CHARDHAM YATRA 2026: करोड़ो लोगों की श्रद्धा और आस्था के केंद्र बदरीनाथ धाम के कपाट विधिवत रूप से श्रद्धालुओं के लिए सुबह 6 बजकर 15 मिनट पर बैसाख मास शुक्ल पक्ष, पुनर्वसु नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्ध योग में खुल गये हैं। कपाट खुलते ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सबसे पहले भगवान बद्रीविशाल के दर्शन किए, इसके बाद शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी दर्शन किए।
बदरीनाथ मंदिर के कपाट आज सुबह ठीक सवा छह बजे खोले गए। यह समय बैसाख मास के शुक्ल पक्ष में पुनर्वसु नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्ध योग के संयोग में था, जिसे धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दौरान मंदिर परिसर में करीब दो हजार श्रद्धालु उपस्थित रहे।
अखंड ज्योति के दर्शन और घृत कंबल का संकेत
CHARDHAM YATRA 2026 के पांचवें दिन बद्रीनाथ धाम के कपाट खुलते समय धाम को विशेष रूप से सजाया गया है। मंदिर परिसर से लेकर आसपास के प्राचीन मठ-मंदिरों तक को 25 कुंतल ऑर्किड और गेंदे के फूलों से आकर्षक ढंग से सजाया गया है, जिससे पूरा क्षेत्र जगमगा उठा है। कपाट खुलने से पहले ही यात्रा मार्ग के विभिन्न पड़ावों पर श्रद्धालुओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी, जिससे पूरे इलाके में चारधाम यात्रा की रौनक लौट आई।

कपाट खुलते ही सबसे पहले बीते छह महीनों से निरंतर जल रही अखंड ज्योति के दर्शन किए गए। यह ज्योति शीतकाल में कपाट बंद रहने के दौरान भी मंदिर में अनवरत जलती रहती है। इसके साथ ही कपाट बंद होने के समय भगवान बद्रीविशाल पर चढ़ाया गया घृत कंबल भी हटाया गया। बदरीनाथ धाम के पूर्व धर्माधिकारी आचार्य भुवन चंद्र उनियाल ने बताया कि इस साल कंबल घी में लबालब मिला है, जो यह संकेत देता है कि पूरे साल मौसम अनुकूल रहेगा।
कपाट खुलने से एक दिन पहले बुधवार को ही उद्धव, तेल कलश और आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी बदरीनाथ धाम पहुंच गई थी। वहीं, कुबेर की डोली रात्रि प्रवास के लिए बामणी गांव पहुंची और अगले दिन प्रातःकाल मंदिर में प्रवेश किया।
मंदिर परिसर में मोबाइल और रील्स पर बैन
CHARDHAM YATRA 2026 के लिए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। मंदिर परिसर में अब मोबाइल फोन ले जाने, वीडियो रिकॉर्डिंग करने, रील्स बनाने और फोटोग्राफी करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। BKTC की बजट बैठक में लिए गए इस फैसले का मुख्य उद्देश्य धाम की आध्यात्मिक गरिमा और पवित्रता को बनाए रखना है।

समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में देखा गया कि यूट्यूबर्स, ब्लॉगर्स और इन्फ्लुएंसर्स द्वारा मंदिर के भीतर वीडियो बनाने और रील्स शूट करने से दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती थी। इससे न केवल अनावश्यक भीड़ जमा होती थी, बल्कि सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी खड़ी हो रही थीं।
CHARDHAM YATRA 2026 में अब श्रद्धालुओं को अपने फोन और कैमरे मंदिर के बाहर निर्धारित लॉकर या क्लॉक रूम में जमा करने होंगे। हेमंत द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि धाम तीर्थाटन के लिए हैं, पर्यटन स्थल के रूप में केवल फोटो खिंचवाने के लिए नहीं।
CHARDHAM YATRA 2026 का महत्व
उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ यूं ही नहीं कहा जाता, यहां स्थित चार धाम हिंदू आस्था के सबसे पवित्र तीर्थ माने जाते हैं। ये चार धाम हिमालय की गोद में बसे हैं और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन चार धामों में यमुनोत्री धाम यात्रा का पहला पड़ाव माना जाता है।
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यहां यमुना नदी का उद्गम स्थल है और माता यमुना की पूजा की जाती है। श्रद्धालु यहां गर्म कुंड में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद गंगोत्री धाम वह स्थान है जहां से मां गंगा की धारा की शुरुआत मानी जाती है। यहां स्थित मंदिर में गंगा मां की पूजा होती है। यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति के लिए प्रसिद्ध है।

केदारनाथ धाम भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। समुद्र तल से करीब 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह धाम हिमालय की बर्फीली वादियों के बीच बसा है। यहां तक पहुंचने के लिए कठिन यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह अत्यंत पवित्र स्थान है।
इसके बाद आता है बदरीनाथ धाम, यह भगवान विष्णु को समर्पित धाम है और अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। यहां बदरीनारायण के दर्शन किए जाते हैं। यह चारधाम यात्रा का अंतिम पड़ाव होता है और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। CHARDHAM YATRA 2026 अप्रैल-मई में शुरू होकर अक्टूबर-नवंबर तक चलने की संभावना है।
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