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टियर-II और टियर-III शहरों की लगेगी लॉटरी!, जानें क्या है सरकार का URBAN CHALLENGE FUND फॉर्मूला?

URBAN CHALLENGE FUND: आज नई दिल्ली में केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अर्बन चैलेंज फंड (UCF) के संचालन संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए। इसके साथ ही क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम (CRGSS) की भी शुरुआत की गई। यह पहल देश में शहरी बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण को नई दिशा देने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।

URBAN CHALLENGE FUND से टियर-II और टियर-III शहरों की लगेगी लॉटरी!

इस URBAN CHALLENGE FUND का साइज ₹1 लाख करोड़ आंका जा रहा है, इस के माध्यम से लगभग ₹4 लाख करोड़ के शहरी निवेश को गति देने का लक्ष्य रखा गया है। टियर-2 और टियर-3 शहरों पर इस योजना में विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि छोटे शहर भी विकास की मुख्यधारा में तेजी से आगे बढ़ सकें।

इस अवसर पर मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि अर्बन चैलेंज फंड भारत के शहरी विकास के दृष्टिकोण में एक बड़ा बदलाव लेकर आएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल अनुदान देने की योजना नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सरकारी धन का उपयोग कर बड़े पैमाने पर निवेश को आकर्षित करना और शहरों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत के शहर अब आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार के प्रमुख केंद्र बनते जा रहे हैं। “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने में शहरों की योजना, वित्तीय मजबूती और सुशासन की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। उन्होंने बताया कि अमृत योजना, स्वच्छ भारत मिशन और स्मार्ट सिटी मिशन जैसी पहलों ने शहरी ढांचे को मजबूत किया है, लेकिन अब अगला चरण शहरों को निवेश के लिए तैयार और आत्मनिर्भर बनाने का है।

URBAN CHALLENGE FUND
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छोटे शहरों, पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों को मिलेगी मदद

प्राप्त जानकारी के अनुसार URBAN CHALLENGE FUND के तहत केंद्र सरकार परियोजना लागत का अधिकतम 25% तक ही सहयोग देगी, जबकि कम से कम 50% फंडिंग म्युनिसिपल बॉन्ड, बैंक ऋण और पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) के माध्यम से जुटाई जाएगी। इससे वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित होगा और निजी क्षेत्र की भागीदारी भी बढ़ेगी।

कुल ₹1 लाख करोड़ के आवंटन में से ₹90,000 करोड़ परियोजनाओं के लिए, ₹5,000 करोड़ परियोजना तैयारी और क्षमता निर्माण के लिए, तथा ₹5,000 करोड़ क्रेडिट रिपेमेंट गारंटी सब-स्कीम के लिए निर्धारित किए गए हैं। यह सब-स्कीम खासतौर पर छोटे शहरों, पहाड़ी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्रों को बाजार आधारित वित्तीय संसाधन प्राप्त करने में मदद करेगी।

URBAN CHALLENGE FUND पुराने शहर क्षेत्रों और बाजारों के पुनर्विकास, शहरी परिवहन और अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी, गैर-मोटर चालित परिवहन, जल आपूर्ति और स्वच्छता, तथा जलवायु अनुकूल शहरी विकास जैसे क्षेत्रों में परिवर्तनकारी परियोजनाओं को समर्थन देगा।

स्थानीय निकायों (ULBs) की भूमिका पर जोर

मंत्री ने शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि शहरों को अपनी वित्तीय क्षमता मजबूत करनी होगी, सुधारों को अपनाना होगा और बाजार आधारित वित्तीय तंत्र में सक्रिय भागीदारी करनी होगी। उन्होंने राज्यों और नगर निकायों से अपील की कि URBAN CHALLENGE FUND को केवल एक योजना नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर के मजबूत और निवेश योग्य शहर बनाने के अवसर के रूप में देखें।

इस अवसर पर आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव श्रीनिवास कातिकिथला ने कहा कि भारत का शहरीकरण अब एक निर्णायक चरण में प्रवेश कर चुका है। URBAN CHALLENGE FUND एक ऐसा ढांचा प्रस्तुत करता है जो बाजार आधारित, सुधार केंद्रित और परिणामोन्मुखी विकास को बढ़ावा देता है।

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कार्यक्रम के दौरान एक ई-डायरेक्टरी भी लॉन्च की गई, जो शहरों को वित्तीय संस्थानों, बैंकों और क्रेडिट रेटिंग एजेंसियों से जोड़ने में मदद करेगी। साथ ही, मंत्रालय और सभी राज्यों के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर डिजिटल हस्ताक्षर किए गए, जिससे इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता को मजबूत किया गया।

URBAN CHALLENGE FUND 2025-26 से 2030-31 तक लागू किया जाएगा

इसके अलावा, विभिन्न हितधारकों जैसे शैक्षणिक और शोध संस्थान, वित्तीय संस्थान, एनबीएफसी, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाएं, क्रेडिट रेटिंग एजेंसियां और निजी क्षेत्र की कंपनियां के साथ लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) भी डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित किए गए। अर्बन चैलेंज फंड को वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक लागू किया जाएगा, जिसका उद्देश्य भारत के शहरों को नए विकास केंद्रों में बदलना और उन्हें देश के भविष्य के शहरी इंजन के रूप में स्थापित करना है।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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