/ Jan 29, 2026
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UTTARAKHAND HOUSING POLICY: देहरादून में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के दिशा-निर्देशों के अनुरूप राज्य में आवास एवं शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए कवायद तेज कर दी गई है। इसी क्रम में सचिव-आवास और उत्तराखंड आवास एवं शहरी विकास प्राधिकरण (UHUDA) के मुख्य प्रशासक डॉ. आर. राजेश कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक के दौरान राज्य की शहरी विकास चुनौतियों और गरीब वर्ग के लिए आवास उपलब्धता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई और अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए गए।

बैठक में डॉ. आर. राजेश कुमार ने स्पष्ट किया कि राज्य के लिए एक नई आवास नीति तैयार करना अब अनिवार्य हो गया है। वर्ष 2017 में लागू की गई उत्तराखंड आवास नीति की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है, जिसके चलते वर्तमान जरूरतों के अनुसार नए प्रावधानों की आवश्यकता है। सचिव आवास ने निर्देश दिए कि आगामी नीति में किफायती आवास (Affordable Housing), बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियों और विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों को ध्यान में रखा जाए। नई नीति का मुख्य केंद्र बिंदु सतत विकास और पर्यावरण संतुलन के साथ शहरी विस्तार को बढ़ावा देना होगा।

सचिव आवास ने प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के चरण 1.0 और 2.0 की विस्तार से समीक्षा की। उन्होंने निर्माणाधीन आवासों, उनकी स्वीकृति और आवंटन की वर्तमान स्थिति पर चर्चा करते हुए अधिकारियों को समय-सीमा का पालन करने के निर्देश दिए। विशेष रूप से देहरादून-मसूरी विकास प्राधिकरण (MDDA) की परियोजनाओं में लॉटरी और आवंटन की प्रक्रिया को तत्काल पूरा करने को कहा गया है। वहीं, हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण (HRDA) को अपने लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता पर रखने के निर्देश दिए गए।

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बैठक में यह निर्णय लिया गया कि प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 के तहत सभी कार्यों को सितंबर 2026 की निर्धारित समय-सीमा तक अनिवार्य रूप से पूरा कर लिया जाए। आवंटन प्रक्रिया को गति देने के लिए सचिव ने अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर सभी आवश्यक औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए हैं, ताकि लाभार्थियों को समय पर उनके घर मिल सकें।

राज्य के संवेदनशील क्षेत्रों और तीर्थस्थलों की सुरक्षा के लिए बैठक में ‘कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी’ के ड्राफ्ट आरपीएफ (RFP) पर भी विस्तृत चर्चा हुई। सचिव आवास ने इसे राज्य के प्रमुख नगरों, चारधाम क्षेत्रों और अन्य संवेदनशील पर्वतीय इलाकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में विकास कार्य करते समय वहां की पर्यावरणीय वहन क्षमता का अध्ययन करना आवश्यक है, जिससे प्राकृतिक संतुलन बना रहे। इस अध्ययन को प्राथमिकता के आधार पर लागू करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि भविष्य के निर्माण कार्यों को वैज्ञानिक आधार मिल सके।

बैठक के समापन पर सचिव ने आगामी बैठक के लिए एजेंडा भी तय किया। इसमें पीएमयू टीम के परिचय के साथ-साथ शासन को प्रस्तुत विभिन्न ड्राफ्ट नीतियों और प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की जाएगी। उन्होंने UHUDA से संबंधित सभी नियमों, उपविधियों और नीतियों के दस्तावेज भी संदर्भ के लिए मांगे हैं।(UTTARAKHAND HOUSING POLICY)

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