HomeLatest NewsUTTARAKHAND FOREST FIRE की रोकथाम के लिए 'एक्शन प्लान', बनेगा प्रिडिक्शन मॉडल!

UTTARAKHAND FOREST FIRE की रोकथाम के लिए ‘एक्शन प्लान’, बनेगा प्रिडिक्शन मॉडल!

UTTARAKHAND FOREST FIRE की रोकथाम को लेकर आज मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सचिवालय में संबंधित विभागों के साथ बैठक कर महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि वनाग्नि से संबंधित सभी समितियों एवं स्टेकहोल्डर्स के साथ सभी आवश्यक बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित कर सभी व्यवस्थाएं, फायर सीजन से पहले सुनिश्चित करवा ली जाएं।

उन्होंने प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर लगे फायर हाइड्रेंट्स के लिए डेडिकेटेड प्रेशर पाइपलाइन व्यवस्था सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए पेयजल विभाग को शीघ्र प्रस्ताव तैयार करने को कहा गया है।

UTTARAKHAND FOREST FIRE के लिए बनेगा प्रिडिक्शन मॉडल!

मुख्य सचिव ने वन विभाग को ड्राइव चला कर सभी प्रकार की वनाग्नि की रोकथाम से संबंधित व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि वाहनों एवं उपकरणों का रखरखाव सुनिश्चित कर लिया जाए। उन्होंने प्रदेश के सभी लीसा डिपो में प्रोटोकॉल के अनुसार सुरक्षा व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित किए जाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्य सचिव ने वन, मौसम एवं वन सर्वेक्षण संस्थान को फॉरेस्ट फायर के लिए भी आपदा की तर्ज पर प्रिडिक्शन मॉडल तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इससे फॉरेस्ट फायर की संभावनाओं का पहले से अनुमान लगाया जा सकेगा, जिससे जानमाल के नुकसान को रोकने और कम करने में सहायता मिलेगी।

UTTARAKHAND FOREST FIRE
UTTARAKHAND FOREST FIRE PREVENTION LATEST MEETING 2026

पिरुल ब्रिकेट को ईंधन का विकल्प बनाया जाए

मुख्य सचिव ने जंगलों से पिरूल के निस्तारण और पिरुल ब्रिकेट के उत्पादन को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिरुल ब्रिकेट को ईंधन के विकल्प के तौर पर स्थापित करने के लिए प्रदेश में अधिक से अधिक यूनिट लगाने पर ज़ोर दिया जाए। इससे जहां एक ओर वनाग्नि को रोकने में सहायता मिलेगी वहीं दूसरी ओर वैकल्पिक ईंधन की उपलब्धता बढ़ेगी।

उन्होंने कहा कि इससे स्वयं सहायता समूहों की आर्थिकी को भी सुधारने में मदद मिलेगी, साथ ही इसे कार्बन क्रेडिट से भी जोड़ा जा सकता है। इस अवसर पर सचिव दिलीप जावलकर, डॉ. पंकज कुमार पाण्डेय, सीसीएफ  सुशांत कुमार पटनायक, डॉ. पराग मधुकर धकाते, सी. रविशंकर, विनोद कुमार सुमन एवं रणवीर सिंह चौहान सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं जनपदों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जिलाधिकारी उपस्थित थे।

UTTARAKHAND FOREST FIRE एक गंभीर समस्या है

उत्तराखंड में हर वर्ष गर्मियों के दौरान जंगलों में लगने वाली आग एक गंभीर समस्या के रूप में सामने आती है और इस बार हालात और भी अलग रहे क्योंकि आग का सीजन सामान्य से काफी पहले शुरू हो गया। आमतौर पर UTTARAKHAND FOREST FIRE का आधिकारिक समय 15 फरवरी से 15 जून के बीच माना जाता है, लेकिन वर्ष 2025-26 में यह पैटर्न बदलता हुआ दिखाई दिया। उत्तराखंड वन विभाग के आधिकारिक आंकड़ों पर नजर डालें तो-

