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UTTARAKHAND MAHILA CONGRESS PROTEST: निजी स्कूलों की मनमानी पर ‘हल्ला बोल’, शिक्षा मंत्री का आवास घेराव

UTTARAKHAND MAHILA CONGRESS PROTEST: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आज शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत के सरकारी आवास के बाहर भारी राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिली। उत्तराखंड महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला के नेतृत्व में महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शिक्षा मंत्री  धन सिंह रावत के सरकारी आवास का घेराव किया।

कांग्रेस का आरोप है कि प्रदेश में निजी स्कूल शिक्षा के नाम पर ‘लूट’ मचा रहे हैं और सरकार मूकदर्शक बनी हुई है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने सरकार विरोधी नारेबाजी की और अभिभावकों पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर गहरी चिंता जताई।

UTTARAKHAND MAHILA CONGRESS PROTEST पर पुलिस की कार्यवाई

पुलिस ने शिक्षा मंत्री के आवास से पहले ही UTTARAKHAND MAHILA CONGRESS PROTEST को रोक दिया। इस प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत का प्रतीकात्मक रूप में एक व्यक्ति को सामने बैठा कर उनसे स्कूल फीस और अन्य मुद्दों पर सवाल पूछे गए। उत्तराखंड में निजी स्कूलों की फीस वृद्धि लंबे समय से विवाद का विषय बना हुआ है। अभिभावक अक्सर शिकायत करते हैं, कि हर साल बिना उचित कारण के फीस बढ़ाई जाती है, जबकि सरकार पर्याप्त नियंत्रण नहीं रख पाती।

महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने सोशल मीडिया पर लिखा- भाजपा सरकार के राज में शिक्षा का व्यवसायीकरण हो गया है। दिल्ली में NCERT की जो किताब ₹65 की है वही देहरादून में ₹118 की मिल रही है। अभिभावकों से 3 महीने की फीस एक साथ ही ले ली जा रही है। आज इसी के खिलाफ राज्य के शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर महिला कांग्रेस की साथियों संग विरोध प्रदर्शन किया। अगर सरकार ने इस प्रायोजित लूट को बंद नहीं किया तो आगे और बड़ा प्रदर्शन होगा।

UTTARAKHAND MAHILA CONGRESS PROTEST
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स्कूलों में मनमानी फीस का मुद्दा गरम

देहरादून में जिस मुद्दे को लेकर UTTARAKHAND MAHILA CONGRESS PROTEST कर रही है, उसकी जड़े बहुत गहरी दिखती है। देहरादून में बड़ी संख्या में निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं, जो खासतौर पर मध्यमवर्गीय परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने का दावा करते हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इन स्कूलों की फीस संरचना को लेकर लगातार विवाद गहराता जा रहा है। मनमाने तरीके से फीस बढ़ाना, अलग-अलग नामों से अतिरिक्त शुल्क वसूलना और किताब-कॉपी जैसी सामग्री को तय दुकानों से ही खरीदने का दबाव ये सभी मुद्दे अभिभावकों के बीच असंतोष का कारण बने हुए हैं।

नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 की शुरुआत के साथ ही यह समस्या और गंभीर हो गई है। अभिभावक बढ़ते आर्थिक बोझ से परेशान हैं, वहीं जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग ने भी इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कई स्कूलों को नोटिस जारी किए हैं। कुछ मामलों में फीस बढ़ोतरी पर रोक लगाने के साथ लाइसेंस रद्द करने तक की चेतावनी दी गई है।

आज हुए UTTARAKHAND MAHILA CONGRESS PROTEST ने भी इस मामले को हाईलाइट किया है, उत्तराखंड में अभी तक निजी स्कूलों की फीस तय करने या उसकी वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए कोई अलग कानून लागू नहीं है। इसके विपरीत उत्तर प्रदेश में फीस रेगुलेशन एक्ट 2018 के तहत सालाना फीस वृद्धि की अधिकतम सीमा तय की गई है। शिक्षा विभाग ने आरटीआई के जवाब में स्पष्ट किया है कि स्कूल केवल अपने संचालन खर्च के लिए ही फीस ले सकते हैं, न कि मुनाफा कमाने या संपत्ति बढ़ाने के उद्देश्य से।

UTTARAKHAND MAHILA CONGRESS PROTEST
UTTARAKHAND MAHILA CONGRESS PROTEST

सितंबर 2025 में इस मुद्दे को लेकर एक जनहित याचिका उत्तराखंड हाईकोर्ट में दाखिल की गई थी, जिसमें कैपिटेशन फीस और ट्रांसपोर्ट चार्ज में असमानता जैसी शिकायतें उठाई गईं। कोर्ट ने इस पर राज्य सरकार से जवाब मांगा और याचिकाकर्ता को अखबारों के जरिए स्कूलों को नोटिस देने के निर्देश भी दिए। हालांकि मामला अभी विचाराधीन है, लेकिन जमीनी स्तर पर अपेक्षित सुधार देखने को नहीं मिला है। (UTTARAKHAND MAHILA CONGRESS PROTEST)

अभिभावकों का कहना है कि शिक्षा अब सेवा से ज्यादा व्यवसाय बनती जा रही है। महंगाई का हवाला देकर विकास शुल्क, स्मार्ट क्लास, जनरेटर जैसे कई चार्ज वसूले जा रहे हैं, जबकि सुविधाएं हमेशा संतोषजनक नहीं होतीं। Right to Education Act के तहत 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित होने के बावजूद फीस बढ़ोतरी का असर आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों पर भी पड़ रहा है।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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