UTTARAKHAND STF: उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स और कुमाऊं साइबर क्राइम पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर ठगी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस गिरोह के छह सदस्य गिरफ्तार किए गए हैं। इनके पास से लैपटॉप, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंक खातों के दस्तावेज, बारकोड स्कैनर, एटीएम कार्ड और चेकबुक सहित बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई है। गिरोह नैनीताल जिले के काठगोदाम थाना क्षेत्र में सुनसान इलाके में किराए के मकान में रहकर ठगी को अंजाम दे रहा था।

UTTARAKHAND STF: नकली वेबसाइट्स और गेमिंग साइट्स से ठगी
UTTARAKHAND STF की कुमाऊं यूनिट और साइबर क्राइम पुलिस को मिली थी। सूचना के आधार पर टीम ने जब जांच शुरू की, तो पता चला कि ग्राम बासुली अमृतपुर में एक निर्माणाधीन होमस्टे के दो कमरों में कुछ युवक इंटरनेट के जरिए लोगों को ठगने का काम कर रहे हैं। गिरोह का नेटवर्क देशभर में फैला था, जिसमें व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स के जरिए फर्जी सिम कार्ड, बैंक अकाउंट और बारकोड स्कैनर का लेनदेन होता था। ये लोग नकली वेबसाइट्स और गेमिंग साइट्स जैसे TOOFAN777, TOOFAN247, ALLPANELEXCH.COM, और MY99EXCH.COM के जरिए लोगों को इन्वेस्टमेंट के नाम पर फंसा कर ठगते थे।
STF को मिली जानकारी के अनुसार ये आरोपी टेक्नोलॉजी का बखूबी इस्तेमाल कर साइबर क्राइम को अंजाम दे रहे थे। उन्होंने फर्जी पहचान के जरिए अलग-अलग राज्यों में बैंक अकाउंट खुलवाए, फर्जी सिम कार्ड एक्टिव करवाए और फिर इन अकाउंट्स को ठगी के पैसों को ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल किया। गिरोह के प्रमुख संचालक सचिन मित्तल और प्रियांशु शर्मा थे, जो अलग-अलग स्थानों से इस नेटवर्क को चला रहे थे।

गिरफ्तार अभियुक्तों में जतिन पांडे (21 वर्ष, अमृतपुर), कमल किशोर (20 वर्ष, मुक्तेश्वर), हर्ष बोरा (19 वर्ष, काठगोदाम), कौशल किशोर उर्फ आशीष ठाकुर (25 वर्ष, कन्नौज, यूपी), प्रेम कुमार (20 वर्ष, खीरी, यूपी), और करन केवट (22 वर्ष, देवरिया, यूपी) शामिल हैं। इनके खिलाफ थाना काठगोदाम में बीएनएस 2023 की धारा 318(4), 61(2), 3(5) और आईटी एक्ट की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि इस सेंटर को जतिन पांडे संचालित कर रहा था, जिसे साइबर अपराध के मास्टरमाइंड सचिन मित्तल ने मार्च 2025 में टेलीग्राम के जरिए जोड़ा था। अप्रैल में सचिन और प्रियांशु शर्मा ने हल्द्वानी आकर जतिन समेत अन्य युवकों को इस नेटवर्क में शामिल किया और उन्हें साइबर ठगी का प्रशिक्षण दिया। इस गिरोह ने विक्की जोशी के निर्माणाधीन होमस्टे के दो कमरों को किराए पर लेकर अपना साइबर ठगी सेंटर बनाया था, जिसमें आवश्यक सुविधाएं जैसे बेड, कुर्सी, गद्दा, इनवर्टर, कूलर आदि दी गई थीं। गिरोह के सदस्यों को हर महीने 20 से 25 हजार रुपये तक का भुगतान किया जाता था।

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