UTTARAKHAND BUDGET SESSION: उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सरकार को सदन से लेकर सड़क तक घेरने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। विभिन्न ज्वलंत मुद्दों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल के नेतृत्व में भराड़ीसैंण विधानसभा भवन की ओर कूच किया।
UTTARAKHAND BUDGET SESSION के दूसरे दिन हो रहे प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और पूर्व कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत सहित पार्टी के कई दिग्गज नेता और हजारों की संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने दिवालीखाल बैरियर पर भारी पुलिस बल तैनात किया था, जहाँ कांग्रेसियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए गए थे।
UTTARAKHAND BUDGET SESSION: कई महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर कांग्रेस ने खोला मोर्चा
UTTARAKHAND BUDGET SESSION के दूसरे दिन कांग्रेस का यह प्रदर्शन राज्य में व्याप्त कई गंभीर समस्याओं और लंबित मामलों को लेकर आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित ‘वीआईपी’ के नाम का खुलासा करने की मांग सबसे प्रमुख रही। इसके साथ ही कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, राज्य की बिगड़ती कानून व्यवस्था, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर सरकार को जमकर घेरा।
पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच संघर्ष, वाटर कैनन का उपयोग
जैसे ही कांग्रेस का जुलूस दिवालीखाल बैरियर पर पहुँचा, वहाँ पहले से मौजूद पुलिस बल ने बैरिकेड्स लगाकर रास्ता रोक दिया। इस दौरान कांग्रेसी कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की हुई। स्थिति को नियंत्रण में रखने और प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को कई जगहों पर वाटर कैनन (पानी की बौछार) का भी सहारा लेना पड़ा। कांग्रेस कार्यकर्ताओं को रोकने के लिए प्रशासन ने विधानसभा मार्ग पर जगह-जगह अतिरिक्त बैरिकेडिंग की थी, जिससे कार्यकर्ताओं में भारी रोष देखा गया।

सदन के भीतर और बाहर सरकार की घेराबंदी
विधानसभा बजट सत्र के दूसरे दिन एक बार फिर से विपक्ष के तमाम विधायकों ने सदन के बाहर सीढ़ियों पर बैठकर विरोध प्रदर्शन किया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार विकास की बात तो करती है, लेकिन कहीं पर अल्पसंख्याको का उत्पीड़न हो रहा है, तो कहीं पर सरकारी जमीनों को खुर्द बुर्द करने का काम किया जा रहा। दूसरी तरफ धारचूला जैसे सीमांत इलाके में नेपाली मूल की महिला को गलत दस्तावेजों से जनप्रतिनिधि बनाया गया। जिसकी शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई।
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