उत्तराखंड के चमोली जनपद स्थित पवित्र RUDRANATH के कपाट 18 मई 2026 को विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ खोल दिए गए। चतुर्थ केदार के रूप में प्रसिद्ध यह मंदिर पंच केदार यात्रा का अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
कपाट खुलने के अवसर पर मंदिर परिसर में भक्ति और उत्साह का विशेष वातावरण देखने को मिला। मंदिर समिति और स्थानीय पुजारियों द्वारा पारंपरिक पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी गई।
डोली यात्रा के बाद खुले कपाट
परंपरा के अनुसार कपाट खुलने से पहले भगवान रुद्रनाथ की चल विग्रह डोली शीतकालीन गद्दी स्थल GOPINATH TEMPLE से रवाना हुई। तय कार्यक्रम के तहत 14 मई 2026 को डोली यात्रा प्रारंभ हुई।
16 मई को डोली पनार बुग्याल पहुंची, जहां रात्रि विश्राम किया गया। इसके बाद 17 मई को डोली रुद्रनाथ मंदिर पहुंची और 18 मई को शुभ मुहूर्त में मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। कपाट खुलने के दौरान स्थानीय वाद्य यंत्रों, वैदिक मंत्रों और विशेष पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हुए।

पंच केदार में विशेष स्थान रखता है RUDRANATH
रुद्रनाथ मंदिर उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित भगवान शिव के पंचकेदारों में शामिल एक अत्यंत पवित्र और रहस्यमयी धाम है। समुद्र तल से लगभग 2290 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर घने जंगलों, रंग-बिरंगे बुग्यालों और बर्फ से ढकी हिमालयी चोटियों के बीच स्थित है।
यहां भगवान शिव के मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। रुद्रनाथ मंदिर पंचकेदार यात्रा का चौथा केदार माना जाता है। पंचकेदार में केदारनाथ, तुंगनाथ, मध्यमहेश्वर, रुद्रनाथ और कल्पेश्वर शामिल हैं।
रुद्रनाथ की यात्रा उत्तराखंड की सबसे कठिन लेकिन सबसे सुंदर ट्रेक यात्राओं में गिनी जाती है। इस यात्रा की शुरुआत चमोली जिले के मुख्यालय गोपेश्वर से होती है। यहां से श्रद्धालु सगर गांव की ओर बढ़ते हैं, जो गोपेश्वर से लगभग पांच किलोमीटर दूर स्थित है। यहीं तक वाहन पहुंचते हैं और इसके बाद पैदल यात्रा आरंभ होती है।
रुद्रनाथ मंदिर से जुड़ी धार्मिक मान्यता
RUDRANATH मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां भगवान शिव की पूजा प्राकृतिक शिला रूप में की जाती है। मान्यता है कि यहां भगवान शिव के मुख स्वरूप के दर्शन होते हैं।
महाभारत से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार पांडव युद्ध के पापों से मुक्ति पाने के लिए भगवान शिव की खोज में हिमालय पहुंचे थे। भगवान शिव ने उनसे बचने के लिए विभिन्न रूप धारण किए और पंच केदार के रूप में अलग-अलग स्थानों पर प्रकट हुए। रुद्रनाथ में उनका मुख स्वरूप पूजित माना जाता है।

ट्रैक के लिए प्रसिद्ध है यात्रा
RUDRANATHका संपूर्ण क्षेत्र प्राकृतिक सुंदरता और जैव विविधता से भरपूर है। यात्रा मार्ग में हिमालयी मोनाल, थार, मृग और कई दुर्लभ पक्षी एवं वन्यजीव दिखाई देते हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ब्रह्मकमल सहित कई दुर्लभ जड़ी-बूटियां और फूल मिलते हैं।
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RUDRANATH यात्रा कठिन ट्रेक होने के कारण यात्रियों को पूरी तैयारी के साथ जाना चाहिए। गोपेश्वर और सगर तक होटल, लॉज और गेस्ट हाउस उपलब्ध रहते हैं, लेकिन आगे के मार्ग में सीमित सुविधाएं हैं।
यात्रियों को गर्म कपड़े, बरसाती, टॉर्च, दवाइयां और आवश्यक भोजन सामग्री साथ रखनी चाहिए। मौसम यहां कभी भी बदल सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। ट्रेकिंग के शौकीनों के लिए अगस्त और सितंबर का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है, जब पूरी घाटियां फूलों से ढकी रहती हैं।
यात्रा के लिए पंजीकरण अनिवार्य
उत्तराखंड सरकार और मंदिर समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पंजीकरण अनिवार्य किया गया है। यात्रा पर जाने से पहले ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है। यात्रा सीजन के दौरान चमोली जिले में श्रद्धालुओं के लिए आवास, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी विशेष व्यवस्थाएं भी की जाती हैं।
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