UTTARAKHAND DISASTER MANAGEMENT: उत्तराखंड सचिवालय में राज्य की आपदा प्रबंधन और शमन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन की अध्यक्षता में राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठक हुई, जिसमें स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फंड (SDRF) और स्टेट डिजास्टर मिटिगेशन फंड (SDMF) के अंतर्गत प्राप्त विभिन्न प्रस्तावों पर विस्तार से चर्चा की गई। मुख्य सचिव ने बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आपदा राहत और बचाव कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कार्यों की गुणवत्ता के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए।

कार्यों की प्रगति और गुणवत्ता की होगी सख्त निगरानी
मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिया कि फंड जारी होने के बाद कार्यों की भौतिक प्रगति की लगातार समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने आपदा प्रबंधन विभाग को निर्देश दिया कि वे स्वीकृत प्रस्तावों के लिए जारी किए जाने वाले फंड और उसके सापेक्ष धरातल पर हुए कार्य की भौतिक प्रगति का नियमित मिलान और समीक्षा करें। उन्होंने निर्देश दिए कि संबंधित विभागों से अब एमसीआर फॉर्मेट (MCR Format) पर ही भौतिक प्रगति रिपोर्ट ली जाए, ताकि कार्यों की वास्तविक स्थिति का सही आकलन किया जा सके और पारदर्शिता बनी रहे।

UTTARAKHAND DISASTER MANAGEMENT: सिंचाई विभाग को तकनीकी परीक्षण के बाद ही प्रस्ताव भेजने के निर्देश
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने सिंचाई विभाग के अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि विभागाध्यक्ष की अध्यक्षता वाली नियोजन की इंजीनियर्स समिति को तत्काल प्रभाव से सक्रिय किया जाए। मुख्य सचिव ने कहा कि भविष्य में जो भी प्रस्ताव शासन को भेजे जाएं, उससे पहले यह सुनिश्चित कर लिया जाए कि उस प्रस्ताव का इंजीनियर्स समिति द्वारा तकनीकी और वित्तीय पहलुओं पर बारीकी से परीक्षण कर लिया गया है। बिना तकनीकी जांच और वित्तीय आकलन के कोई भी कच्चा प्रस्ताव बैठक में नहीं लाया जाना चाहिए।

बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए बनेगी नई नियमावली
राज्य में बाढ़ और भूस्खलन जैसी आपदाओं से निपटने के लिए मुख्य सचिव ने सचिव आपदा प्रबंधन को निर्देश दिए हैं कि राज्य कार्यकारिणी समिति की बैठकों में लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता (ENC PWD) को भी स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया जाए। उनका मानना है कि सड़क और बुनियादी ढांचे से जुड़े मामलों में पीडब्ल्यूडी की राय अहम होती है। इसके साथ ही, मुख्य सचिव ने बाढ़ सुरक्षा कार्यों के लिए एक विस्तृत नियमावली बनाने के निर्देश दिए हैं।

इको-फ्रेंडली सुरक्षा और देहरादून की नहरों का सुधार
पर्यावरण संरक्षण और टिकाऊ विकास पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने अधिकारियों से कहा कि आपदा सुरक्षा कार्यों में जहां तक संभव हो, वेजिटेटिव प्रोटेक्शन वर्क यानी वनस्पतियों के माध्यम से सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह तरीका न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि पर्वतीय क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकने में भी कारगर साबित होता है। इसके अलावा, राजधानी देहरादून के लिए भी मुख्य सचिव ने एक अहम निर्देश जारी किया। उन्होंने विभागाध्यक्ष सिंचाई को आदेश दिया कि देहरादून शहर के अंतर्गत आने वाले विभिन्न कैनाल सिस्टम (नहरों) को दुरुस्त करने की योजना बनाई जाए।

बैठक में ये वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद
सचिवालय में आयोजित इस उच्च स्तरीय बैठक में शासन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। इस अवसर पर प्रमुख सचिव आर. मीनाक्षी सुंदरम, सचिव डॉ. वी. षणमुगम, सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन, आनंद स्वरूप और रंजना राजगुरु उपस्थित रहीं। इसके अलावा, प्रदेश के विभिन्न जनपदों के जिलाधकारी (DMs) भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) के माध्यम से बैठक से जुड़े और अपने-अपने जिलों के प्रस्तावों और समस्याओं को समिति के समक्ष रखा। मुख्य सचिव ने सभी जिलाधिकारियों को भी अपने क्षेत्रों में चल रहे आपदा राहत कार्यों में तेजी लाने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

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