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KEDARNATH DHAM के खुले कपाट: 51 क्विंटल फूलों से सजा धाम, सीएम धामी ने की पीएम मोदी के नाम की पहली पूजा

करोड़ो लोगों की श्रद्धा और आस्था के केंद्र बाबा केदार के कपाट आज CHARDHAM YATRA 2026 के चौथे दिन सुबह ठीक 8 बजे शुभ मुहूर्त में वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए हैं। KEDARNATH DHAM के कपाट खुलते ही पूरी केदारपुरी ‘हर-हर महादेव’ और ‘जय बाबा केदार’ के जयघोष से गुंजायमान हो उठी।

KEDARNATH DHAM के कपाट खुलने के साथ ही पीएम मोदी के नाम की पहली पूजा

KEDARNATH DHAM के कपाट खुलने के साथ ही मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने धाम पहुंचकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम की पहली विशेष पूजा संपन्न कराई और प्रदेश की सुख-समृद्धि की कामना की। कपाट खुलने के बाद ज्योतिर्लिंग पर शीतकाल के दौरान लगाई गई भस्म को हटाकर श्रद्धालुओं में प्रसाद के रूप में बांटा गया।

इस दौरान बाबा के दरबार को करीब 51 क्विंटल फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया है, जो श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। बीते मंगलवार शाम को बाबा की उत्सव डोली ऊखीमठ से 17 किलोमीटर की कठिन पैदल यात्रा कर धाम पहुँची थी, जहाँ सेना के बैंड (8वीं सिखलाई रेजीमेंट) की धुनों के साथ उसका स्वागत किया गया।

CHARDHAM YATRA 2026
CHARDHAM YATRA 2026

भैरवनाथ मंदिर और भोग की परंपरा

KEDARNATH DHAM के  कपाट खुलने के पहले दिन भगवान केदारनाथ को भोग नहीं लगाया जाएगा। परंपरा के अनुसार, बाबा केदार को भोग तभी लगता है जब उनके क्षेत्र रक्षक भुकुंड भैरव के कपाट खुलते हैं। भैरवनाथ मंदिर के कपाट 25 अप्रैल को खुलेंगे, जिसके बाद ही नियमित भोग (पीले चावलों का प्रसाद) शुरू होगा।

बता दें कि उत्तराखंड में पवित्र चारधाम यात्रा 2026 की शुरुआत रविवार 19 अप्रैल को विधि-विधान के साथ हो गई है। Gangotri में मां गंगा की डोली मुखबा से पहुंची, जबकि Yamunotri में मां यमुना की डोली खरसाली से धाम लाई गई। दोपहर 12:15 बजे गंगोत्री और 12:35 बजे यमुनोत्री के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।

मंदिर परिसर में मोबाइल और रील्स पर बैन

CHARDHAM YATRA 2026 के लिए बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति ने एक बड़ा नीतिगत निर्णय लिया है। मंदिर परिसर में अब मोबाइल फोन ले जाने, वीडियो रिकॉर्डिंग करने, रील्स बनाने और फोटोग्राफी करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। BKTC की बजट बैठक में लिए गए इस फैसले का मुख्य उद्देश्य धाम की आध्यात्मिक गरिमा और पवित्रता को बनाए रखना है।

CHARDHAM YATRA 2026
CHARDHAM YATRA 2026

समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने स्पष्ट किया कि पिछले कुछ वर्षों में देखा गया कि यूट्यूबर्स, ब्लॉगर्स और इन्फ्लुएंसर्स द्वारा मंदिर के भीतर वीडियो बनाने और रील्स शूट करने से दर्शन व्यवस्था प्रभावित होती थी। इससे न केवल अनावश्यक भीड़ जमा होती थी, बल्कि सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी खड़ी हो रही थीं। CHARDHAM YATRA 2026 में अब श्रद्धालुओं को अपने फोन और कैमरे मंदिर के बाहर निर्धारित लॉकर या क्लॉक रूम में जमा करने होंगे। हेमंत द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि धाम तीर्थाटन के लिए हैं, पर्यटन स्थल के रूप में केवल फोटो खिंचवाने के लिए नहीं।

CHARDHAM YATRA 2026 का महत्व 

उत्तराखंड को ‘देवभूमि’ यूं ही नहीं कहा जाता, यहां स्थित चार धाम हिंदू आस्था के सबसे पवित्र तीर्थ माने जाते हैं। ये चार धाम हिमालय की गोद में बसे हैं और हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इन चार धामों में यमुनोत्री धाम यात्रा का पहला पड़ाव माना जाता है।

यहां यमुना नदी का उद्गम स्थल है और माता यमुना की पूजा की जाती है। श्रद्धालु यहां गर्म कुंड में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं। इसके बाद गंगोत्री धाम वह स्थान है जहां से मां गंगा की धारा की शुरुआत मानी जाती है। यहां स्थित मंदिर में गंगा मां की पूजा होती है। यह स्थान प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति के लिए प्रसिद्ध है।

CHARDHAM YATRA 2026
CHARDHAM YATRA 2026

केदारनाथ धाम भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। समुद्र तल से करीब 3,583 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह धाम हिमालय की बर्फीली वादियों के बीच बसा है। यहां तक पहुंचने के लिए कठिन यात्रा करनी पड़ती है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह अत्यंत पवित्र स्थान है।

इसके बाद आता है बदरीनाथ धाम, यह भगवान विष्णु को समर्पित धाम है और अलकनंदा नदी के किनारे स्थित है। यहां बदरीनारायण के दर्शन किए जाते हैं। यह चारधाम यात्रा का अंतिम पड़ाव होता है और आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। CHARDHAM YATRA 2026 अप्रैल-मई में शुरू होकर अक्टूबर-नवंबर तक चलने की संभावना है।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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