Cashless Claim Process यानी अस्पताल में बिना अपनी जेब से बड़ा भुगतान किए इलाज कराने का तरीका, हेल्थ इंश्योरेंस का सबसे बड़ा फायदा माना जाता है। इसमें अस्पताल का बिल सीधे बीमा कंपनी चुकाती है और मरीज के परिवार को पैसों की तुरंत व्यवस्था करने की चिंता नहीं रहती।
लेकिन सही प्रक्रिया की जानकारी न होने पर कई लोग अस्पताल में घंटों परेशान होते हैं या उनका कैशलेस क्लेम अटक जाता है। इस लेख में जानिए कैशलेस इलाज के लिए क्लेम करने का पूरा तरीका, स्टेप बाय स्टेप।
कैशलेस क्लेम क्या होता है?
कैशलेस क्लेम में बीमा कंपनी या उसकी ओर से काम करने वाली टीपीए कंपनी इलाज का खर्च सीधे अस्पताल को देती है। मरीज को सिर्फ वही खर्च देना होता है, जो पॉलिसी में कवर नहीं है।
यह सुविधा आमतौर पर उन अस्पतालों में मिलती है, जो आपकी बीमा कंपनी के नेटवर्क में शामिल हैं। इसलिए पॉलिसी लेते ही अपने शहर के नेटवर्क अस्पतालों की सूची देख लेना समझदारी है।
Cashless Claim Process: स्टेप बाय स्टेप तरीका
नेटवर्क अस्पताल चुनें
बीमा कंपनी की वेबसाइट, ऐप या कस्टमर केयर से पता करें कि जिस अस्पताल में इलाज कराना है, वह नेटवर्क में है या नहीं। नेटवर्क से बाहर के अस्पताल में आमतौर पर पहले खुद भुगतान करके बाद में रीइंबर्समेंट क्लेम करना पड़ता है।
जरूरी कागज साथ रखें
हेल्थ कार्ड या ई कार्ड, पॉलिसी नंबर, आधार कार्ड जैसा पहचान पत्र और डॉक्टर की सलाह या जांच रिपोर्ट साथ ले जाएं। Cashless Claim Process में ये कागज सबसे पहले मांगे जाते हैं।
अस्पताल के बीमा डेस्क पर जाएं
हर नेटवर्क अस्पताल में बीमा या टीपीए डेस्क होता है। यहां प्री ऑथराइजेशन फॉर्म भरा जाता है, जिसमें मरीज की जानकारी और डॉक्टर की ओर से बीमारी, इलाज और अनुमानित खर्च लिखा जाता है।
बीमा कंपनी की मंजूरी का इंतजार करें
Cashless Claim Process में अस्पताल यह फॉर्म बीमा कंपनी को भेजता है। आईआरडीएआई के नियमों के मुताबिक कंपनी को कैशलेस मंजूरी पर एक घंटे के भीतर फैसला लेना होता है। प्लान किए गए इलाज के लिए यह प्रक्रिया भर्ती से कुछ दिन पहले ही पूरी कर लेना बेहतर है।
खर्च बढ़े तो अतिरिक्त मंजूरी
इलाज के दौरान अगर खर्च शुरुआती अनुमान से ज्यादा हो जाए, तो अस्पताल बीमा कंपनी से अतिरिक्त रकम की मंजूरी मांगता है। इसकी जानकारी बीमा डेस्क से लेते रहें।
डिस्चार्ज के समय अंतिम मंजूरी
Cashless Claim Process के आखिरी चरण में डिस्चार्ज से पहले अस्पताल अंतिम बिल बीमा कंपनी को भेजता है। नियमों के अनुसार कंपनी को डिस्चार्ज की मंजूरी तीन घंटे के भीतर देनी होती है और इससे ज्यादा देरी पर अस्पताल का अतिरिक्त चार्ज बीमा कंपनी को उठाना पड़ता है।
कौन सा खर्च खुद देना पड़ता है?
Cashless Claim Process में भी कुछ खर्च मरीज को खुद चुकाने होते हैं। इनमें ग्लव्स, मास्क जैसी कुछ उपभोग की चीजें, पॉलिसी की सीमा से महंगे कमरे का अंतर, को पेमेंट और डिडक्टिबल जैसी रकम शामिल हो सकती है।
इसलिए डिस्चार्ज से पहले अंतिम बिल ध्यान से देखें और समझें कि कौन सा हिस्सा बीमा कंपनी दे रही है और कौन सा आपको देना है।
कैशलेस क्लेम रिजेक्ट होने की आम वजहें
Cashless Claim Process में रुकावट की आम वजहें हैं पॉलिसी के वेटिंग पीरियड में आने वाली बीमारी, पॉलिसी में शामिल न होने वाला इलाज, अधूरे कागज और पहले से मौजूद बीमारी की जानकारी छुपाना।
अगर कैशलेस मंजूरी नहीं मिलती, तो घबराएं नहीं। इलाज का भुगतान खुद करें, सभी बिल और रिपोर्ट संभालकर रखें और बाद में रीइंबर्समेंट क्लेम करें। कई मामलों में कागज पूरे होने पर यह क्लेम मिल जाता है।
जरूरी सावधानियां
बीमा कंपनी का हेल्पलाइन नंबर और ई कार्ड फोन में सेव रखें, ताकि इमरजेंसी में तुरंत काम आए। परिवार के किसी सदस्य को भी पॉलिसी की जानकारी जरूर दें।
अस्पताल में भर्ती के समय सेहत से जुड़ी हर जानकारी सही बताएं। सही जानकारी और पूरे कागजों के साथ Cashless Claim Process काफी आसान और तेज हो जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- इमरजेंसी में कैशलेस क्लेम कैसे करें?
इमरजेंसी में पहले मरीज का इलाज शुरू कराएं। Cashless Claim Process के लिए भर्ती के बाद जल्द से जल्द, आमतौर पर 24 घंटे के भीतर, बीमा कंपनी को सूचना दें और अस्पताल के बीमा डेस्क पर कागज जमा करें। - क्या नॉन नेटवर्क अस्पताल में भी कैशलेस इलाज मिल सकता है?
कुछ बीमा कंपनियां नॉन नेटवर्क अस्पताल में भी कैशलेस सुविधा देने लगी हैं, लेकिन इसके लिए पहले से सूचना देना जरूरी होता है। अपनी कंपनी से इसकी पुष्टि जरूर करें। - कैशलेस मंजूरी में देरी हो तो क्या करें?
Cashless Claim Process में देरी होने पर पहले अस्पताल के बीमा डेस्क और बीमा कंपनी की हेल्पलाइन पर बात करें। समस्या हल न हो, तो कंपनी के शिकायत अधिकारी को लिखित शिकायत दें। - बीमा कंपनी के खिलाफ शिकायत कहां करें?
कंपनी से समाधान न मिलने पर आईआरडीएआई के बीमा भरोसा पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। क्लेम से जुड़ी शर्तें अपनी पॉलिसी के दस्तावेज में जरूर जांचें।

