MAKAR SANKRANTI भारत का एक प्रमुख और पवित्र त्योहार है, जो पूरे देश में अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। इस साल यह त्योहार 14 जनवरी को मनाया जा रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करता है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। मकर संक्रांति का खगोलीय महत्व भी है, क्योंकि इस दिन सूर्य दक्षिण से उत्तर की ओर अपनी यात्रा शुरू करता है, जिसे उत्तरायण के नाम से जाना जाता है। इसे सकारात्मक ऊर्जा और खुशहाली की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।

MAKAR SANKRANTI को देश भर में अलग अलग नामों से मनाया जाता है
मकर संक्रांति के उत्सव का रूप देश के विभिन्न हिस्सों में भिन्न-भिन्न होता है। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी के नाम से मनाया जाता है, जबकि महाराष्ट्र में इसे संक्रांति कहा जाता है। गुजरात में इसे उत्तरायण, उत्तराखंड में घुघुतिया या चुन्या त्यार, पंजाब में लोहड़ी और दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से जाना जाता है। हर राज्य में इस त्योहार की अपनी खास परंपराएं और रीति-रिवाज होते हैं। इस दिन तिल-गुड़ और खिचड़ी खाने और बांटने का विशेष महत्व होता है। इस दौरान श्रद्धालु गंगा और यमुना में स्नान करते हुए अपने पापों से मुक्ति की कामना करते हैं।

मकर संक्रांति और महाकुंभ 2025 का अद्भुत संयोग
इस साल मकर संक्रांति के साथ महाकुंभ का शुभारंभ भी हो रहा है। 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के अवसर पर प्रयागराज में महाकुंभ का पहला शाही स्नान होगा। त्रिवेणी संगम, जो गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती नदियों का संगम है, पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। अब तक 60 लाख से अधिक श्रद्धालु संगम तट पर पवित्र डुबकी लगा चुके हैं। आधी रात को पौष पूर्णिमा की प्रथम डुबकी के साथ इस महाकुंभ का शुभारंभ हुआ। यह धार्मिक आयोजन 45 दिनों तक चलेगा, जिसमें लगभग 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना है।

मकर संक्रांति पर करें ये खास काम
- मकर संक्रांति के दिन दान-पुण्य का भी विशेष महत्व होता है।
- लोग अन्न, वस्त्र, तिल, गुड़ और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करते हैं।
- धार्मिक मान्यता है कि इस दिन किया गया दान कई गुना फलदायी होता है।
- लोग गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद करते हैं और समाज में एकता और भाईचारे का संदेश फैलाते हैं।

गुजरात और राजस्थान जैसे राज्यों में मकर संक्रांति के मौके पर पतंग उड़ाने का भी खास चलन है। आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है, और लोग पतंगबाजी का आनंद लेते हैं। यह त्योहार नई फसल के आगमन की खुशी भी मनाता है। किसान अपनी फसल की कटाई के बाद इस त्योहार को बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं यह त्योहार हमें यह सिखाता है कि जीवन में धर्म और दान का कितना महत्व है। यह हमें अपनी परंपराओं और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की प्रेरणा देता है।

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