Health Insurance में Co-payment वह हिस्सा है जो अस्पताल के मंजूर बिल में से आपको अपनी जेब से भरना पड़ता है, जबकि बाकी रकम बीमा कंपनी चुकाती है। ज्यादातर लोग इस शर्त पर ध्यान नहीं देते और क्लेम के वक्त अचानक बड़ा बिल हाथ में आ जाता है। हाल ही में बीमा कंपनियों के बीच सभी रिटेल पॉलिसियों पर 10 प्रतिशत को-पे लागू करने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई है।
Co-payment कैसे काम करता है?
Co-payment हमेशा प्रतिशत में तय होता है, जैसे 10, 20 या 30 प्रतिशत। मान लीजिए आपकी पॉलिसी में 20 प्रतिशत को-पे है और अस्पताल का मंजूर बिल 3 लाख रुपये बना, तो 60,000 रुपये आप भरेंगे और 2,40,000 रुपये बीमा कंपनी देगी। यह बात ध्यान रखें कि को-पे आपकी बीमा राशि को कम नहीं करता। यह सिर्फ हर क्लेम में आपकी हिस्सेदारी तय करता है।
Co-payment कितने तरह का होता है?
पहला है अनिवार्य को-पे, जो कंपनी खुद लगाती है। यह आमतौर पर 60 साल से ज्यादा उम्र वालों की पॉलिसी में 10 से 20 प्रतिशत तक देखने को मिलता है। दूसरा है स्वैच्छिक को-पे, जिसे आप खुद प्रीमियम कम करने के लिए चुनते हैं।
इसके अलावा कुछ पॉलिसियों में जोनल को-पे होता है, यानी छोटे शहर के हिसाब से पॉलिसी लेकर बड़े महानगर में इलाज कराने पर अतिरिक्त हिस्सा भरना पड़ता है। कुछ पॉलिसियां खास बीमारियों के इलाज या नॉन नेटवर्क अस्पताल में इलाज पर भी को-पे लगाती हैं। इसलिए पॉलिसी के कागज में हर शर्त अलग से जांचनी चाहिए।
प्रीमियम पर इसका क्या असर होता है?
को-पे वाली पॉलिसी का प्रीमियम आमतौर पर कम होता है। स्वैच्छिक 10 या 20 प्रतिशत को-पे चुनने पर उम्र और प्लान के हिसाब से प्रीमियम 10 से 25 प्रतिशत तक कम हो सकता है। लेकिन यह बचत तभी तक अच्छी लगती है जब तक क्लेम न हो। बड़ी सर्जरी या लंबे इलाज में को-पे की रकम लाखों में पहुंच सकती है।
को-पे और डिडक्टिबल में फर्क डिडक्टिबल एक तय रकम होती है, जैसे 50,000 रुपये, जिसके बाद ही बीमा कंपनी भुगतान शुरू करती है। को-पे हर बिल पर एक तय प्रतिशत होता है, इसलिए बिल जितना बड़ा होगा, आपकी हिस्सेदारी भी उतनी ही बढ़ेगी। सुपर टॉप अप पॉलिसी में आमतौर पर डिडक्टिबल लगता है, जबकि सीनियर सिटीजन पॉलिसी में को-पे ज्यादा आम है।
IRDAI के नियम क्या कहते हैं?
बीमा नियामक IRDAI के अनुसार, को-पे का प्रतिशत, शर्तें और गणना का तरीका पॉलिसी डॉक्यूमेंट और कस्टमर इन्फॉर्मेशन शीट में साफ लिखा होना चाहिए। कोई भी कंपनी बिना बताए को-पे नहीं काट सकती। 10 प्रतिशत अनिवार्य को-पे वाले हालिया प्रस्ताव पर अभी कोई फैसला नहीं हुआ है। उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि IRDAI इसे सभी पॉलिसियों पर अनिवार्य करने की मंजूरी शायद न दे।

पॉलिसी चुनते समय क्या ध्यान रखें?
अगर आपका बजट अनुमति देता है, तो जीरो को-पे वाली पॉलिसी चुनना सबसे सुरक्षित है। माता पिता के लिए पॉलिसी ले रहे हैं, तो को-पे की दर के साथ रूम रेंट लिमिट भी जरूर देखें। जिस शहर में इलाज कराने की संभावना ज्यादा हो, उसी जोन के हिसाब से पॉलिसी लें। रिन्यूअल के समय यह भी पूछें कि क्या थोड़ा ज्यादा प्रीमियम देकर को-पे हटवाया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या हर हेल्थ इंश्योरेंस में Co-payment होता है?
नहीं, बाजार में कई पॉलिसियां जीरो को-पे के साथ भी मिलती हैं, हालांकि उनका प्रीमियम थोड़ा ज्यादा हो सकता है।
2. क्या Co-payment से बीमा राशि कम हो जाती है?
नहीं, Co-payment सिर्फ हर क्लेम में आपकी हिस्सेदारी तय करता है, आपकी कुल बीमा राशि वही रहती है।
3. सीनियर सिटीजन पॉलिसी में Co-payment कितना होता है?
ज्यादातर सीनियर सिटीजन पॉलिसियों में यह 10 से 20 प्रतिशत के बीच होता है, लेकिन हर कंपनी की शर्तें अलग हो सकती हैं।
4. क्या Co-payment बाद में हटवाया जा सकता है?
कुछ कंपनियां रिन्यूअल पर अतिरिक्त प्रीमियम लेकर स्वैच्छिक को-पे हटाने का विकल्प देती हैं। नियमों की आधिकारिक जानकारी IRDAI की वेबसाइट पर देखी जा सकती है।
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