Insurance Policy Revival यानी लैप्स हो चुकी बीमा पॉलिसी को दोबारा चालू करना, उन लोगों के लिए बड़ी राहत है जिनका प्रीमियम किसी वजह से समय पर नहीं भरा जा सका। नौकरी छूटना, अचानक खर्च या बस तारीख भूल जाना, कई कारणों से पॉलिसी बंद हो जाती है।
अच्छी बात यह है कि ज्यादातर मामलों में ऐसी पॉलिसी को तय समय के भीतर फिर से शुरू किया जा सकता है। इस लेख में जानिए पॉलिसी कब लैप्स होती है, उसे कैसे चालू करें और इसमें किन बातों का ध्यान रखें।
पॉलिसी लैप्स कब होती है?
प्रीमियम की तय तारीख निकलने के बाद भी बीमा कंपनी कुछ अतिरिक्त समय देती है, जिसे ग्रेस पीरियड कहते हैं। सालाना, छमाही और तिमाही प्रीमियम पर यह 30 दिन और मासिक प्रीमियम पर 15 दिन का होता है।
ग्रेस पीरियड में भी प्रीमियम न भरने पर पॉलिसी लैप्स हो जाती है। इसका मतलब है कि बीमा कवर बंद हो जाता है और इस दौरान कुछ होने पर परिवार को क्लेम नहीं मिलता।
Insurance Policy Revival क्या है?
लैप्स हुई पॉलिसी को बकाया प्रीमियम और ब्याज चुकाकर दोबारा पहले जैसे फायदों के साथ चालू करने की प्रक्रिया को रिवाइवल कहा जाता है। इससे पुरानी पॉलिसी की उम्र के हिसाब से तय सस्ता प्रीमियम और बाकी फायदे बने रहते हैं।
Insurance Policy Revival के लिए बीमा नियामक आईआरडीएआई के नियमों के मुताबिक नॉन लिंक्ड लाइफ इंश्योरेंस पॉलिसी को पहले बकाया प्रीमियम की तारीख से 5 साल के भीतर और यूलिप को 3 साल के भीतर रिवाइव किया जा सकता है। हालांकि अंतिम फैसला बीमा कंपनी की जांच पर निर्भर करता है।
पॉलिसी दोबारा चालू करने का तरीका
बीमा कंपनी से संपर्क करें
Insurance Policy Revival के लिए सबसे पहले अपनी बीमा कंपनी की शाखा, कस्टमर केयर, एजेंट या वेबसाइट से संपर्क करें। पॉलिसी नंबर देकर पता करें कि कितना बकाया है और कौन से कागज चाहिए।
रिवाइवल फॉर्म और सेहत की जानकारी दें
कंपनी आपसे रिवाइवल फॉर्म भरवाती है। कुछ समय से ज्यादा लैप्स होने पर सेहत से जुड़ा घोषणा पत्र देना पड़ता है और जरूरत पड़ने पर मेडिकल जांच भी करवानी पड़ सकती है।
बकाया प्रीमियम और ब्याज चुकाएं
Insurance Policy Revival में सभी छूटे हुए प्रीमियम एक साथ भरने होते हैं, साथ में देरी के लिए ब्याज या लेट फीस भी लगती है। कंपनी की मंजूरी मिलते ही पॉलिसी फिर से चालू हो जाती है और आपको इसकी लिखित पुष्टि मिलती है।
रिवाइवल में देरी क्यों नुकसानदायक है?
जितना ज्यादा समय बीतता है, उतना ज्यादा बकाया और ब्याज चुकाना पड़ता है। लंबे समय बाद मेडिकल जांच सख्त हो जाती है और अगर इस बीच कोई बीमारी हो गई, तो कंपनी रिवाइवल से मना भी कर सकती है।
ध्यान रखें कि रिवाइवल के बाद अगले 3 साल तक कंपनी को आपकी दी गई जानकारी की दोबारा जांच करने का अधिकार मिल जाता है। इसलिए Insurance Policy Revival के फॉर्म में सेहत की हर जानकारी सच और पूरी लिखें।
खास रिवाइवल अभियान का फायदा उठाएं
कई बीमा कंपनियां समय समय पर विशेष रिवाइवल अभियान चलाती हैं, जिनमें लेट फीस पर छूट दी जाती है। एलआईसी जैसी कंपनियां ऐसे अभियान अक्सर चलाती रही हैं।
अगर आपकी पॉलिसी लैप्स है, तो ऐसे अभियान की जानकारी अपनी कंपनी से लेते रहें। इससे Insurance Policy Revival का खर्च काफी कम हो सकता है।
रिवाइव करें या नई पॉलिसी लें?
Insurance Policy Revival तब सबसे फायदेमंद है, जब पुरानी पॉलिसी में अच्छा कवर, कम प्रीमियम और जमा बोनस हो। खासकर तब, जब उम्र बढ़ने या सेहत बदलने से नई पॉलिसी महंगी पड़ सकती है।
लेकिन अगर पुरानी पॉलिसी का कवर बहुत कम है या बकाया बहुत ज्यादा हो गया है, तो पहले नई टर्म पॉलिसी के प्रीमियम से तुलना करें। नई पॉलिसी चालू होने से पहले पुरानी को बंद न करें।
हेल्थ इंश्योरेंस में रिवाइवल की सुविधा नहीं होती। ग्रेस पीरियड में रिन्यू न कराने पर नई पॉलिसी लेनी पड़ती है और वेटिंग पीरियड फिर से शुरू हो जाते हैं, इसलिए उसे समय पर रिन्यू कराना सबसे जरूरी है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- क्या ग्रेस पीरियड में पॉलिसी का कवर मिलता है?
हां, ग्रेस पीरियड के दौरान पॉलिसी चालू मानी जाती है और Insurance Policy Revival की जरूरत नहीं पड़ती। इस बीच क्लेम होने पर कंपनी बकाया प्रीमियम काटकर भुगतान करती है। - क्या टर्म इंश्योरेंस भी रिवाइव हो सकता है?
हां, Insurance Policy Revival के नियम टर्म पॉलिसी पर भी लागू होते हैं, लेकिन इसमें आमतौर पर सेहत की जांच ज्यादा सख्ती से होती है। - पॉलिसी लैप्स होने से कैसे बचें?
बैंक खाते से ऑटो डेबिट चालू करें, प्रीमियम की तारीख फोन में रिमाइंडर के रूप में सेव करें और जहां तक हो सके सालाना प्रीमियम चुनें। - एलआईसी पॉलिसी के रिवाइवल की जानकारी कहां मिलेगी?
एलआईसी पॉलिसी के बकाया प्रीमियम और रिवाइवल से जुड़ी जानकारी कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। पॉलिसी से जुड़ा फैसला लेने से पहले अपनी बीमा कंपनी या बीमा सलाहकार से सलाह जरूर लें।

