Uttarakhand Recruitment Scam: हम सही तुम गलत, ठहराने में तुले भाजपा और कांग्रेसी

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देहरादून ब्यूरो- Uttarakhand Recruitment Scam की बात करें तो यहां भर्ती परीक्षाओं लेकर नियुक्ति प्रक्रिया और प्रतिनियुक्ति में हो रहे खेल से अब कोई भी उत्तराखंडी अनजान नहीं है। विधानसभा में नियुक्तियों (Uttarakhand Recruitment Scam) के नाम पर अपने चहेतों को नियुक्ति देने पर तो साफ हो गया है कि उत्तराखंड बनने का सुख तो केवल और केवल नेता और अफसर की भोग रहे हैं।

बेचारी जनता तो आज भी वैसे ही है जैसे पहले थी। अब जैसे ही उत्तराखंड में नियुक्तियों को लेकर भाजपा और कांग्रेस के चेहरे सब का सामने बेनकाब हो रहे हैं तो साफ दिख रहा है कि भाजपा कह रही है कि हम सही हैं और कांग्रेस गलत। वहीं कांग्रेस भी यह बताने के कोशिश कर रही है कि हमने जो किया वो ठीक तो लेकिन जो भाजपा कर रही है वो जनता विरोधी है।

Uttarakhand Recruitment Scam

Uttarakhand Recruitment Scam: कोई भी पाक-साफ नहीं

उत्तराखंड का इतिहास उठाकर देखें तो यहां जिसको मौका मिला उसी ने उत्तराखंड को ठगने का काम किया। इस काजल की कोठरी से कोई भी एक नाम नहीं जो बेदाग यहां से निकला हो। कभी राजशाही ने लूटा तो कभी नौकरशाही ने। यहां तो आंदोलनों से उभरे नेता भी सब भूलकर अपने हित साधने में लगे हुए हैं। नजर उठा कर देखा जाये तो आज किसे ये कहा जाये कि वह जनता का नेता है और सिर्फ जनता के लिए सोचता है तो ये बेमानी ही होगी। सभी को उत्तराखंड की जनता ने अजमा कर देख लिया। यही Uttarakhand Recruitment Scam में भी देखने को मिल रहा है।

Uttarakhand Recruitment Scam: एक दूसरे पर कर रहे सवाल खड़े

Uttarakhand Recruitment Scam में एक UKSSSC Paper Leak मामले में STF की जांच के बाद उत्तराखंड में सरकारी नौकरियों में भर्ती प्रक्रिया (Uttarakhand  Recruitment Scam) को लेकर सवाल तो उठ ही रहे हैं। लेकिन अब सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बना हुआ है उत्तराखंड विधानसभा में नियुक्तियों (Vidhansabha Recruitment Scam) का मामला।

उत्तराखंड विधानसभा में पहले विधानसभा अध्यक्ष से लेकर जो भी विधानसभा अध्यक्ष रहा उसे विधानसभा में नियुक्ति के लिए केवल वो ही दिखे जो उनके चहेते थे या फिर उनके पार्टी के बड़े नेताओं के चहेते थे। प्रेमचंद अग्रवाल के विधानसभा अध्यक्ष रहते हुए एक लिस्ट बाहर आती है जिसमें गैरसैंण विधानसभा को लेकर नियुक्ति की गई। 70 लोगों की गैरसैंण के नाम पर नियुक्ति दी गई लेकिन सवाल खड़े हो रहे हैं कि इनमें कितने गैरसैंण में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। प्रेमचंद अग्रवाल जी ही बता दें कि कितने घंटे का सत्र उन्होंने गैरसैंण विधानसभा में आयोजित किया। लेकिन उन्होंने तो साफ कह दिया कि नियुक्ति बिल्कुल सही हैं साथ ही उन्होंने ये भी माना कि उन्होंने करीबियों को नौकरी दी।

अब प्रेमचंद अग्रवाल पर उठते हुए सवालों के बाद अचानक एक लिस्ट और आई जिसमें गोविंद सिंह कुंजवाल  के कार्यकाल में विधानसभा में हुई नियुक्तियों पर सवाल खड़े हुए। अब गोविंद सिंह कुंजवाल ने भी इन नियुक्तियों को सही ठहराया लेकिन ये भी माना कि उन्होंने अपनी बेटे और बहू को नियुक्ति दी है। अब यहां खेल शुरू हुआ एक दूसरे को गलत और खुद को सही ठहराने का। दोनों पार्टियों के बड़े नेता इस के लिए बचाव में उतर गये।

