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मथुरा में आज रात 12 बजे जन्म लेंगे कान्हा, जन्मस्थान के गर्भगृह से पहली बार लाइव दिखेगी दिव्य आरती

भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मथुरा शुक्रवार को जन्माष्टमी के उल्लास में डूबी हुई है। शहर की गलियों से लेकर मंदिरों तक भक्ति और उत्सव का माहौल है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर आधी रात को होने वाले जन्मोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म हुआ था। इसी मान्यता के अनुरूप रात 12 बजे जन्मस्थान के गर्भगृह में विशेष पूजा, अभिषेक और आरती का आयोजन किया जाएगा। इस वर्ष खास बात यह है कि श्रद्धालु जन्मस्थान के गर्भगृह से होने वाली दिव्य आरती को पहली बार लाइव देख सकेंगे।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 2026 का मुख्य उत्सव 4 सितंबर को मनाया जा रहा है। मथुरा और वृंदावन में इस अवसर पर मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु ब्रज पहुंच रहे हैं। देश के अलग-अलग राज्यों के अलावा विदेशों से भी कृष्ण भक्त जन्मभूमि के दर्शन और जन्मोत्सव में शामिल होने के लिए मथुरा पहुंचे हैं।

मथुरा जन्मस्थान पर मध्यरात्रि में होगा जन्मोत्सवमथुरा

मथुरा स्थित श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर परिसर जन्माष्टमी के मुख्य केंद्रों में से एक है। मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट भी इसे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मस्थान बताती है।

रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के अवसर पर गर्भगृह में विशेष धार्मिक अनुष्ठान होंगे। जन्म के बाद भगवान के अभिषेक और आरती का आयोजन किया जाएगा। श्रद्धालुओं के लिए यह क्षण अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि धार्मिक परंपरा में आधी रात को ही कृष्ण जन्म का समय माना जाता है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष जन्मस्थान के गर्भगृह से होने वाली आरती का लाइव प्रसारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण रहेगा। इससे वे लोग भी इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन से जुड़ सकेंगे जो प्रत्यक्ष रूप से मथुरा नहीं पहुंच पाए हैं।

मथुरा में सज गईं गलियां और मंदिर

जन्माष्टमी को लेकर मथुरा शहर को विशेष रूप से सजाया गया है। मंदिरों में आकर्षक विद्युत सजावट, फूलों की सजावट और धार्मिक झांकियां तैयार की गई हैं। बाजारों में भी जन्माष्टमी की रौनक दिखाई दे रही है।

कृष्ण जन्मस्थान के अलावा द्वारकाधीश मंदिर, बांके बिहारी मंदिर, इस्कॉन मंदिर और वृंदावन के अन्य प्रमुख मंदिरों में भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। ब्रज क्षेत्र में जन्माष्टमी केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि व्यापक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाई जाती है। यहां रासलीला, भजन-कीर्तन और कृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित झांकियां प्रमुख आकर्षण रहती हैं।

वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर पर विशेष व्यवस्था

जन्माष्टमी के अवसर पर वृंदावन में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रशासन और स्थानीय प्रशासन ने विशेष व्यवस्थाएं की हैं। बांके बिहारी मंदिर में मंगला आरती के दर्शन सीमित संख्या में श्रद्धालुओं को उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। इसका उद्देश्य अत्यधिक भीड़ के बीच सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा सुनिश्चित करना है।

वृंदावन के मंदिरों में दिनभर धार्मिक आयोजन चलते हैं। शाम होते-होते भजन-कीर्तन और झांकियों के कारण वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो जाता है। आधी रात के समय कृष्ण जन्म के साथ उत्सव अपने चरम पर पहुंचता है।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़, रेलवे ने चलाईं विशेष ट्रेनें

जन्माष्टमी के कारण मथुरा पहुंचने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ गई है। यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए रेलवे ने 2 से 6 सितंबर के बीच कई विशेष ट्रेनों की व्यवस्था की है। मथुरा आने वाले श्रद्धालुओं के लिए दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और आसपास के प्रमुख स्टेशनों से अतिरिक्त सेवाएं संचालित की जा रही हैं।

मथुरा रोड, वृंदावन रोड और मंदिरों के आसपास भीड़ को नियंत्रित करने के लिए यातायात व्यवस्था में बदलाव किए गए हैं। श्रद्धालुओं को निर्धारित मार्गों से मंदिरों तक पहुंचने और प्रशासन के निर्देशों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।

आधी रात के दर्शन के लिए बढ़ी सुरक्षा

जन्माष्टमी पर सबसे ज्यादा भीड़ रात के समय मंदिरों में उमड़ती है। खासकर जन्मस्थान पर मध्यरात्रि के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की है। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और भीड़ नियंत्रण की व्यवस्था की गई है।

प्रशासन की कोशिश है कि श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान किसी तरह की परेशानी न हो और भीड़ एक जगह जमा न हो। संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के साथ ही यातायात व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

धार्मिक आस्था के साथ ब्रज की सांस्कृतिक पहचान

मथुरा और वृंदावन में जन्माष्टमी का महत्व केवल मंदिरों तक सीमित नहीं है। पूरा ब्रज क्षेत्र कृष्ण की लीलाओं से जुड़ा हुआ माना जाता है। मथुरा को कृष्ण की जन्मभूमि और वृंदावन को उनकी बाल लीलाओं से जोड़कर देखा जाता है। इसी कारण जन्माष्टमी के दौरान ब्रज में धार्मिक पर्यटन भी अपने चरम पर पहुंचता है।

इस दौरान स्थानीय दुकानदारों, होटल कारोबारियों, परिवहन सेवाओं और छोटे व्यापारियों के लिए भी यह महत्वपूर्ण अवसर होता है। देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी गतिविधियां बढ़ती हैं।

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इस बार क्यों खास है जन्माष्टमी?

2026 की जन्माष्टमी को लेकर सबसे बड़ा आकर्षण जन्मस्थान के गर्भगृह से होने वाली विशेष आरती का लाइव प्रसारण है। इससे जन्मोत्सव को देखने का अनुभव उन भक्तों के लिए भी उपलब्ध होगा जो भीड़ या दूरी के कारण मथुरा नहीं आ पाए हैं।

इसके साथ ही मंदिरों की भव्य सजावट, विशेष पूजा-अर्चना और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इस वर्ष के उत्सव को और खास बना दिया है।

निष्कर्ष

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव अपने चरम पर है। शुक्रवार की रात जैसे-जैसे मध्यरात्रि करीब आएगी, जन्मस्थान से लेकर वृंदावन के मंदिरों तक भक्तों की आस्था और उत्साह बढ़ता जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्म होगा और इसी अवसर पर जन्मस्थान के गर्भगृह में विशेष अभिषेक और दिव्य आरती की जाएगी।

इस बार जन्मस्थान से आरती का लाइव प्रसारण एक नई विशेषता है। वहीं, मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन, पुलिस और रेलवे ने भी व्यापक इंतजाम किए हैं। विशेष ट्रेनों से लेकर मंदिरों में भीड़ नियंत्रण तक कई स्तरों पर व्यवस्था की गई है।

कृष्ण जन्म की मध्यरात्रि में जब मंदिरों में घंटे-घड़ियाल और शंखनाद गूंजेंगे, तब पूरा ब्रज “नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की” के जयघोष से गूंज उठेगा। मथुरा की धरती पर मनाया जाने वाला यह उत्सव एक बार फिर धर्म, आस्था और ब्रज की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा का अद्भुत संगम प्रस्तुत करेगा।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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