली के आयोजन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि दिल्ली के व्यापारियों ने त्योहारों के दौरान कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताते हुए कांग्रेस से रैली को दिवाली के बाद आयोजित करने का अनुरोध किया था।
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आगे क्या होगा? विपक्ष ने जारी रखने का किया ऐलान
रामलीला मैदान की महारैली के बाद INDIA गठबंधन ने स्पष्ट किया कि चुनावी पारदर्शिता, मतदाता अधिकार और चुनाव आयोग की जवाबदेही के मुद्दे पर उसका आंदोलन जारी रहेगा।
राहुल गांधी ने जनता का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों का जुटना लोकतंत्र की मजबूती का संकेत है। विपक्ष जहां इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बता रहा है, वहीं भाजपा ने कांग्रेस के आरोपों और रैली के दावों पर सवाल उठाए हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि चुनाव आयोग और केंद्र सरकार विपक्ष के आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं तथा आने वाले दिनों में यह राजनीतिक टकराव किस दिशा में आगे बढ़ता है।