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हरीश रावत कर गोविंद सिंह कुंजवाल का बचाव

कांग्रेस में गोविंद सिंह कुंजवाल का बचाव करने के लिए मैदान में उतरे हरीश रावत। उन्होंने तो बचाव करना ही था, उनके मुख्यमंत्री के कार्यकाल में भी गोविंद सिंह कुंजवाल विधानसभा अध्यक्ष थे और ये नियुक्तियां तभी हुई थी। हरीश रावत ने कहा तब गैरसैंण सचिवालय में कर्मचारियों की जरूरत को देखते हुए नियुक्ति की गई। साथ ही उन्होंने कहा कि गोविंद सिंह कुंजवाल के समय हुई नियुक्तियों में कानूनी बल है लेकिन नैतिक बल नहीं। उन्होंने सवाल खड़े करते हुए कहा कि कुंजवाल के समय तो प्रदेश के लोगों को नियुक्ति दी गई लेकिन अग्रवाल के समय तो बाहरी लोगों को नियुक्ति दी गई।

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भट्ट ने कहा कांग्रेस ही घपले और घोटाले की जनक

भाजपा से खुद अब भाजपा के नव नियुक्त प्रदेश अध्यक्ष ने कमान संभाल ली है। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने विधानसभा में हुई नियुक्तियों पर जांच की बात को लेकर गेंद वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी के पाले में डाल दी है। ऐसे में 2024 लोकसभा चुनावों को जीताने का दंभ भरने वाले महेंद्र भट्ट को कमान संभालनी ही थी। उन्होंने तो वो ही कहा जो हर भाजपाई कहता है।

महेंद्र भट्ट ने हरीश रावत को जवाब देते हुए कहा कि उत्तराखंड में घपले और घोटालों (Uttarakhand  Recruitment Scam) की जनक तो कांग्रेस ही रही है, भाजपा तो इस भाव से कार्य कर रही है कि गड़बड़ी जहां और जिस समय हुई हो उसकी जांच होनी चाहिए। महेंद्र भट्ट ने अपनी सरकार की पीठ थपथपाई तो साथ ही गोविंद सिंह कुंजवाल के समय विधानसभा में हुई नियुक्तियों को गलत ठहराया। कुंजवाल पर अपने चहेतों को नौकरी देने का आरोप लगाया।

Uttarakhand Recruitment Scam: कहीं मुद्दा भटकाने के लिए तो नहीं हो रहा ये सब?

Uttarakhand Recruitment Scam में उत्तराखंड में नियुक्तियों के नाम पर उठे इस विवाद से एक बात तो साफ है कि यहां ठगा जा रहा है तो बस बेरोजगार युवा। दोनों ही पार्टियां राजनीति की रोटियां सेक रही हैं और कुछ नहीं। जब दोनों के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों (Uttarakhand Recruitment Scam) पर सवाल खड़े हो रहे हैं और अब तक एसटीएफ द्वारा गिरफ्तार हुए आरोपियों से ये भी लग रहा है कि सराकरों ने ही नकल माफिया को जन्म दिया है।

जांच की आंच किसी सफेदपोश या किसी नौकरशाह पर न आये तो, ये एक परपंच भी लगता है कि एक दूसरे पर सवाल खड़े कर जनता का ध्यान भटकाया जाये। अगर सच में भाजपा कांग्रेस की मंशा सही होती तो अब तक हुए घोटालों में कोई तो कार्रवाई होती। उत्तराखंड के इतिहास में कोई नेता किसी घोटाले का आरोपी नहीं बना जेल जाना तो दूर की बात है। बड़े से बड़ा घोटाले में दोनों पार्टियों ने एक दूसरे को बचाने का काम किया है। नौकरशाहों को भी बचाने का काम इन दोनों पार्टियों ने किया है।

अब आगे उत्तराखंड की राजनीति क्या रंग लाती है ये तो आने वाला वक्त ही बतायेगा, लेकिन साफ है कि यहां राजनीति सिर्फ और सिर्फ अपने हित की है जनता के हित की नहीं।

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