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उत्तराखंड में फिर बिगड़ेगा मौसम, भारी बारिश का अलर्ट; इन जिलों में बढ़ी चिंता

उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता एक बार फिर बढ़ गई है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश को लेकर चेतावनी जारी की है। खासकर पहाड़ी जिलों में तेज बारिश के साथ गरज-चमक और तीव्र बारिश के दौर की संभावना जताई गई है। मौसम के इस बदले मिजाज को देखते हुए प्रशासन और आपदा प्रबंधन तंत्र को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के 4 सितंबर के राज्य पूर्वानुमान में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना के साथ आकाशीय बिजली और तीव्र से अति तीव्र बारिश के दौर की चेतावनी दी गई है।

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तराखंड में बारिश का सिलसिला आने वाले दिनों में भी जारी रह सकता है। ऐसे में पहाड़ी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और यात्रा करने वाले पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। भारी बारिश के कारण नदी-नालों का जलस्तर बढ़ने, भूस्खलन होने और पहाड़ी सड़कों पर मलबा आने की आशंका बनी हुई है।

उत्तराखंड के छह जिलों में येलो अलर्ट का असरउत्तराखंड

रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के कई जिलों में मौसम को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। भारी बारिश की संभावना वाले क्षेत्रों में प्रशासन को संभावित आपदा से निपटने के लिए तैयार रहने को कहा गया है। मौसम विभाग के अलर्ट का असर खासतौर पर उन इलाकों में अधिक देखा जा सकता है जहां पहले से ही बारिश के कारण जमीन में नमी बढ़ी हुई है।

उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में लगातार बारिश के दौरान छोटी अवधि में तेज बारिश भी बड़ा खतरा पैदा कर सकती है। ढलानों पर मिट्टी खिसकने और चट्टानों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। इसका सीधा असर सड़क संपर्क और ग्रामीण इलाकों की आवाजाही पर पड़ता है।

देहरादून समेत कई इलाकों में बारिश की संभावना

देहरादून और आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम के करवट लेने की संभावना है। राजधानी देहरादून में शुक्रवार को बादल छाए रहने और बारिश के दौर आने की संभावना जताई गई है। राज्य के मैदानी और पर्वतीय दोनों क्षेत्रों में मौसम अस्थिर रह सकता है।

IMD के ताजा बुलेटिन के अनुसार 4 सितंबर को नैनीताल, चंपावत, देहरादून, हरिद्वार और बागेश्वर में अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। इसके साथ ही राज्य के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक और बिजली गिरने के साथ तीव्र बारिश के दौर भी हो सकते हैं।

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों के लिए भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई है। 5 सितंबर को देहरादून, हरिद्वार और पौड़ी में भारी बारिश की आशंका बताई गई है।

पहाड़ों में भूस्खलन का खतरा बढ़ा

उत्तराखंड में भारी बारिश का सबसे बड़ा असर पर्वतीय क्षेत्रों में देखने को मिलता है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ों की ढलानों पर मिट्टी कमजोर हो जाती है। इसके बाद तेज बारिश होने पर भूस्खलन की घटनाएं सामने आ सकती हैं।

भूस्खलन के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग और ग्रामीण सड़कें बंद हो सकती हैं। कई बार मलबा सड़क पर जमा होने से घंटों यातायात प्रभावित रहता है। बारिश के दौरान पहाड़ी रास्तों पर वाहन चलाना भी जोखिम भरा हो जाता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के दौरान यात्रियों को ऐसे स्थानों पर वाहन रोकने से बचना चाहिए जहां पहाड़ी से पत्थर गिरने की आशंका हो। नदी और बरसाती नालों के किनारे भी अनावश्यक रूप से जाने से बचना जरूरी है।

नदी-नालों के बढ़ते जलस्तर पर नजर

भारी बारिश के दौरान उत्तराखंड की नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। सामान्य दिखने वाले छोटे नाले भी कुछ ही समय में तेज बहाव वाले जलस्रोत में बदल सकते हैं। यही वजह है कि प्रशासन की ओर से लोगों को नदी और नालों से दूर रहने की सलाह दी जाती है।