  • 1 नवंबर 2025 से 15 अप्रैल 2026 के बीच राज्य में कुल 164 वनाग्नि की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनसे करीब 98.61 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ।
  • सर्दियों में नवंबर 2025 से लेकर 14 फरवरी 2026 तक कुल 61 घटनाएं सामने आईं, जिनमें 41.66 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। इस दौरान गढ़वाल क्षेत्र में 20 घटनाएं, प्रशासनिक और वन्यजीव क्षेत्रों में 41 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि कुमाऊं क्षेत्र में एक भी घटना नहीं हुई।
  • इसके बाद 15 फरवरी से 15 अप्रैल 2026 के बीच 103 घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें 56.95 हेक्टेयर वन क्षेत्र जलकर खाक हो गया। इस चरण में गढ़वाल सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 86 घटनाएं दर्ज हुईं, जबकि कुमाऊं में सिर्फ 1 और वन्यजीव क्षेत्रों में 16 घटनाएं सामने आईं।

READ MORE:

चमोली जिले के नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व और वेली ऑफ फ्लावर्स की आग

जनवरी 2026 की शुरुआत में चमोली जिले के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व और वेली ऑफ फ्लावर्स के आसपास भीषण आग भड़क उठी। यह आग करीब 5 से 6 दिनों तक जारी रही और 3500 से 4200 मीटर की ऊंचाई तक फैल गई। दुर्गम भौगोलिक स्थिति के कारण जमीन के रास्ते आग तक पहुंचना संभव नहीं था, जिसके चलते प्रशासन को भारतीय वायुसेना की मदद लेनी पड़ी। वायुसेना के Mi-17 V5 हेलीकॉप्टर के जरिए पानी की बौछार कर 14 जनवरी तक आग पर काबू पाया गया।

डरावने हैं UTTARAKHAND FOREST FIRE के आंकड़ें

वन सर्वेक्षण ऑफ इंडिया (FSI) के सैटेलाइट आंकड़ों ने भी स्थिति की गंभीरता को और बढ़ा दिया है।

  • दिसंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच 186 बड़े वनाग्नि अलर्ट प्राप्त हुए।
  • अप्रैल 2026 में भी कई सक्रिय UTTARAKHAND FOREST FIRE की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनमें पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट रेंज (13-15 अप्रैल), पौड़ी गढ़वाल के पोखरा रेंज (15 अप्रैल) और टिहरी गढ़वाल के पौखल रेंज (15 अप्रैल) शामिल हैं।
  • जिलों की बात करें तो उत्तरकाशी (48 घटनाएं), चमोली (38) और टिहरी गढ़वाल (35) सबसे ज्यादा प्रभावित रहे।
UTTARAKHAND FOREST FIRE
UTTARAKHAND FOREST FIRE

UTTARAKHAND FOREST FIRE के प्रमुख कारण

  • जलवायु परिवर्तन और मौसम में बदलाव के चलते वर्षा और बर्फबारी में कमी आई है, जिससे सर्दियां सूखी हो गई हैं। पश्चिमी विक्षोभ की कमजोर सक्रियता ने भी नमी घटा दी है। चीड़ (पाइन) के जंगल सबसे अधिक संवेदनशील हैं, क्योंकि इनमें पाई जाने वाली सूखी पत्तियां यानी पिरूल अत्यधिक ज्वलनशील होती हैं।
  • UTTARAKHAND FOREST FIRE के लिए मानवीय कारण भी उतने ही जिम्मेदार हैं, जैसे घास उगाने के लिए जानबूझकर आग लगाना, कैंपफायर, सिगरेट, कृषि अवशेष जलाना और पर्यटकों की लापरवाही। कई बार आग गैर-वन क्षेत्रों से शुरू होकर जंगलों तक पहुंच जाती है। इसके अलावा जंगलों में सूखी घास, पत्तियां और पिरूल का जमा होना भी आग को तेजी से फैलाता है।

देश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज

WhatsApp Group
Join Now
DevbhoomiNews Desk
DevbhoomiNews Desk
Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
RELATED ARTICLES

Most Popular