जम्मू-कश्मीर की राजनीति में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। हाल ही में हुए मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सत्ताधारी नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। पार्टी के करीब 21 नाराज विधायकों ने एकजुट होकर नेतृत्व के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की है। शुक्रवार को श्रीनगर में हुई एक अहम बैठक के दौरान विधायकों ने चार मंत्रियों को हटाने और मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को पद से हटाने की मांग उठाई।
इस घटनाक्रम ने उमर अब्दुल्ला सरकार के साथ-साथ नेशनल कॉन्फ्रेंस के संगठनात्मक ढांचे को लेकर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती नाराज विधायकों को मनाने और सरकार में बढ़ते असंतोष को नियंत्रित करने की है।
कैसर जमशेद लोन के आवास पर हुई अहम बैठक
जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार को पूर्व मंत्री और लोलाब से विधायक कैसर जमशेद लोन के श्रीनगर स्थित आवास पर नाराज विधायकों की बैठक हुई। यह बैठक करीब तीन घंटे तक चली। इसमें पार्टी के कई वरिष्ठ और मौजूदा विधायक शामिल हुए। बैठक में जम्मू संभाग के राजौरी-पुंछ क्षेत्र के विधायकों की मौजूदगी भी चर्चा का विषय रही।
बैठक में विधायकों ने पार्टी के भीतर आंतरिक लोकतंत्र को मजबूत करने, निर्वाचित प्रतिनिधियों को उचित सम्मान देने और सरकार के कामकाज में सुधार लाने की मांग की। सूत्रों के अनुसार, इस दौरान कई प्रस्तावों पर सहमति बनी। इन प्रस्तावों को पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के सामने रखने का फैसला किया गया है।
हालांकि, बैठक में शामिल विधायकों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर है। कुछ रिपोर्टों में 21 विधायकों की बैठक का जिक्र है, जबकि अन्य में 18 विधायकों के शामिल होने और समूह द्वारा 24 विधायकों का समर्थन होने का दावा किया गया है।
चार मंत्रियों को हटाने की मांग क्यों उठी?
नाराज विधायकों की सबसे बड़ी मांग मंत्रिमंडल में बदलाव को लेकर है। उनका कहना है कि जिन मंत्रियों को पद संभाले दो साल पूरे हो चुके हैं, उन्हें मंत्रिमंडल से हटाकर नए विधायकों को मौका दिया जाना चाहिए। इस मांग के जरिए पार्टी के भीतर जिम्मेदारियों का नए सिरे से बंटवारा करने की बात कही जा रही है।
विधायकों का मानना है कि मंत्रिमंडल में क्षेत्रीय संतुलन, योग्यता और सभी क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। खासतौर पर जम्मू संभाग के कुछ विधायकों ने अपने क्षेत्रों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिलने पर चिंता जताई है।
इसके अलावा मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी को हटाने की मांग भी सामने आई है। नाराज विधायकों का आरोप है कि सरकार और पार्टी के महत्वपूर्ण फैसलों में सलाहकारों का जरूरत से ज्यादा हस्तक्षेप हो रहा है। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
मंत्रियों और अधिकारियों के रवैये से भी नाराज विधायक
बैठक में केवल मंत्रिमंडल में हिस्सेदारी का मुद्दा ही नहीं उठा, बल्कि विधायकों ने मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों के व्यवहार पर भी सवाल उठाए। कुछ विधायकों का आरोप है कि उन्हें अपने विधानसभा क्षेत्रों से जुड़े काम करवाने में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
गुलाबगढ़ के विधायक इंजीनियर खुर्शीद अहमद ने उपमुख्यमंत्री के कार्यालय में अपने साथ कथित तौर पर हुए व्यवहार को लेकर नाराजगी जाहिर की। विधायकों का कहना है कि जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधियों को सरकार और प्रशासन में उचित सम्मान मिलना चाहिए।
उनकी मांग है कि अधिकारियों और मंत्रियों के कामकाज में जवाबदेही सुनिश्चित की जाए तथा पार्टी के चुनावी घोषणापत्र को लागू करने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।
आगा रुहुल्ला के इस्तीफे के एलान से बढ़ी मुश्किलें
नेशनल कॉन्फ्रेंस के लिए एक और बड़ी चुनौती सांसद आगा सैयद रुहुल्ला की नाराजगी है। उन्होंने तीन नवंबर को पार्टी और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने के अपने एलान पर कायम रहने की बात कही है।
रुहुल्ला की नाराजगी और असंतुष्ट विधायकों की सक्रियता ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है। अगर पार्टी के भीतर असंतोष इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर भी पड़ सकता है।
मुबारक गुल को महासचिव पद से हटाने का फैसला
इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच फारूक अब्दुल्ला ने विधायक मुबारक गुल को पार्टी के महासचिव पद से हटा दिया है। उनकी जगह मंत्री अली मोहम्मद सागर को अगले आदेश तक महासचिव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
गौरतलब है कि मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने के बाद मुबारक गुल ने सार्वजनिक रूप से अपनी नाराजगी जाहिर की थी। उनके समर्थकों ने भी श्रीनगर में मशाल जुलूस निकालकर अपनी नाराजगी जताई।
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उमर अब्दुल्ला के सामने बड़ी चुनौती
27 अक्टूबर को हुए मंत्रिमंडल विस्तार में चार नए मंत्रियों को शामिल किया गया था, जबकि निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर दिया गया था। इस बदलाव के बाद कई विधायकों की उम्मीदों को झटका लगा और पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ने लगा।
अब नाराज विधायकों ने अपनी मांगों को लेकर समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता विधायक नजीर अहमद गुरेजी कर रहे हैं। यह समिति फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपेगी।
फिलहाल सभी की निगाहें नेशनल कॉन्फ्रेंस के शीर्ष नेतृत्व के अगले कदम पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या उमर अब्दुल्ला नाराज विधायकों को मनाने में सफल होंगे या मंत्रिमंडल विस्तार के बाद शुरू हुई यह नाराजगी पार्टी के लिए बड़ी राजनीतिक चुनौती बन जाएगी। आने वाले कुछ दिन जम्मू-कश्मीर की राजनीति के लिहाज से बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