देहरादून, हरिद्वार और अन्य मैदानी क्षेत्रों में भी तेज बारिश होने पर जलभराव की समस्या सामने आ सकती है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को मौसम की स्थिति पर नजर रखने की जरूरत है।

आकाशीय बिजली को लेकर भी चेतावनी

इस बार बारिश के साथ आकाशीय बिजली का खतरा भी महत्वपूर्ण है। IMD ने उत्तराखंड में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और तीव्र बारिश के दौर की संभावना जताई है।ऐसे मौसम में लोगों को खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों और जलस्रोतों के पास खड़े होने से बचना चाहिए। पहाड़ी इलाकों में खेतों या जंगलों में काम कर रहे लोगों के लिए विशेष सावधानी जरूरी है।

बिजली चमकने और गरज सुनाई देने की स्थिति में सुरक्षित इमारत के अंदर जाना सबसे बेहतर उपाय माना जाता है।

पर्यटन और यात्रा पर भी असर

सितंबर में उत्तराखंड के कई पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। चारधाम यात्रा और अन्य धार्मिक एवं पर्यटन गतिविधियों के कारण पर्वतीय सड़कों पर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। ऐसे में बारिश के दौरान सड़क की स्थिति को लेकर अतिरिक्त सतर्कता जरूरी है।

भारी बारिश की चेतावनी के बीच यात्रियों को यात्रा शुरू करने से पहले संबंधित मार्ग की स्थिति और स्थानीय प्रशासन की सलाह की जानकारी लेनी चाहिए। पहाड़ों में मौसम तेजी से बदल सकता है और कुछ ही घंटों में सड़क की स्थिति खराब हो सकती है।

अगले कई दिनों तक जारी रह सकता है बारिश का दौर

IMD के राज्य पूर्वानुमान में 4 से 8 सितंबर तक अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना जताई गई है। इसके साथ ही गरज-चमक और तीव्र बारिश के दौर की चेतावनी भी जारी है।

इससे साफ है कि राज्य को फिलहाल मानसून से राहत मिलने के आसार सीमित हैं। प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाने, सड़क खोलने वाली मशीनरी तैयार रखने और आपदा राहत दलों को अलर्ट रखने की जरूरत है।

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प्रशासन के सामने चुनौती

लगातार बारिश के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सड़क संपर्क को बनाए रखना और संवेदनशील इलाकों में जनहानि रोकना होती है। जिला प्रशासन, पुलिस, लोक निर्माण विभाग और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को आपसी समन्वय के साथ काम करना पड़ता है।

यदि किसी सड़क पर भूस्खलन या मलबा आता है तो उसे तुरंत साफ करने के साथ यह भी सुनिश्चित करना जरूरी होता है कि दोबारा पत्थर या मलबा गिरने का खतरा तो नहीं है। इसी तरह नदी के जलस्तर में अचानक वृद्धि की स्थिति में आसपास के लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना महत्वपूर्ण है।

निष्कर्ष

उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता एक बार फिर बढ़ गई है और राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 4 सितंबर को नैनीताल, चंपावत, देहरादून, हरिद्वार और बागेश्वर सहित कई क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना है, जबकि राज्यभर में गरज-चमक और तीव्र बारिश के दौर का खतरा बना हुआ है।

पर्वतीय क्षेत्रों में इसका सबसे बड़ा खतरा भूस्खलन, मलबा आने और सड़क संपर्क बाधित होने के रूप में सामने आ सकता है। वहीं मैदानी इलाकों में जलभराव और तेज बहाव वाली नदियों-नालों से परेशानी बढ़ सकती है।

मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में भी बारिश जारी रहने का अनुमान जताया है। ऐसे में प्रशासन की तैयारियों के साथ आम लोगों की सतर्कता भी बेहद महत्वपूर्ण है। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मौसम खराब होने पर अनावश्यक यात्रा से बचना और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना ही सुरक्षित रहने का सबसे बेहतर तरीका है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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